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माँ   .... 

बताओ न
तुम कहाँ हो
माँ

दीवारों में
स्याह रातों में
अकेली बातों में
आंसूओं के
प्रपातों में
बताओं न
आखिर
तुम कहाँ हो
माँ

मेरे जिस्म पर ज़िंदा
तुम्हारे स्पर्शों में
आँगन में गूंजती
आवाज़ों में
तुम्हारी डाँट में छुपे
प्यार में
बताओं न
आखिर
तुम कहाँ हो
माँ

बुझे चूल्हे के पास
या
रंभाती गाय के पास
पानी के मटके के पास
बताओं न
आखिर तुम
कहाँ हो
माँ

माँ
तुम जब से गयी हो
मेरा अस्तित्व
शून्य की परिभाषा
बन गया है


माँ
मैं तो सदा से
तुझ में समाया रहा
पहले गर्भ में
फिर आँचल के गर्भ में
फिर तेरी ममता के गर्भ में
फिर तेरी धुंधलाती दृष्टि के गर्भ में
बता न माँ
तू मुझे

गर्भाश्रय से वंचित क्यों कर गई

माँ
तू मुझे दीवार पर
अच्छी नहीं लगती
मुझे तस्वीर नहीं
माँ चाहिए
जो मुझे
अपने हाथों से मुझे
स्पर्श स्नान करा दे
मुझे अपने आँचल में छुपा ले
अपनी लोरियों से मुझे सुला दे
माँ
तू अपनी लाल का रुदन
सुन रही है न
मैं थक गया हूँ
तुम्हें पुकारते पुकारते
अब तो बताओं न
आखिर तुम
कहाँ हो
माँ
ए........क

बा.........र तो
आ  जाओ
माँ ाँ ाँ ाँ ाँ ाँ 


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 888

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 17, 2018 at 5:48pm

आदरणीय बृजेश जी सृजन पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा के लिए दिल से आभार।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 13, 2018 at 5:43pm

उत्तम बहुत ही उत्तम रचना आदरणीय..

Comment by Sushil Sarna on July 12, 2018 at 7:59pm

आदरणीय   vijay nikore  जी सृजन को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार ।

Comment by Sushil Sarna on July 11, 2018 at 7:17pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब ... सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभारी है।

Comment by Samar kabeer on July 11, 2018 at 11:32am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,माँ को समर्पित बहुत जज़्बाती कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on July 10, 2018 at 7:34pm

आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार ।

Comment by Sushil Sarna on July 10, 2018 at 7:34pm

आद0 Neelam Upadhyaya जी सृजन को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार ।

Comment by Sushil Sarna on July 10, 2018 at 7:33pm

आदरणीय  Mohammed Arif जी सृजन को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार ।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 10, 2018 at 6:05pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना साहब जी।बहुत मार्मिक और भावुक कविता लिखी है आपने।

Comment by Neelam Upadhyaya on July 10, 2018 at 4:02pm

आदरणीय सुशिल सरना जी, नमस्कार । माँ की स्मृतियों में डूबी बहुत ही हृदयस्पर्शी कविता।  बधाई स्वीकार करें।  

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