For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज फिर ... क्या हुआ

थरथरा रहा

दुखात्मक भावों का

तकलीफ़ भरा, गंभीर

भयानक चेहरा

आज फिर

दुख के आरोह-अवरोह की

अंधेरी खोह से

गहरी शिकायतें लिए

गहराया आसमान

आज फिर 

ढलते सूरज ने संवलाई लाली में रंगी

कुछ खोती कुछ ढूँढ्ती

एक और मटमैली

उलझी-सी शाम

आज फिर

सिमटी हुई कुछ डरी-डरी

उदास लटकती शाम

डूबने को है ...

डूबने दो 

मन में हलचल गहरी

मरूस्थल-सा सूखापन

एक और "आज" को जाते-जाते

इस आज की व्यथा-कथा

कहने दो

भटक गई हवायों को  पलटने दो

आज फिर प्यार के दर्द के पन्ने

प्यार जो पागल-सा

तैर-तैर दीप्त आँखों में तुम्हारी

गया था नभ को छूने

आज फिर ...

ठहरता नहीं है "आज" मुठ्ठी में

रुकी है अभी गई-गुज़री कुछ रोशनी

अन्धेरा होने को है

सहने दो

           --------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 953

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on July 19, 2019 at 3:49pm

सरहाना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय भाई समर कबीर जी।

Comment by Samar kabeer on July 19, 2019 at 11:20am

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,हमेशा की तरह एक उम्द: और दिल को छू लेने वाली रचना हुई है आपकी,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारकरें ।

Comment by vijay nikore on July 17, 2019 at 9:25pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीया प्रतिभा जी

Comment by pratibha pande on July 17, 2019 at 11:21am

आज फिर ...

ठहरता नहीं है "आज" मुठ्ठी में

रुकी है अभी गई-गुज़री कुछ रोशनी

अन्धेरा होने को है

सहने दो//अप्रतिम भाव बहुत गहरे तक छूते हैं। बधाई इस सृजन पर आदरणीय विजय निकोर जी

Comment by vijay nikore on July 16, 2019 at 10:18pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on July 15, 2019 at 7:33pm

भटक गई हवायों को पलटने दो

आज फिर प्यार के दर्द के पन्ने

प्यार जो पागल-सा

तैर-तैर दीप्त आँखों में तुम्हारी

गया था नभ को छूने

आदरणीय विजय निकोर जी सादर प्रणाम , सर आपका सृजन पाषाणों की दरारों में छुपी अंतर्व्यथा की अभियक्ति को पृष्ठ पर साकार कर देता है। उलझनों से जूझती इस अनुपम कृति के लिए दिल से बधाई बधाई बधाई। सादर ...

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:48pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीय अजय तिवारी जी।

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:47pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीय लक्ष्मण जी।

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:47pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार, भाई समर कबीर जी। मेरा मनोबल बढ़ाए रखें।

Comment by vijay nikore on July 10, 2019 at 4:46pm

सरहाना के लिए हार्दिक आभार,आदरणीय तेज वीर सिंह जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
20 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
21 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service