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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"मीर सब अपना वजूद मिसरे अलिफ वस्ल का सुंदर प्रयोग ।    अच्छी ग़ज़ल हुई । कबीर साहब की इस्लाह काबिल ए गौर है । "
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"ग़ज़ल का प्रयास बहुत सुंदर हुआ है । अच्छे मफ़हूम पर ग़ज़ल हुई । 221 1221 1221 122 उनके लिए कुर्बान मैंने हर खुशी कर दी । जिनके लिए कुर्बान हुई हर खुशी मेरी । बस लोग वही मुझको रुलाने के लिए हैं ।। एक सुझाव मात्र ।  ऐसी बह्र जहां 11 का प्रयोग हो वहाँ…"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आ0 कबीर सर हर एक शेर बहुत खूब लिखा आपने  हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी है बेहतरीन शेर लगा । आ0 अजय तिवारी जी की बात से सहमत हूँ कि आसान शब्दो मे भी बहुत अच्छी गज़ल कही जा सकती है । यह आपकी ग़ज़ल से सीख मिली…"
yesterday
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. "
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहेदिल से शुक्रिया ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 महेंद्र कुमार साहब आपकीं बात से भी सहमत हो गया । हार्दिक आभार ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर बहुत बहुत आभार के साथ नमन । मैं आपसे सहमत हो गया सर । "
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"'दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो अभी तक वह खज़ाना चल रहा है' इस शैर में 'वो' और 'वह' शब्द के टकराव की सूरत बन रही है,इसका कारण ये है कि दोनों ही शब्द वस्तु के लिए इस्तेमाल हुए हैं,जबकि 'वो' शब्द वयक्ति और…"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेजवीर सिंह साहब तहेदिल से आभार ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 मुहम्मद अनीस शेख़ साहब तहेदिल से शुक्रियः । "
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 गुरुदेव कबीर सर हार्दिक आभार के साथ नमन । ग़ज़ल खटक मिटाने के लिए जो सुझाव दिया उसके लिए तहेदिल से आभारी हूँ । लेकिन प्रश्न एक रह जाता है वो और वह को लेकर । मैने पढा था सानी और ऊला में एक ही शब्द के टकराव से बचना चाहिए । सेम शब्द सानी और ऊला में…"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 महेंद्र कुमार जी गज़ल तक आने के लिए तहेदिल से शुक्रियः । ऊला में वो और सानी में यह दिनों शब्द का प्रयोग किसी एक वस्तु के लिए नहीं है । वो शब्द व्यक्ति के लिए है जबकि वह शब्द ख़ज़ाने के लिए है । मुझे नहीं लगता कोई दोष है ।  गुरुदेव कबीर साहब की…"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'तुझे बख्सा खुदा ने हुस्न इतना' इस मिसरे में 'बख्सा' को "बख़्शा" कर लें । 'दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो' इस मिसरे को यूं कर…"
Friday
Md. anis sheikh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल हुई है नवीन मणि त्रिपाठी जी बहुत बहुत बधाई                ग़ज़ल को गुनगुनाने की थी हसरत ।तस्व्वुर में तराना चल रहा है ।। ये खूब कही  आपने "
Friday
Mahendra Kumar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल हुई है आदरणीय नवीन जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  1. //दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो ।     अभी तक वह खज़ाना चल रहा है ।।// इस शेर के ऊला में "वो" और सानी में "वह" आपस में टकराने के कारण खटक रहे…"
Thursday

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

1222 1222 122

अभी तक आना जाना चल रहा है ।

कोई रिश्ता पुराना चल रहा है ।।

सुना है शह्र की चर्चा में आगे ।

तुम्हारा ही फ़साना चल रहा है ।।

इधर दिल पर लगी है चोट गहरी ।

उधर तो मुस्कुराना चल रहा है ।।

कहीं तरसी जमीं है आब के बिन ।

कहीं मौसम सुहाना चल रहा है ।।

तुझे बख्सा खुदा ने हुस्न इतना ।

तेरे पीछे ज़माना चल रहा है ।।

दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो ।

अभी तक वह खज़ाना चल रहा है…

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Posted on January 16, 2019 at 11:37pm — 14 Comments

ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो

2122 2122 212

आज उनका है ज़माना चुप रहो ।

गर लुटे सारा खज़ाना चुप रहो ।।

क्या दिया है पांच वर्षों में मुझे ।

मांगते हो मेहनताना चुप रहो ।।

रोटियों के चंद टुकड़े डालकर ।

मेरी गैरत आजमाना चुप रहो ।।

मंदिरों मस्ज़िद से उनका वास्ता ।

हरकतें हैं वहिसियाना चुप रहों ।।

लुट गया जुमलों पे सारा मुल्क जब ।

फिर नये सपने दिखाना चुप रहो ।।

दांव तो अच्छे चले थे जीत के ।

हार पर अब…

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Posted on January 8, 2019 at 12:30pm — 10 Comments

हुस्न कोई नूरानी है



22 22 22 2



शायद    वह    दीवानी   है ।

लड़की   जो  अनजानी  है ।।

दिलवर से मिलना है क्या ।

चाल   बड़ी   मस्तानी  है ।।

इश्क़  हुआ है क्या  उसको ।

आँखों    में   तो   पानी  है ।।

खोए    खोए    रहते    हो ।

यह   भी   इक  नादानी  है ।।…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 11:55am — 3 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222

तरन्नुम बन ज़ुबाँ से जब कभी निकली ग़ज़ल कोई ।

सुनाता ही रहा मुझको मुहब्बत की ग़ज़ल कोई ।।

बहुत चर्चे में है वो आजकल मफ़हूम को लेकर ।

जवां होने लगी फिर से पुरानी सी ग़ज़ल कोई ।।

कभी यूँ मुस्कुरा देना कभी ग़मगीन हो जाना ।

वो छुप छुप कर तुम्हारी जब कभी पढ़ती…

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Posted on January 6, 2019 at 11:21am — 3 Comments

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At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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