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Tasdiq Ahmed Khan
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  • Ganga Dhar Sharma 'Hindustan'
  • SALIM RAZA REWA
 

Tasdiq Ahmed Khan's Page

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Tasdiq Ahmed Khan commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"जनाब अफ़रोज़ साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। मुहतरम समर साहिब के मश्वरे पर ध्यान जरूर दीजियेगा"
Sep 19
Tasdiq Ahmed Khan commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। आखरी शेर में महब्बत को मुहब्बत कर लें"
Sep 19
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"जनाब अफ़रोज़ सहर साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
Sep 19
Afroz 'sahr' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"आदरणीय तस्दीक़ जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए दाद पेश करता हूँ ! कुबूल करें !"
Sep 18
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"मुहतरम जनाब  समर कबीर  साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      "
Sep 18
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
" जनाब  ब्रजेश कुमार  साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      "
Sep 18
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"मुहतरम जनाब  गिरिराज साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      "
Sep 18
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post जिसे ख़यालों में रखता हूँ - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम साहिब , उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ     "
Sep 18
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Sep 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय..हर एक शेर लाजबाब"
Sep 16
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब अरुण साहिब ,छन्द पसन्द करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया। उस मिसरे को यूं कर लिया है -जो प्रतियोगी उड़े हवा में ,लगते हैं वह दोनों वीर ।"
Sep 16

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"बहुत खूब , आदरणीय तस्दीक भाई , ग़ज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ।"
Sep 16
Tasdiq Ahmed Khan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"जनाब नीलेश नूर साहिब ,उम्दा गज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Sep 16
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"मुहतरम जनाब शकूर साहिब ,आपकी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।"
Sep 16
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"जनाब नीलेश नूर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया। ध्यान दिलाने का शुक्रिया।"
Sep 16

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मोहतरम तस्दीक अहमद खान साहब, बहुत बहुत बधाई आपको"
Sep 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Ajmer
Native Place
qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

Tasdiq Ahmed Khan's Blog

ग़ज़ल ( कोई देखे हमें महब्बत से )

फाइलातुन -मफ़ाइलुन -फेलुन 



दिल की हसरत यही है मुद्दत से |

कोई देखे हमें महब्बत से |

नामे उल्फ़त से जो नहीं वाक़िफ़

देखता हूँ मैं उसको हसरत से |

सब्र का फल तो खा के देख ज़रा

क्यूँ है मायूस उसकी रहमत से |

जिस ने देखा उन्हें यही बोला

उनको रब ने बनाया फ़ुर्सत से |

उसके हाथों में आइना दे दो

बाज़ आए नहीं जो गीबत से |

देखिए तो करम अज़ीज़ों का

वो हैं बे ज़ार मेरी सूरत से…

Continue

Posted on October 6, 2017 at 12:00pm — 16 Comments

ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )

(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फइलुन /फेलुन)

आ गया हूँ वहाँ जिस जा से मैं जा भी न सकूँ |

मा सिवा उनके कहीं दिल को लगा भी न सकूँ |

इस तरह बैठे हैं वो फेर के आँखें मुझ से

उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ |

मेरी महफ़िल में किसी ग़ैर को लाने वाले

दिल से मजबूर हूँ मैं तुझको जला भी न सकूँ |

फितरते तर्के महब्बत है तेरी यार मगर 

तेरी इस राय को मैं अपना बना भी न सकूँ |

इतना मजबूर भी मुझको न खुदा कर देना…

Continue

Posted on September 24, 2017 at 9:00am — 16 Comments

ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

-----------------------------------------------------

(फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन)

 

अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम |

उनके कुचे से वापस न जाएँगे हम |

 

ज़ुल्म कितने भी ढा ले सितमगार तू

ग़म के हर दौर में मुस्कराएँगे हम |

 

आपको तो अज़ीज़ों से फ़ुर्सत नहीं

किस तरह हाल दिल का सुनाएँगे हम |

 

जब भी मिलता है देता है वो ज़ख़्मे नौ

दस्त उलफत का कब तक मिलाएँगे…

Continue

Posted on September 14, 2017 at 10:23pm — 14 Comments

ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )

ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )

-------------------------------------------------------------------



(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फेलुन )



मुन्तखिब करता है दिल जिसको भी दिलबर यारो |

हाए वो शख़्स निकलता है सितम गर यारो |

उनके चहरे से नज़र हटती नहीं है मेरी

किस तरह देखूं ज़माने के मैं मंज़र यारो |

कूचए यार से जाएँ तो भला जाएँ कहाँ

राहे उलफत में लुटा बैठे हैं हम घर यारो |

आस्तीनों में जो रखते हैं…

Continue

Posted on September 5, 2017 at 6:14pm — 17 Comments

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At 9:21pm on September 3, 2017, SALIM RAZA REWA said…
जनाब तस्दीक साहब अपना मोबाइल नंबर देने की मेहरबानी करें
At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत आभार"
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