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Aik Ghazal ke do Sher

हमारी सोच का पंछी अभी उड़ान मे है
ज़ॅमी से दूर बहुत दूर  आसमान मे है

न कल के ख्वाब न पुरखों की आनबान मे है
तेरा वजूद अगर है तो वर्तमान मे है .....

Posted on September 5, 2011 at 7:37pm — 3 Comments

Ghazal-8

यदि एकलव्य से विद्यार्थी नहीं होते
तो द्रोणाचार्य कभी स्वार्थी नहीं होते

कहीं पे भाव का अनुवाद छूट जाता है
कहीं पे शब्द समानार्थी नहीं होते

न जाने कौन सा बनवास है की बंजारे
किसी नगर में भी शरणार्थी नहीं होते

न आज है कोई अर्जुन न है महाभारत
तभी तो कृष्ण कहीं सारथि नहीं होते

विनम्रता से क्षमा याचना जो करते हैं
सदा ह्रदय से क्षमाप्रार्थी नहीं होते

Posted on June 8, 2010 at 12:00am — 7 Comments

Ghazal-7

गुमाँ का बोझ हटा तो संभल गया हूँ मैं
इसी यक़ीन के नीचे कुचल गया हूँ मैं

ये क्या कि मोम कि सूरत पिघल गया हूँ मैं
तेरे क़रीब की हर शय में ढल गया हूँ मैं

इस अंधकार की सीमा तलाशने के लिए
एक आफताब से आगे निकल गया हूँ मैं

अज़ीज़ दोस्त के चेहरे की अजनबी आँखें
बता रहीं हैं कि कितना बदल गया हूँ मैं

मेरा वजूद समंदर की रेत जैसा है
ख़याल छाओं का आते ही जल गया हूँ मैं

Posted on June 4, 2010 at 5:32pm — 7 Comments

Ghazal-6

रक्त से सारा मरुस्थल तरबतर करते हुए
प्राण तो त्यागे मगर खुद को अमर करते हुए

सब्र की सारी हदों से कोई आगे बढ़ गया
अग्निपथ पे तिशनगी को अग्रसर करते हुए

उसके चेहरे के वरक़ को झुर्रियों से भर दिया
उम्र की रेखाओं ने हस्ताक्षर करते हुए

धीरे धीरे बोझ बुनियादों पे कम होता गया
वक़्त यूँ गुज़रा हवेली को खंडहर करते हुए

ज़िंदगी वो खेल है जिसका समापन ही नहीं
मौत आई खेल मे मध्यांतर करते हुए

Posted on June 3, 2010 at 9:47pm — 8 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 1:33pm on October 18, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 8:11pm on June 20, 2010, asha pandey ojha said…
कहीं पे भाव का अनुवाद छूट जाता है
कहीं पे शब्द समानार्थी नहीं होते

न जाने कौन सा बनवास है की बंजारे
किसी नगर में भी शरणार्थी नहीं होते
kamal gzab
At 8:10pm on June 20, 2010, asha pandey ojha said…
तेरी आँखे बदल भी सकती हैं
मेरा चेहरा बदल नही सकता

मुझ को मिट्टी मे तुम मिला भी दो
तेरे साँचे मे ढल नही सकता
bahut khoob surat ...waah
At 8:09pm on June 20, 2010, asha pandey ojha said…
Your most welcome
At 3:13pm on May 23, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 2:55pm on May 16, 2010, aleem azmi said…
bahut umda likhte hai aap janaab ...hum to aapke kaayal ho gaye
likhte rahiye
At 7:20pm on May 14, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…


RATNESH RAMAN PATHAK
At 12:49pm on May 14, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 12:31pm on May 14, 2010, Admin said…

 
 
 

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