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Naveen Mani Tripathi
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"आ0 कबीर सर नमन । अपने जो शेर भेजा है उसमें यां शब्द न तो हिंदी है न उर्दू है । आज के डेट में यां वां आदि शब्द ग़ज़ल में वर्जित कर दिए गये हैं । ऐसा सुना है ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । दूसरे शैर के सानी में 'शायद'शब्द भर्ती का है, इसकी जगह 'मुझको' कर सकते हैं । 'चैन से मैं सो रहा था क़ब्र में अपनी तो क्यों तुम यहाँ भी आ गए मुझको सताने…"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"Waaaaaaaah bahut sundr srijan sir haardik badhaaèeeeeeeeeee sir"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"खूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय त्रिपाठी जी...."
yesterday
Kalipad Prasad Mandal commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"आदरणीय नवीनमणि जी  इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये | बहु उम्दा "
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post लोग तन्हाई में जब आपको पाते होंगे
"आ0 कबीर सर सादर नमन । आपकी इस्लाह अत्यंत कीमती है । करेक्ट करता हूँ ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post लोग तन्हाई में जब आपको पाते होंगे
"आ0 ब्रजेश कुमार ब्रज जी सप्रेम आभार"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसकी सूरत नई नई देखो
"आ0 रक्षिता सिंह जी सादर आभार ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसकी सूरत नई नई देखो
"सादर नमन के साथ आभार भाई सुरेंद्र नाथ सिंह जी "
yesterday
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"आदरणीय नवीनमणि त्रिपाठी जी आदाब,                                 बेहतरीन अश'आरों से सजी ग़ज़ल । हर शे'र बढ़िया । दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post लोग तन्हाई में जब आपको पाते होंगे
"खूब ग़ज़ल कही.."
Saturday
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"लाज़बाब ग़ज़ल  आदर्णीय त्रिपाठी जी. बधाई"
Saturday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Saturday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'सारे तमाशबीन के के चेहरे उतर गए' 'तमाश बीन'का अर्थ है,तमाशा देखने वाला,एक वचन,दूसरी बात 'चेहरे'उर्दू के हिसाब से 212 होगा जबकि सही शब्द है…"
Saturday
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है।बधाई"
Saturday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 मो आरिफ साहब विशेष आभार"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए

2122 2122 2122 212

ढूढते हैं वो बहाना रूठ जाने के लिए ।।

है बहुत अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए ।।

इक तेरा मासूम चेहरा इक मेरी दीवानगी ।

रह गईं यादें फकत शायद मिटाने के लिए ।।

फिर वही क़ातिल निगाहें और अदायें आपकी।

याद आयी हैं हमारा दिल जलाने के लिए ।।

घर मेरा रोशन है अब भी आपके जाने के बाद ।

हैं चरागे ग़म यहाँ घर जगमगाने के लिए ।।

चैन से मैं सो रहा था कब्र में अपनी तो…

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Posted on December 16, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

यूँ तीरगी के साथ ज़माने गुज़र गए ।

वादे तमाम करके उजाले मुकर गए ।।

शायद अलग था हुस्न किसी कोहिनूर का ।

जन्नत की चाहतों में हजारों नफ़र गए ।।

ख़त पढ़ के आपका वो जलाता नहीं कभी ।

कुछ तो पुराने ज़ख़्म थे पढ़कर उभर गए।।

उसने मेरे जमीर को आदाब क्या किया ।

सारे तमाशबीन के चेहरे उतर गए ।।

क्या देखता मैं और गुलों की बहार को ।

पहली नज़र में आप ही दिल मे ठहर गए…

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Posted on December 15, 2017 at 12:30pm — 5 Comments

लोग तन्हाई में जब आपको पाते होंगे

2122 1122 1122 22

लोग तन्हाई में जब आप को पाते होंगे।

मेरा मुद्दा भी सलीके से उठाते होंगे ।।

लौट आएगी सबा कोई बहाना लेकर ।

ख्वाहिशें ले के सभी रात बिताते होंगे ।।

सर फ़रोसी की तमन्ना का जुनूं है सर पर ।

देख मक़तल में नए लोग भी आते होंगे ।।

सब्र करता है यहां कौन मुहब्बत में भला।

कुछ लियाकत का असर आप छुपाते होंगे ।।

उम्र भर आप रकीबों को न पहचान सके ।।

गैर कंधो से वे बन्दूक…

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Posted on December 13, 2017 at 1:30am — 13 Comments

ग़ज़ल

1212 1212 1212

जगी थीं जो भी हसरतें, सुला गए ।

निशानियाँ वो प्यार की मिटा गए।।

उन्हें था तीरगी से प्यार क्या बहुत।

चिराग उमीद तक का जो बुझा गए ।।

पता चला न,  सर्द कब हुई हवा।

ठिठुर ठिठुर के रात हम बिता गए ।।

लिखा हुआ था जो मेरे नसीब में ।

मुक़द्दर आप अदू का वो बना गए।।

नज़र पड़ी न आसुओं पे आपकी

जो मुस्कुरा के मेरा दिल दुखा गये ।।

न जाने कहकशॉ से टूटकर कई ।

सितारे क्यों…

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Posted on December 11, 2017 at 11:09pm — 6 Comments

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