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Tasdiq Ahmed Khan
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"मोहतरमा प्रतिभा साहिबा, लघुकथा पसंद करने और आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Dec 31, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"जनाब शेख शहजाद साहिब आ दाब, लघुकथा पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया "
Dec 31, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"मोहतरमा दिव्या जी, आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Dec 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब, आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Dec 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"मुहतरम योगराज साहिब, लघुकथा आपको अच्छी लगी है जिसके लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया आपकी हौसला अफजाई से एक नई ऊर्जा हासिल होती है "
Dec 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-81
"लघुकथा - फ़ैसला (विश्वास) आशा जैसे ही माता जी और पिता जी को कमरे में चाय देकर मुड़ी, पिता जी ने कहा रुको तुम्हें एक बात बतानी है l आशा ने रुक कर पूछा, "क्या बात है पिता जी" पिता जी बोले, "तुम्हारे लिए शादी का रिश्ता अमित और राजेश के…"
Dec 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"ग़ज़लदेख कर जाने जहां कातिल जवानी आपकी lहो गई है सारी दुनिया ही दिवानी आपकी lइश्क़ में सौगात धोके की हमें जो दी कभीसिर्फ़ वो ही पास में है इक निशानी आपकी lदिल लगी को ही मुहब्बत दोस्ती समझा किएहो गई हमसे खता जो बात मानी आपकी lआपके बारे में जब भी…"
Dec 29, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"जनाब तेज वीर साहिब, आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Nov 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"जनाब तेज वीर साहिब, प्रदत्त विषय पर शानदार लघुकथा हुई है, मुबारक बाद कुबूल फरमाएं "
Nov 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब, आपकी is हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Nov 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"जनाब शहजाद साहिब आ दाब, आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Nov 30, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"जनाब शहजाद साहिब, प्रदत्त विषय पर शानदार लघुकथा हुई है, मुबारक बाद कुबूल फरमाएं "
Nov 29, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"जनाब समरथ जी, अच्छी लघुकथा हुई है, मुबारक बाद कुबूल फरमाएं "
Nov 29, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"मुहतरमा रक्षिता जी, अच्छी लघुकथा हुई है, मुबारक बाद कुबूल फरमाएं "
Nov 29, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"लघुकथा - तलाश (आकर्षण)मानव अपने माता पिता के साथ लखनऊ के एक शादी हाल में किसी मिलने वाले की लड़की की शादी में आया है l बारात आ चुकी है, सब लोग खाना खाने में व्यस्त हैं l पंडाल में दूल्हा और दुल्हन को फेरों के लिए बिठाया जा रहा है lइसी बीच वर पक्ष और…"
Nov 29, 2021
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"ग़ज़ल मेरा दिल ये चाहता है कभी तू भी आ निकल के l मुझे भी मिलेगी मंज़िल तेरे साथ साथ चल के l ये है खौफ़ सिर्फ़ मुझको वो सुना रहे हैं फैसल कहीं रह न जाऊँ यारो मैं वफा में हाथ मल के l अभी बे नकाब घर से वो गली में आ गए हैं न यूँ देखने लगी है उन्हें हर…"
Nov 26, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Ajmer
Native Place
qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

Tasdiq Ahmed Khan's Blog

ग़ज़ल - क़यामत का मंज़र दिखाने लगे हैं

गज़ल(122-122-122-122)

क़यामत का मंज़र दिखाने लगे हैं

अचानक ही वो मुस्कुराने लगे हैं

ये क्या कम है सुनते न थे जो हमारी

वो अब हाथ हम से मिलाने लगे हैं

बुरा हो जवानी का आयी है जबसे

वो सूरत ही मुझ से छुपाने लगे हैं

दिए जो जलाये उजाले की ख़ातिर

वही आग घर को लगाने लगे हैं

अमीरों के बंगले बचाने की ख़ातिर

वो मुफ़लिस के छप्पर जलाने लगे हैं

सरे बज्म हँस हँस के मत बात कीजिए

सभी लोग तियूरी चढ़ाने लगे हैं

ग़ज़ब है वफा जिनसे मैं कर…

Continue

Posted on November 9, 2019 at 8:59am — 6 Comments

गज़ल _तुम चाहे गुज़र जाओ किसी राह गुज़र से

(मफ ऊल_मफाईल_मफाईल_फ ऊलन) 

.

तुम चाहे गुज़र जाओ किसी राह गुज़र से

लेकिन नहीं बच पाओगे तुम मेरी नजर से

.

वो खौफ़ ए ज़माना से या रुस्वाई के डर से

देता रहा आवाज मैं निकले न वो घर से

.

तू जुल्म से आ बाज़ अभी वक़्त है ज़ालिम

पानी भी बहुत हो चुका ऊँचा मेरे सर से

.

फँसता है सदा हुस्न के वो जाल में यारो

वाकिफ़ जो नहीं उनके दग़ाबाज़ हुनर से

.

मालूम करें आओ कठिन कितना है रस्ता

कुछ लोग अभी लौट के आए हैं सफ़र…

Continue

Posted on September 10, 2019 at 10:00am — 5 Comments

गज़ल - अकेले ईद हम कैसे मनाएँ

गज़ल(ईद मनाएं)

(मफाईलुन - मफाईलुन - फ ऊलन)

न घर आएं न वो हम को बुलाएं

अकेले ईद हम कैसे मनाएं

यही है ईद का पैग़ाम लोगों

दिलों को आज हम दिल से मिलाएँ

मुबारक बाद मैं दूँ उनको कैसे

कभी वो सामने मेरे न आएं

मनाई साथ ही थी हम ने होली

सिवइयां साथ ही हम आज खाएँ

गिले शिकवे भुला दें आज के दिन

गले मिल कर मुहब्बत को बढ़ाएं

वतन से ख़त्म हो फिरका परस्ती

ख़ुदा से आज ये…

Continue

Posted on June 5, 2019 at 9:00pm — 3 Comments

ग़ज़ल _किसी से प्यार किसी से क़रार ख़ैर ख़ुदा

ग़ज़ल

( मफाइलुन_फ इ लातुन_मफाइलुन_फेलुन) 

किसी से प्यार किसी से क़रार ख़ैर ख़ुदा

करे वो तीर से दो दो शिकार ख़ैर ख़ुदा

अलम छुपाने की कोशिश तो हँस के की लेकिन

निगाहे नम ने किया आश कार ख़ैर ख़ुदा

नज़र पे पहरा है दीवाना फ़िर भी कूचे में

सनम को अपने रहा है पुकार ख़ैर ख़ुदा

तवक्को उनसे है फैसल की, कर रहे हैं जो

फरेबियों में हमारा शुमार ख़ैर ख़ुदा

लगा ये देख के उनको उदास महफ़िल में

खिज़ा के साथ…

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Posted on May 18, 2019 at 12:34pm — 4 Comments

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At 7:39am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया साहब हौसला अफ़जाई का
At 5:33pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब
मैं बहुत आभारी हूँ कि आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी शुक्रिया
मुझमें अभी बहुत कमी है मैं जानता हूँ लेकिन आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख पाउँगा ऐसी आशा करता हूँ आपका बहुत बहुत आभार और शुक्रिया
At 9:21pm on September 3, 2017, SALIM RAZA REWA said…
जनाब तस्दीक साहब अपना मोबाइल नंबर देने की मेहरबानी करें
At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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Rakesh Kumar is now a member of Open Books Online
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"वाह वाह, सभी पद बहुत ही सार्थक बन पड़े हैं, सुंदर गीतिका हेतु बधाई आदरणीय डॉ गोपाल कृष्ण जी ।"
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"आभार आदरणीय, यह रचना एक पुरानी याद के फलस्वरूप जन्म ली, किन्तु मैं कोई बचाव नहीं करना चाहता, आपकी…"
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"नमन आदरणीया बहुत अच्छी  अतुकांत  रचना  हुई है! बधाई स्वीकार करें, सादर "
22 hours ago

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