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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
  • Male
  • Kota, Rajasthan
  • India
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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s Page

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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"एलमब्.....जिसमें मेरी जीवनी भरी थी, कैसे रिश्तों में उलझी पड़ी थी..'' वाह..बहुत ही मर्मस्‍पर्शी अहसास वाली भूली बिसरी यादों का आलबम । बधाई आदरणीय"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"आह....ये कौन मुझे छू जाता है। बहुत ही मर्मस्‍पर्शी करवटें यादों की। बधाई आदरणीया।"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"नहीं ।"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"क्षमा चाहूँगा आदरणीय, युगीन क्रांति को भूली बिसरी यादों में समेटना कहाँ तक उचित है, मैं समझ नहीं पाया। यूँ तो यह आदम हौआ तक चला जाएगा । जहाँ तक स्‍त्री क्रांति का सूत्रपात अपने परिवार मे भी होता या यही रचना सार्थक हो जाती ''भूली बिसरी…"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"सुंदर रचना आदरणीय। दूसरे भाग में ''सुलझन..... साहस पाती'' में दो मात्रा कम हैं। देख लें। सादर"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"यादों का सुंदर झरोखा । बधाई हो आदरणीया।"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"सुंदर प्रयास आदर. दंडपाणि जी। कुंडलिया छंद में कथ्‍य बहुत ही सुंदर है किंतु शिल्‍प में मात्रिक शिथिलता है।  13, 11 (दोहा) एवं 11, 13 (रोला) का निर्वहन नहीं होने से कई स्‍थान पर लय भंग हो रही है । देख लें । दोहा का संयोजन विषम चरण…"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"ध्‍यानाकर्षण के लिए आभार आदरणीय। शीर्षक ''भूली बिसरी'' को देख कर प्रकाशित कर दिया। मौलिक तो है ही। अप्रकाशित की बंदिश सम्‍मानार्थ आयोजन में हो तो समझ में आता है। यह मेरा मानना है। अन्‍यथा नहीं लेंगे। खैर, यह प्रशासनिक…"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' updated their profile
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"छंद- मरहट्ठा माधवी विधान- 29 मात्रा भार। 16, 13 पर यति अंत 212 पदांत- याद है समांत- अड़ी   ज्‍वर में दलिया और मूँग की, सौंधी खिचड़ी याद है। घी में पड़े हुए कपड़े से, रोटी चुपड़ी याद है ।   उधड़े बंदरटोपा, स्‍वेटर, शाल, रजाई ठंड…"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"आधार छंद- विष्‍णुपद (सम मात्रिक) विधान- मात्रा भार 26.16,10 अंत गुरु से (वाचिक) पदांत- चूल्‍हे की रोटी समांत- आती   (66) याद गाँव की अब भी आती, चूल्‍हे की रोटी. माँ घर-भर को साथ खिलाती, चूल्‍हे की रोटी.   राख झाड़ती फटकारें…"
Jan 16
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदर. डॉ. छोटेलाल सिंह जी आभार।"
Jun 26, 2021
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आभार समर कबीर जी"
Jun 26, 2021
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"वक़्त की हर शै बनी है कब ठहरने के लिए । और हर ख़ुशबू फ़ज़ा में है बिखरने के लिए । हो रही भँवरों की गुंजन बाग़ में हो सनसनी, क्यों न हों बेचैन कलियाँ तब निखरने के लिए । सम्त भी कहती रही इंसान को बैठे नहीं, आदमी पैदा हुआ है काम करने के लिए । यूँ…"
Jun 26, 2021
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-122 in the group चित्र से काव्य तक
"गीतिका छंद- गीतिका मापनी- 2122 2122 2122 212 पदांत- कभी समांत- आएगा माँ सिवा कोई नहीं ख़तरा उठाएगा कभी । आदमी यह दर्द शायद झेल पाएगा कभी । वक़्त आये तो कभी जो खेल जाती जान पर,क़ुदरती मिलती है ताक़त मान जाएगा कभी । जो अना नारी सहे वह मर्द की…"
Jun 19, 2021
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-122 in the group चित्र से काव्य तक
Jun 19, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Kota Rajasthan
Native Place
Kota
Profession
Writing
About me
writing since 1975, published 11 books on poetry, anecdotes, drama etc.

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गीतिका

छंद- आल्‍ह, विधान- 31 मात्रा, (चौपाई +15), अंत 21

ढाई आखर प्रेम सत्य है, स्‍वीकारो पहचानो मित्र.

धन बल सुख-दुख आने-जाने, प्रीत बढ़ाओ जानो मित्र.

 

कहते हैं लँगड़े घोड़े पर, दुनिया नहीं लगाती दाँव,

भाग्‍य आजमाने के बदले, स्‍वेद बहाओ मानो मित्र.

 

युग बदले हैं हुए खंडहर, थी…

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Posted on May 12, 2020 at 10:00am — 3 Comments

भ्रष्‍टाचार

राजा विक्रमादित्‍य फि‍र वेताल को कंधे पर ले कर जंगल से चला. रास्‍ते में वेताल विक्रम से बोला- 'राजा, तुम चतुर ही नहीं बुद्धिमान् भी हो, लेकिन आज विश्‍व में जो कोविड-19 के कारण लाखों लोग मर रहे हैं और अनेक मौत के मुँह में जाने को हैं. छोटा क्‍या बड़ा क्‍या, अमीर क्‍या गरीब क्‍या, डॉक्‍टर क्‍या वैज्ञानिक क्‍या, नेता क्‍या अभिनेता क्‍या, दोषी, निर्दोष सभी इस बीमारी से हताहत हो रहे हैं. मनुष्‍य ने…

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Posted on April 18, 2020 at 6:02pm — 2 Comments

लिव इन रिलेशनशिप

रविवार का दिन था। सज्‍जनदासजी के घर पड़ौसी प्रकाश चौधरी आ कर चाय का आनंद ले रहे थे।

बातों बातों में प्रकाशजी ने कहा- ‘क्‍या जमाना आ गया, देखिए न अपने पड़ौसी, वे परिमलजी, कोर्ट में रीडर थे, उनके बेटे आशुतोष की पत्‍नी को मरे अभी साल भर ही हुआ है, मैंने सुना है, उसने दूसरी शादी कर ली है। बेटा है, बहू है और एक साल की पोती भी। अट्ठावन साल की उम्र में क्‍या सूझी दुबारा शादी करने की। पत्‍नी नौकरी में थी, इसलिए पेंशन भी मिल रही थी। अब शादी करने से पेंशन बंद हो जाएगी। यह तो अपने पैरों पर…

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Posted on November 9, 2014 at 9:30am — 7 Comments

छँट गये अँधेरे

दीप जले हैं जब-जब

छँट गये अँधेरे।

अवसर की चौखट पर

खुशियाँ सदा मनाएँ

बुझी हुई आशाओं के

नवदीप जलाएँ

हाथ धरे बैठे

ढहते हैं स्वर्ण घरौंदे

सौरभ के पदचिह्नों पर

जीवन महकाएँ

क़दम बढ़े हैं जब-जब

छँट गये अँधेरे।

कलघोषों के बीच

आहुति देते जाएँ

यज्ञ रहे प्रज्‍ज्‍वलित

सिद्ध हों सभी ॠचाएँ

पथभ्रष्टों की प्रगति के

प्रतिमान छलावे

कर्मक्षेत्र में जगती रहतीं

सभी…

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Posted on October 21, 2014 at 10:47am — 2 Comments

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At 9:55am on April 11, 2020, Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' said…
आदरणीया, सादर नमन. लंबे समय से दूर हूँ. कृपया बताएँ, आयोजन 114 में रचनाएँ कहाँ पोस्ट करनी है. सादर
At 10:09pm on September 24, 2014, savitamishra said…

बहुत बहुत आभार .....आपका...सादर नमस्ते स्वाविकार कर हमे अनुग्रहित करें

 
 
 

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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
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"वैसे दूसरा शेर बेहतर हो सकता है।"
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Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
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