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दोस्तो गर ज़िन्दगी में कामरानी चाहिए
ज़ह्न-ओ-दिल से गर्द नफ़रत की हटानी चाहिए

अर्ज़ कर दूँ आख़िरी ख़्वाहिश इजाज़त हो अगर
एक शब मुझको तुम्हारी मेज़बानी चाहिए

ज़िल्ल-ए-सुब्हानी अगर कुछ आपसे बच पाए तो
हम ग़रीबों को भी थोड़ी शादमानी चाहिए

मूँद कर आँखें न चलना याद रखना ये सबक़
ज़िन्दगी में हर क़दम पर सावधानी चाहिए

ज़िन्दगी में लाज़मी तो है मगर इंसान को
दफ़्न करने के लिये भी माल पानी चाहिए

फ़ज़्ल से रब के मुकम्मल हो गई मेरी ग़ज़ल
दोस्तो अब आपकी बस क़द्र दानी चाहिए

'नूर' साहिब ने लिखी ये ख़त में फ़रमाइश मुझे
हीरे मोती से जड़ी इक कूड़े दानी चाहिए

आज कल तो महफ़िलों में शाइरी के नाम पर
ऐ 'समर' ग़ज़लें नहीं बस नोहा ख़्वानी चाहिए

'समर कबीर'
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on November 20, 2020 at 5:21pm

जनाब रूपम कुमार जी आपका बहुत बहुत शुक्रिय:

Comment by Samar kabeer on November 20, 2020 at 5:20pm

जनाब लक्ष्मण धामी जी आपका बहुत बहुत शुक्रिय:

Comment by Samar kabeer on November 20, 2020 at 5:19pm

जनाब सालिक गणवीर जी आपका बहुत बहुत शुक्रिय:

Comment by Samar kabeer on November 20, 2020 at 5:19pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आपका बहुत बहुत शुक्रिय:

Comment by Samar kabeer on November 20, 2020 at 5:18pm

जनाब चेतन प्रकाश जी आपका बहुत बहुत शुक्रिय:

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 20, 2020 at 4:13pm

वाह वाह आ. समर सर..
आयोजन में इंतज़ार था आपकी ग़ज़ल का ..
बहुत बहुत बधाई 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 19, 2020 at 9:08pm

वाह आदरणीय...क्या ही शानदार ग़ज़ल पढ़ने को मिली...हरेक शे'र बेमिसाल...

Comment by Md. Anis arman on November 19, 2020 at 6:40pm

समर कबीर साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है एक अलग रंग लिए हुए हर शेर उस्तादों वाला लग रहा है कवाफ़ी बेहतरीन ढंग से निभाए गए है बहुत बहुत मुबारक 

Comment by TEJ VEER SINGH on November 19, 2020 at 12:14pm

हार्दिक बधाई आदरणीय समर कबीर साहब जी।आदाब। लाज़वाब गज़ल।

ज़िल्ल-ए-सुब्हानी अगर कुछ आपसे बच पाए तो
हम ग़रीबों को भी थोड़ी शादमानी चाहिए

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 11, 2020 at 1:28pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

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