For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता: ज़माने में बनी है हिंद की पहचान हिंदी से

अगर है एक तो है एक हिंदुस्तान हिंदी सेI 
ज़माने में बनी है हिंद की पहचान हिंदी सेI

.
ये दुनिया एक ही कुनबा सदा इसने सिखाया है,
मोहब्बत का सदाक़त का मिला वरदान हिंदी सेI 

.

जो तुलसी जायसी के लाल, अंग्रेजी के अनुयायीI 
उन्हें तुम दूर ही रखना मेरे भगवान हिंदी सेI 

.

तुम हिंदी काव्य को रसहीन होने से बचा लेना,  
नहीं तो फिर न निकलेगा कोई रसखान हिंदी सेI 

ये उर्दू फ़ारसी अब तक दिवंगत हो गई होतीं, 
मिला भारत में दोनों को ही जीवनदान हिंदी सेI

.

मेरे दाता वो मेरी जिंदगी का आखरी दिन हो, 

जरा भी दूर हो जिस पल मेरी संतान हिंदी सेI 

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 784

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by AMAN SINHA on September 15, 2021 at 11:51am

आदरणीय योगराज प्रभाकर जी, 

लाज़वाब, रसदार, मज़ेदार प्रस्तुति। 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on September 14, 2021 at 6:13pm

मुहतरम योगराज प्रभाकर जी आदाब, हिन्दी दिवस के अवसर पर शानदार प्रस्तुति के लिए दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ और इस रचना को ओ बी ओ के फ़ीचर ब्लॉग में शामिल होने की कामना करता हूँ।  सादर।

Comment by Sushil Sarna on September 14, 2021 at 5:55pm
वाह आदरणीय योगराज प्रभाकर जी हिन्दी दिवस पर बहुत सुंदर और सार्थक प्रस्तुति सर । हार्दिक बधाई सर
Comment by Samar kabeer on September 14, 2021 at 3:47pm

//रचना के आगे 'कविता' शब्द जोड़ दिया है//

इसे कहते हैं उस्तादी:-))) 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on September 14, 2021 at 3:45pm

रचना के आगे 'कविता' शब्द जोड़ दिया है आ० समर कबीर जी.

Comment by Samar kabeer on September 14, 2021 at 3:34pm

// मैं उस मिसरे की बह्र जरूर देखता अगर मैंने यह रचना ग़ज़ल लिखकर पोस्ट की होती.//

फिर ये रचना कौन सी विधा में है मुहतरम? इंगित मिसरे को छोड़कर सभी मिसरे 1222 1222 1222 1222 के वज़्न पर पूरे उतरते हैं ।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on September 14, 2021 at 3:00pm

हार्दिक आभार आ० लक्ष्मण धामी मुसाफिर भाई जी. 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on September 14, 2021 at 2:59pm

आपकी इस उस्तादाना राय के लिए तह-ए-दिल से ममनून हूँ आ० समर कबीर साहिब. मैं उस मिसरे की बह्र जरूर देखता अगर मैंने यह रचना ग़ज़ल लिखकर पोस्ट की होती.  

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 14, 2021 at 12:13pm

आ. भाई योगराज जी, सादर अभिवादन। हिन्दी दिवस पर बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on September 14, 2021 at 11:57am

जनाब योगराज प्रभाकर साहिब आदाब, हिन्दी दिवस पर अपने जज़्बात की अक्कासी करती अच्छी ग़ज़ल कही आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'तुम हिंदी काव्य को रसहीन होने से बचा लेना'

इस मिसरे की बह्र चेक कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service