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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया
"मुहतरमा अंजुमन `आरज़ू ` जी आदाब , ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें I  उनकी नज़रों में ज़बर होने की ख़्वाहिश दिल में लेहमने ख़ुद को ज़ेर उनको पेशतर रहने दिया-ये शे`र मुझे भर्ती का लगा I "
7 hours ago
Samar kabeer commented on JAWAHAR LAL SINGH's blog post मुखर्जी बाबू का विजयदसमी
"जनाब जवाहर लाल सिंह जी आदाब , सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें I "
7 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post वादे पर चन्द दोहे .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब , अच्छे दोहे लिखे आपने , इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I  एक निवेदन ये है कि पटल पर आई हुई रचनाओं पर भी कमेन्ट करना आपकी अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी है , इस पर ध्यान दें I "
7 hours ago
Samar kabeer commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"मुहतरमा अंजुमन `आरज़ू ` जी आदाब , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें I  सीपी-आँखों में इक गौहर दफ़्न किया`--इस मिसरे में उचित लगे तो `सीपी आँखों` की जगह "सीप सी आँखों " कर लें I  `ख़्वाब उनकी क़ुर्बत के टूटे तो हमनेइक…"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब , दोहों का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें I  `पत्थर को पूजे मगर, दुत्कारे इन्सान`---इस मिसरे के दुसरे हिस्से का वाक्य विन्यास ठीक नहीं , देखें I `पाषाणों को पूजती, कैसी है सन्तान ।मात-पिता की साधना, भूल गया…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"//चर्चा समाप्त// जनाब सौरभ पाण्डेय जी, क्या ये आदेश है?  मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आप कैसी चर्चा कर रहे हैं, जनाब अमीरुद्दीन साहिब ने आपसे जो प्रश्न किये हैं उनके उत्तर देना भी आपकी ज़िम्मेदारी में शामिल है, उन्हें तो आपने नज़र अंदाज़ ही कर…"
yesterday
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"//निम्नलिखित उद्धरण का संज्ञान लें, जो आज ही पोस्ट हुआ है और अभी सौभाग्य से मेरी नजर में आ गया// ये आलेख कहाँ पोस्ट हुआ है,बराह-ए-करम लिंक भेजें ताकि हम भी पढ़ सकें । "
Saturday
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"जनाब अमुरुद्दीन साहिब, जनाब निलेश जी की टिप्पणी मुझे नज़र नहीं आ रही है, कुछ देर पहले तक तो थी?"
Friday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"जनाब निलेश `नूर` साहिब आदाब, बहुत समय बाद ओबीओ पर एक अच्छी ग़ज़ल पढने को मिली इसके लिये आपका शुक्रीय: , दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ I तमन्नाओं को फिर रोका गया हैबड़ी मुश्किल से समझौता हुआ है.---मतला कुछ ख़ास नहीं लगा मुझे , `फिर रोका गया है `--यानी…"
Friday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"//तानाफुर में जब पढने में दिक्कत हो तब दोष जायज़ है// भाई, मैं तो जानता हूँ :-)))"
Friday
Samar kabeer commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"जनाब नाथ सोनांच्ली जी आदाब , बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I  `कल तक  तेरी  ही गोदी  में, पापा मैं तो सोती थीतुम्हे न पाती थी जब घर में, मार  दहाड़े  रोती थी` इसके पहले मिसरे में…"
Friday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"//मतले के दोनों मिसरों में ऐब-ए-तनाफ़ुर खटक रहा है// निलेश जी तनाफ़ुर और तक़ाबुल-ए-रदीफ़ को नहीं मानते:-)))) "
Thursday
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"//मगर देवनागरी लिपि में 'ऐन' नहीं होता है 'ऐन' को अलिफ़ की तरह पढ़ा और बोला जाता है, इसलिये मैंने यह छूट लेने की जसारत की है// आपकी बात मान लेते हैं,लेकिन अगर इस शैर को उर्दू लिपि में जब लिखेंगे तो वहाँ क्या उज़्र पेश करेंगे,…"
Oct 13
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"//इक अर्से से"  को इस तरह पढेंगे तो बह्र की पूर्ति हो रही है "इ+कर् +से+ से"// यानी आप यहाँ अलिफ़ वस्ल कर रहे हैं,लेकिन जनाब 'अर्से' शब्द तो 'ऐन' से शुरू'अ हो रहा है?"
Oct 13
Samar kabeer commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल -सूनी सूनी चश्म की फिर सीपियाँ रह जाएँगी
"'बातें मूसीक़ी-सी तेरी हैं मगर कल मेरे साथ' ये मिसरा अब ठीक है । बाक़ी बातें फ़ोन पर समझ लें ।"
Oct 12
Samar kabeer commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल -सूनी सूनी चश्म की फिर सीपियाँ रह जाएँगी
"मुहतरमा अंजुमन `आरज़ू` जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें I `वक़्त-ए-रुख़सत अश्क के गौहर लुटाएँगी बहुत ` इस मिसरे में `बहुत` की जगह "अगर" शब्द रखना उचित होगा I  `रेत पर लिख कर मिटाई है जो तुमने मेरे नामज़ेहन…"
Oct 12

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'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22 / 112

यही समाज की उलझन है क्या किया जाए

कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए

हर एक शख़्स गरानी के दौर में देखो

ख़ुद अपने आप से बदज़न है क्या किया जाए

सभी ये कहते हैं यारो हम आशिक़ों के लिये

ये शब अज़ल ही से बैरन है क्या किया जाए

सफ़र प जाने से पहले ये सोचना है हमें

हर एक गाम प रहज़न है क्या किया जाए

जो तू नहीं है तो…

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Posted on August 2, 2021 at 3:59pm — 21 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22/112

सुख़न में पैदा तेरे किस तरह कमाल हुआ

हज़ार बार यही मुझसे इक सवाल हुआ

 

तमाम उम्र गुज़ारेंगे किस तरह यारो

हमें तो साँस भी लेना यहाँ मुहाल हुआ

 

लिखा न जाएगा ख़त में ख़ुद आके देख लो तुम

तुम्हारे इश्क़ में जो भी हमारा हाल हुआ

 

हुनर नहीं ये हमारा अता ख़ुदा की है

कि शे'र जो भी कहा हमने बेमिसाल हुआ

 

ज़बाँ से कह न सके वो मगर सुना ये है

हमारे जाने का उनको बहुत मलाल…

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Posted on July 24, 2021 at 6:30pm — 17 Comments

"ओ बी ओ" की ग्यारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा

ग़ज़ल

22 22 22 22 22 2

जिसने देखा वो ये बोला ओबीओ

कोई नहीं है तेरे जैसा ओबीओ

जब तक ज़िंदा हूँ मैं साथ निभाऊँगा

है ये तुझ से मेरा वादा ओबीओ

'बाग़ी' जी के साथ सभी ने मिलजुल कर

नाज़ों से तुझको है पाला ओबीओ

दुनिया के कोने कोने में फैल गया

तू ने जो भी पाठ पढ़ाया ओबीओ

तेरा नाम शिखर पर दुनिया लिखती थी

मैंने कल शब ख़्वाब में देखा…

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Posted on April 1, 2021 at 2:52pm — 18 Comments

तरही ग़ज़ल

दोस्तो गर ज़िन्दगी में कामरानी चाहिए

ज़ह्न-ओ-दिल से गर्द नफ़रत की हटानी चाहिए



अर्ज़ कर दूँ आख़िरी ख़्वाहिश इजाज़त हो अगर

एक शब मुझको तुम्हारी मेज़बानी चाहिए



ज़िल्ल-ए-सुब्हानी अगर कुछ आपसे बच पाए तो

हम ग़रीबों को भी थोड़ी शादमानी चाहिए



मूँद कर आँखें न चलना याद रखना ये सबक़

ज़िन्दगी में हर क़दम पर सावधानी चाहिए



ज़िन्दगी में लाज़मी तो है मगर इंसान को

दफ़्न करने के लिये भी माल पानी चाहिए



फ़ज़्ल से रब के मुकम्मल हो गई मेरी ग़ज़ल

दोस्तो…

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Posted on November 9, 2020 at 5:30pm — 23 Comments

Comment Wall (40 comments)

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At 9:30pm on January 31, 2021, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय मित्र समीर साहिब जी गज़ब लिखा ख़ास कर ये पंक्तियाँ मुझे बेहद सुकून दे गई

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है





डॉ अरुण कुमार शास्त्री // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त

At 10:27am on June 27, 2020, Chetan Prakash said…

आदरणीय, मोहतरम समीर कबीर साहब प्रत्युत्तर के लिए आपका आभारी हूँ। रू का शाब्दिक
अर्थ आपने चहरा, (उक्त मिसरे में ) बता या , लेकिन मैंने मूल प्रति में रूह लिखा था। लेकिन कुछ लोग वहाँ ह की गणना कर ले ते हैं, सो मैंने रू चुना। एक और बात रू , वहाँ आत्मा की प्रतिच्छाया है न कि चहरा।आदरणीय, बिम्ब की दृष्टिसे रू का प्रयोग सर्वथा उचित है। माननीय, कवि का संसार ( काव्य ) बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होता है, जो लक्षणा और
व्य्ंजना से ही बोध गम्य है। शब्द ही ब्रह्म है, इसी हेतु मनीषियों ने कहा है। और, दूसरे मिसरे की बह्र से खारिज...बतायाआपने, मेहरबानी होगी, आपकी, तक्तीअ कर मार्ग- दर्शन करें!

At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

 
 
 

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