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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani's Page

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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"आदरणीय चौथमल जैन जी, प्रदत्त विषय पर रोला छंद में सुंदर सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"आदरणीय चौथमल जैन जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, प्रोत्साहन एवं सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, धूप और छाँव पर अति सुंदर दोहों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धूप छाँव पर तीन मुक्तक(1)कभी धूप अच्छी लगती है, कभी छाँव लगती प्यारी है, मौसम सा बदले मानव मन, मतलब की दुनिया सारी है,कर्म किया जैसा फल मिलता, वैसा ये कुदरती कानून,हमने है छेड़ा कुदरत को, अब आई उसकी बारी है। (2) मानव जीवन ऐसा जैसे, धूप छांव का खेल…"
Sunday
Dayaram Methani commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आदरणीय अमिता तिवारी जी, छंद मुक्त में अति भावपूर्ण सुंदर सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
May 10
Dayaram Methani commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (इबादतों में अक़ीदत की सर-कशी न मिला)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी, बहुत अच्छी एवं संदेश परक गज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें। गज़ल का मुखड़ा ही बहुत सुंदर संदेश दे रहा है —इबादतों में अक़ीदत की सर-कशी न मिला महब्बतों में मेरे यार दुश्मनी न मिला"
May 9
Dayaram Methani commented on Sushil Sarna's blog post मनोरम छंद में मुक्तक ....
"आदरणीय सुशील सरना जी, मनोरम छंद में अति सुंदर मुक्तकों का सृजन किया है। बधाई स्वीकार करें।"
May 9
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय रक्ताले जी, सर्वपथम तो आपका टिप्पणी हेतु आभार व्यक्त करता हूं। अमृत की मात्रा मैने चार ही गिनी थी। इसे तीन मात्रा में गिनना चाहिये ये मेरी जानकारी में नहीं था। भविष्य में ध्यान रहेगा। मनभावन और जीवन का तुकांत भी अन तुकांत के आधार पर लिया था।…"
Apr 24
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, अच्छी भावपूर्ण रचना सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें किंतु मुझे सार छंद के अनुसार रचना में निम्न पंक्तियों में मात्रा दोष दिखाई देता है। बाली गेहूँ की दमकी ।संघर्षों से सीखती लड़ना। संकल्प दृश्य माथे पर । आप विद्वान है स्वयं देख…"
Apr 23
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी, सार छंद में सुंदर सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Apr 23
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय प्रतिभा पांडे जी, सुंदर सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Apr 23
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, सार छंद में सुंदर सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Apr 23
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं हार्दिक आभार।"
Apr 23
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया, मैना मेरी कहती,गर्मी ने है प्यास बढ़ाई, नदिया सूखी बहती। छन्न पकैया छन्न पकैया, कहती मेरी नानी,जल की मांग बढ़े गर्मी में, मांगे सब ही पानी। छन्न पकैया छन्न पकैया, ठण्डा ठण्डा पानी,पानी पीकर नाचे झूमें, जैसे चढ़ी जवानी। छन्न…"
Apr 23

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

Dayaram Methani's Blog

गज़ल

गज़ल

2122 2122 2122 212

आजकल हर बात पर लड़ने लगा है आदमी,

क्रोध के साये तले पलने लगा है आदमी।

चाह झूठी शान की अब बढ़ गई है बहुत ही,

इस लिये बेचैन सा रहने लगा है आदमी।

आग हिंसा की बहुत झुलसा रही है देश को,

खूब धोखा दल बदल करने लगा है आदमी।

धन कमाया पर बचाया कुछ नहीं अपने लिये,

अब बुढ़ापे में छटपटाने लगा है आदमी।

जिन्दगी भर झगड़ने से क्या मिला इंसान को,

देख ’’मेठानी‘‘ बहुत रोने लगा है आदमी।

मौलिक…

Continue

Posted on January 30, 2022 at 12:16pm — 2 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 2122 2



ज़िन्दगी में हर कदम तेरा सहारा हूँ

नाव हो मझधार तो तेरा किनारा हूँ

तुम भटक जाओ अगर अनजान राहों में

पथ दिखाने को तुम्हें रौशन सितारा हूँ

ज़िन्दगी का खेल खेलो तुम निडरता से

हर सफलता के लिए मैं ही इशारा हूँ

राह जीने की सही तुमको दिखाऊंगा

ज़िन्दगी के सब अनुभवों का पिटारा हूँ

साथ क्यों दूं मैं तुम्हारा सोच मत ऐसा

अंश तुम मेरे पिता मैं ही तुम्हारा हूँ

- दयाराम मेठानी…

Continue

Posted on November 6, 2021 at 10:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल

 2122 2122 2122 212

नाव है मझधार में नाविक नशे में चूर है

सांझ है होने लगी मंजिल नज़र से दूर है

संकटों से आदमी क्या देव भी बचते नहीं

वक्त के आगे सभी होते यहां मजबूर है

जिन्दगी की कशमकश में जीना’ जिसको आ गया

यों समझ लो हौसलों से वो बहुत भरपूर है

दोष है अपना समय के साथ चल पाये नहीं

बंद मुट्ठी से फिसलना वक्त का दस्तूर है

हाल ‘‘मेठानी’’ बतायंे क्या किसी को अब यहां

आदमी सुनता नहीं अब हो गया मगरूर…

Continue

Posted on August 27, 2019 at 10:00pm — 2 Comments

गज़ल सीख लो

2122 2122 212

दर्द को दिल में दबाना सीख लो

ज़िन्दगी में मुस्कराना सीख लो

आंख से आंसू बहाना छोड़िये

हर मुसीबत को भगाना सीख लो

ज़िन्दगी है खेल, खेलो शान से

खेल में खुद को जिताना सीख लो

फूल को दुनिया मसल कर फैंकती

खुद को कांटों सा दिखाना सीख लो

छोड़ दें अब गिड़गिड़ाना आप भी

कुछ तो कद अपना बढ़ाना सीख लो

थी जवानी जोश भी था स्वप्न भी

दिन पुराने अब भुलाना सीख लो

कौन…

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Posted on July 4, 2019 at 9:30pm — 8 Comments

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At 10:09pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय दयाराम मेथानि जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया जनाब
 
 
 

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