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Naveen Mani Tripathi
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Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"'यूँ रुख़ को पलट कर चले जाने वाले बता दीजिये क्या मुहब्बत ख़ता है' इस शैर में शुतरगुर्बा का दोष है,सानी मिसरा यूँ कर सकते हैं:- 'बता दे हमें,क्या महब्बत ख़ता है' चौथे शैर के ऊला में 'समझे' को "समझें" कर लें…"
17 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"जी हां सर साहित्य में "तुमको मुझको गाज़ी कहना मैं तुमको हाजी कहूंगा" यह प्रथा वाकई अब खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है ।"
23 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"भाई जब तक कोई ख़ुद ओबीओ से जुड़ना न चाहे हम उसे कैसे जोड़ सकते हैं,सिर्फ़ प्रयास कर सकते हैं जो हम बराबर ओबीओ का प्रचार करते नहीं थकते । रही मुशायरों की बात तो ये इसी तरह हो रहे हैं कि तुम हमें बुलाओ हम तुम्हें बुला लेंगे,इस कारण से अच्छे शायरों को कोई…"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"कबीर सर अफसोस यह हुआ कि अदब की महफ़िल में कैसे अधकचरे ज्ञान वाले शायर पैसा देकर बुलाते हैं । मेरे ख्याल से आयजोकों को भी आप ओ बी ओ से जोड़े जिससे उन्हें चुनाव करने में आसानी हो ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"आ0 कबीर सर आप जैसा गुरु मिलना दुर्लभ है आज कानपुर में एक मुशायरे में शायरों को सुन रहा था तो आधे शायरों में बह्र और काफ़िया की गलती पकड़ने की कूबत आ गई । सब आपकी कृपा है ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"आ0 सालीम रजा साहब विशेष आभार"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"आ0 शेख शहजाद उस्मानी साहब तहे दिल से शुक्रिया ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"भाई बृजेश कुमार बज्र जी आपने पढ़ी इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"आ0 कबीर सर सादर नमन के साथ गुस्ताखी माफी चाहता हूँ । आप गुरुदेव हैं आपके हर बच्चन को आत्मसात करता हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"मैंने तो पढ़ ली,सारे पाठकों के पास आप जैसा धैर्य तो नहीं ।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"बड़े धैर्य की जरुरत है ग़ज़ल पढ़ने के लिए..लेकिन पढ़ने बाद आप एक अच्छी ग़ज़ल पाएंगे..सादर बधाई।"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,30अशआर पर मुश्तमिल ग़ज़ल,क्या कहूँ इसके बारे में,आप पाठकों की इतनी कड़ी परिक्षा क्यों लेते हैं ?इस प्रयास पर बधाई स्वीकार करें । अगर आप आवश्यक सुधार करना पसंद करें तो कुछ सुझाव दूँ आपको ?"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल पास रह गया मेरे है , आपका कलाम भी
"आ0 मो0 आरिफ साहब विशेष आभार । आपके नोट पर अवश्य प्रयास करूंगा ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल पास रह गया मेरे है , आपका कलाम भी
"आ0 शेख सहज़ाद उष्मानी साहब तहे दिल से शुक्रिया ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल पास रह गया मेरे है , आपका कलाम भी
"आ0 सालिम रजा रेवा साहब हार्दिक आभार"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल पास रह गया मेरे है , आपका कलाम भी

*212 1212 1212 1212*



आपकी ही रहमतों से मिल गई वो शाम भी ।

कुछ अदा छलक उठी है कुछ नज़र से जाम भी ।।

---------------------------------------------------------------

ढूढ़िये न आप अब मेरे उसूल का चमन ।

दिल कभी जला यहां तो जल गया मुकाम भी ।।

--------------------------------------------------------------------

नज्र कर दिया गुलाब तो हुई नई ख़ता ।

हुस्न आपका बना गया उसे गुलाम भी ।

------------- -------- ------------------------------- ----

जब चिराग… Continue

Posted on October 14, 2017 at 11:01pm — 6 Comments

उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है

एक लंबी ग़ज़ल 30 शेर के साथ



122 122 122 122

अगर आप में कुछ सलीका बचा है ।

तो फिर आप से भी मेरी इल्तिजा है ।।



रकीबों की महफ़िल में क्या क्या हुआ है ।

सुना आपका ही तो जलवा रहा है ।।



यूँ रुख़ को पलट कर चले जाने वाले ।

बता दीजिए क्या मुहब्बत ख़ता है ।।



हया को खुदा की अमानत जो समझे ।

उन्हें ही सुनाई गई क्यों सजा है ।।



अगर दिल में आये तो रहना भी सीखो ।

मेरी तिश्नगी का यही मशबरा है ।।



मुख़ालिफ़ हुई ये हवाएं चमन… Continue

Posted on October 14, 2017 at 10:30pm — 15 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

उस से मिलकर तुझे हुआ क्या है ।

पूछते लोग माजरा क्या है ।।



सच बताने पे आप क्यूँ रोये ।

आइने से हुई ख़ता क्या है ।।



है तबस्सुम का राज क्या उनके ।

आंख में गौर से पढा क्या है ।।



अश्क़ हैं बेहिसाब हिस्से में ।

ज़श्न के वास्ते बचा क्या है ।।



इस तरह रोकिये नहीं मुझको ।

पूछिये मत मेरा पता क्या है ।।



आप मतलब की बात करते हैं ।

आपके साथ फायदा क्या है ।।



छोड़िये बात आप भी उसकी ।

उसकी बातों में… Continue

Posted on October 11, 2017 at 9:00am — 13 Comments

वफ़ा के साथ यकीनन है वास्ता मेरा

1212 1122 1212 22

अलग है बात रखा नाम बेवफा मेरा ।।

वफ़ा के साथ यकीनन है वास्ता मेरा ।।



मेरे गुनाह का चर्चा है शह्र में काफी ।

तमाम लोग सुनाते हैं वाक्या मेरा ।।



नज़र नज़र से मिली और होश खो बैठा ।

उसे भी याद है उल्फत का हादसा मेरा ।।



वो आसुओं से भिगोते ही जा रहे दामन ।

पढा जो खत है अभी ,था वही लिखा मेरा ।



फ़िजा के पास रकीबों का हो गया पहरा ।

बढ़ा रही हैं हवाएं भी फ़ासला मेरा ।।



गरीब हूँ मैं शिकायत भी क्या करूँ उनकी… Continue

Posted on October 5, 2017 at 9:23am — 4 Comments

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