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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s Page

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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post गीतिका
"आभार आदरणीय श्री लक्ष्‍मण धमी 'मुसाफि‍र जी एवं श्री समीर कबीर जी."
May 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post गीतिका
"आ. भाई गोपाल जी, अच्छी गीतिका हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 14
Samar kabeer commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post गीतिका
"जनाब गोपाल कृष्ण जी आदाब,अच्छी गीतिका लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
May 13
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' posted blog posts
May 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post भ्रष्‍टाचार
"आद0 गोपाल कृष्ण भट्ट जी बढिया और सकारात्मक सोच के साथ आपने यह कथा लिखी है। भस्टाचार ही तो है सभी समस्याओं की जननी पर जब कभी भ्र्ष्टाचार की बात होती है, हम केवल आर्थिक भ्रष्टाचार की बात सोचते है जबकि नैतिक भष्टाचार सर्वाधिक है। बधाई स्वीकार कीजिये इस…"
Apr 23
TEJ VEER SINGH commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post भ्रष्‍टाचार
"हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ गोपाल कृष्ण भट्ट"आकुल" जी। एक सम सामयिक विषय और गंभीर समस्या पर समाज को चेतावनी देती एक बेहतरीन लघुकथा।यह एक कड़वी सच्चाई है कि कुछ गिने चुने लोगों की लोलुपता का परिणाम अनगिनत निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ रहा है।मैं भी…"
Apr 19
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' posted a blog post

भ्रष्‍टाचार

राजा विक्रमादित्‍य फि‍र वेताल को कंधे पर ले कर जंगल से चला. रास्‍ते में वेताल विक्रम से बोला- 'राजा, तुम चतुर ही नहीं बुद्धिमान् भी हो, लेकिन आज विश्‍व में जो कोविड-19 के कारण लाखों लोग मर रहे हैं और अनेक मौत के मुँह में जाने को हैं. छोटा क्‍या बड़ा क्‍या, अमीर क्‍या गरीब क्‍या, डॉक्‍टर क्‍या वैज्ञानिक क्‍या, नेता क्‍या अभिनेता क्‍या, दोषी, निर्दोष सभी इस बीमारी से हताहत हो रहे हैं. मनुष्‍य ने ऐसा कौनसा अपराध कर दिया है, जो संसार के अधिकतर देश इस महामारी का दंड भुगत रहे है? यदि तुमने इसका सही…See More
Apr 18
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-108 in the group चित्र से काव्य तक
"ओ.बी.ओ. चित्र से काव्‍य तक छंदोत्‍सव-108 छंद- सार विधान – 28 मात्रा, 16,12 पर यति, अंत में वाचिक भार 22 गागा l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l गीत आज घड़ी संकट की हमको, अब इक जुट होना है. लाखों खोए हमने जीवन, और नहीं खोना…"
Apr 18
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-108 in the group चित्र से काव्य तक
"'ओबीओ 'चित्र से काव्‍य तक छंदोत्‍सव'' कुंडलिया छंद (देश में वर्तमान हालत के संदर्भ में प्रदत्‍त चित्र पर) तन मन धन से कर रहे, खुले हाथ सब दान. अनचाहा संकट घिरा, समय बड़ा बलवान. आज नहीं है वक्‍़त, कौन निर्धन समर्थ…"
Apr 18
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"सुंदर काव्‍यांजलि. बधाई हो."
Apr 12
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"बूढ़े बरगद झुलस रहे,कहता पनघट का नीरव,कोठरियों में जा बैठा,सारी जगती का वैभव।।राजभवन पर आन पड़ी,मोटी जिम्मेदारी है, वाह... सुंदर नवगीत. आपने इसे गीत लिखा. वैसे सबकी अपनी अपनी परिभाषा है. बधाई आपको."
Apr 12
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"आभार आदरणीय."
Apr 12
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"आभार आदरणीय."
Apr 12
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"आभार आदरणीय. हम घरों में रह कर इन योद्धाओं के लिए इतना तो कर ही सकते हैं. अपनी रचनाधर्मिता भी यही है और माँ शारदे हमें लेखनी के माध्‍यम से कुछ कर गुजरने को प्रेरित करे, यही कामना है."
Apr 12
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"आभार आदरणीय. ईश्‍वरीय शक्ति ही आगे बढ़ने को प्रेरित करती है. फि‍र हम रचनाकार पर तो माँ शारदे का आशीर्वाद बना रहे. हमेशा अपेक्षा रहती है."
Apr 12
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"आभार आदरणीय."
Apr 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Kota Rajasthan
Native Place
Kota
Profession
Writing
About me
writing since 1975, published 4 books on poetry, anecdotes, drama etc.

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गीतिका

छंद- आल्‍ह, विधान- 31 मात्रा, (चौपाई +15), अंत 21

ढाई आखर प्रेम सत्य है, स्‍वीकारो पहचानो मित्र.

धन बल सुख-दुख आने-जाने, प्रीत बढ़ाओ जानो मित्र.

 

कहते हैं लँगड़े घोड़े पर, दुनिया नहीं लगाती दाँव,

भाग्‍य आजमाने के बदले, स्‍वेद बहाओ मानो मित्र.

 

युग बदले हैं हुए खंडहर, थी…

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Posted on May 12, 2020 at 10:00am — 3 Comments

भ्रष्‍टाचार

राजा विक्रमादित्‍य फि‍र वेताल को कंधे पर ले कर जंगल से चला. रास्‍ते में वेताल विक्रम से बोला- 'राजा, तुम चतुर ही नहीं बुद्धिमान् भी हो, लेकिन आज विश्‍व में जो कोविड-19 के कारण लाखों लोग मर रहे हैं और अनेक मौत के मुँह में जाने को हैं. छोटा क्‍या बड़ा क्‍या, अमीर क्‍या गरीब क्‍या, डॉक्‍टर क्‍या वैज्ञानिक क्‍या, नेता क्‍या अभिनेता क्‍या, दोषी, निर्दोष सभी इस बीमारी से हताहत हो रहे हैं. मनुष्‍य ने…

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Posted on April 18, 2020 at 6:02pm — 2 Comments

लिव इन रिलेशनशिप

रविवार का दिन था। सज्‍जनदासजी के घर पड़ौसी प्रकाश चौधरी आ कर चाय का आनंद ले रहे थे।

बातों बातों में प्रकाशजी ने कहा- ‘क्‍या जमाना आ गया, देखिए न अपने पड़ौसी, वे परिमलजी, कोर्ट में रीडर थे, उनके बेटे आशुतोष की पत्‍नी को मरे अभी साल भर ही हुआ है, मैंने सुना है, उसने दूसरी शादी कर ली है। बेटा है, बहू है और एक साल की पोती भी। अट्ठावन साल की उम्र में क्‍या सूझी दुबारा शादी करने की। पत्‍नी नौकरी में थी, इसलिए पेंशन भी मिल रही थी। अब शादी करने से पेंशन बंद हो जाएगी। यह तो अपने पैरों पर…

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Posted on November 9, 2014 at 9:30am — 7 Comments

छँट गये अँधेरे

दीप जले हैं जब-जब

छँट गये अँधेरे।

अवसर की चौखट पर

खुशियाँ सदा मनाएँ

बुझी हुई आशाओं के

नवदीप जलाएँ

हाथ धरे बैठे

ढहते हैं स्वर्ण घरौंदे

सौरभ के पदचिह्नों पर

जीवन महकाएँ

क़दम बढ़े हैं जब-जब

छँट गये अँधेरे।

कलघोषों के बीच

आहुति देते जाएँ

यज्ञ रहे प्रज्‍ज्‍वलित

सिद्ध हों सभी ॠचाएँ

पथभ्रष्टों की प्रगति के

प्रतिमान छलावे

कर्मक्षेत्र में जगती रहतीं

सभी…

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Posted on October 21, 2014 at 10:47am — 2 Comments

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At 9:55am on April 11, 2020, Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' said…
आदरणीया, सादर नमन. लंबे समय से दूर हूँ. कृपया बताएँ, आयोजन 114 में रचनाएँ कहाँ पोस्ट करनी है. सादर
At 10:09pm on September 24, 2014, savitamishra said…

बहुत बहुत आभार .....आपका...सादर नमस्ते स्वाविकार कर हमे अनुग्रहित करें

 
 
 

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