For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर

पढ़े-लिखे हैं आप तो आपको
पढ़े-लिखे दिखना चाहिए।
मोटर कार हो सब ,फिर भी अक्ल से ,
आपको , बिलकुल पैदल दिखना चाहिए।
कपड़े अजीब, चाल अजीब , हाव-भाव अजीब ,
बातचीत में अजीब होना और दिखना चाहिये।
रचनात्मक होना तो बहुत कठिन होता है ,
विध्वंस और क्रान्ति की बात करनी आनी चाहिए।
सबसे बड़ी बात आपको
घर फूंक तमाशा देखना आना चाहिए।
अपनी बुनियाद को निरंतर हिलाना और
मौक़ा लगते ही उखाड़ देना चाहिए।
आपको वो तो लपक लेंगे ही
जो उकसा रहे हैं ,
उनकें यकीन पे मिट जाना चाहिए।
खुद भले आप हमेशा सोये सोये से रहें ,
लक्ष्य अपना जन चेतना को जगाना बताना चाहिए ,
और कुछ आये न आये , नारे लगाना आना चाहिए।
तोड़ - फोड़ में माहिर ,
कन्स्ट्रटिव बिलकुल नहीं , आपको
कम्प्लीट डिस्ट्रक्टिव होना चाहिए।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 774

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on November 16, 2017 at 5:00am
आद0 विजय शंकर जी सादर अभिवादन, आपकी उसी त्रुटि से मन मे शंका हुई कि यह लघुकथा कैसे, अब बात स्पष्ट हुई। पुनः बधाई इस सृजन पर्।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 16, 2017 at 4:37am
आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी , आपकी बधाई के लिए आभार। आदरणीय समर कबीर साहब से इस प्रसंग में चर्चा में मैं त्रुटिवश कविता की जगह लघु-कथा टाइप कर गया था। इसे मैंने अपने अगले वक्तव्य में स्वीकार भी करा है और खेद भी व्यक्त किया हैं। कृपया देखना चाहें , " लघु- कथा लिखने की त्रुटि के लिए खेद है।" .शेष यह रचना एक अतुकांत कविता ही है। सादर।
Comment by नाथ सोनांचली on November 16, 2017 at 4:27am
आद0 डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन, आप ने जो लिखा है, भाव पक्ष के दृष्टिकोण से अच्छा है पर अगर प्रतिक्रिया को न् देखूँ तो इसको लघुकथा कहना मेरे लिए मुश्क़िल है, क्या लघुकथा ऐसे गेयता आधारित लिखी भी जा सकती है, गौर कीजियेगा।आद0 समर साहब की बात से सहमत हूँ। शेष भाव पक्ष के लिए आपको बधाई।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 15, 2017 at 10:39am
आदरणीय सलीम रज़ा रेवा जी, आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 15, 2017 at 10:38am
आदरणीय विजय निकोर जी, आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 14, 2017 at 8:05pm
आ. सुन्दर रचना के लिए बधाई.
Comment by vijay nikore on November 14, 2017 at 7:27pm

रचना में कटाक्ष बहुत अच्छा बना है। मैंने भी इस रचना को कविता की तरह पढ़ा, और थोड़ा confuse हो गया, पर फिर कटाक्ष का आनन्द आ गया। बधाई, आदरणीय विजय शंकर जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 14, 2017 at 11:30am
आदरणीय कालीपद प्रसाद मंडल जी , कविता को पसंद करने के लिए आभार एवं बधाई हेतु धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 14, 2017 at 11:30am
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , आपने कविता को पसंद किया , आभार एवं बधाई हेतु धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 14, 2017 at 11:29am
आदरणीय समर कबीर साहब, नमस्कार , लघु- कथा लिखने की त्रुटि के लिए खेद है। सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ

२१२२ १२१२ २२/११२तमतमा कर बकी हुई गालीकापुरुष है, जता रही गाली मार कर माँ-बहन व रिश्तों को कोई देता…See More
11 hours ago
Chetan Prakash commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"यह लघु कविता नहींहै। हाँ, क्षणिका हो सकती थी, जो नहीं हो पाई !"
Tuesday
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

भादों की बारिश

भादों की बारिश(लघु कविता)***************लाँघ कर पर्वतमालाएं पार करसागर की सर्पीली लहरेंमैदानों में…See More
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . . विविध

मंजिल हर सोपान की, केवल है  अवसान ।मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।। छोटी-छोटी बात पर, होने लगे…See More
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय चेतन प्रकाश भाई ग़ज़ल पर उपस्थित हो उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक …"
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय सुशील भाई  गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिए आपका आभार "
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय लक्ष्मण भाई , उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
Monday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"विगत दो माह से डबलिन में हूं जहां समय साढ़े चार घंटा पीछे है। अन्यत्र व्यस्तताओं के कारण अभी अभी…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"प्रयास  अच्छा रहा, और बेहतर हो सकता था, ऐसा आदरणीय श्री तिलक  राज कपूर साहब  बता ही…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"अच्छा  प्रयास रहा आप का किन्तु कपूर साहब के विस्तृत इस्लाह के बाद  कुछ  कहने योग्य…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"सराहनीय प्रयास रहा आपका, मुझे ग़ज़ल अच्छी लगी, स्वाभाविक है, कपूर साहब की इस्लाह के बाद  और…"
Sunday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service