For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

थाहों में टटोलती कुछ, कहती थी 

जाकर वहाँ फूलों की सुगन्ध में

नकली-कागज़ी मुस्कानों की उमंग में

क्या याद भी करोगे मुझको

बताओ  न 

स्मरण में सहज दोड़ती आऊँगी क्या ?

या, जाते ही वहाँ बन जाओगे वहाँ के

पराय-से अजीब अस्पष्ट परदेशी-बाबू तुम

नई मुख-आकृतियों के बीच देखोगे भी क्या

मुढ़कर, मद्धम हो रही इस पुरानी पहचान को

या सरका दोगे इसे स्मृतिपटल से

तुम मात्र मिथ्या कहला कर इसे

माना कि टूटा है हमारा वह बातों का क्रम

दूरियों को मापते होता है तुम्हें भी भ्रम

स्नेह के उलझे प्रसंगों के बीच मेरी प्रिय

इतना तो रखो प्राण-लोहे-सा विश्वास मुझ पर

स्वर मेरे मौन में भी हैं पास तुम्हारे

सात समुन्दर पार से है जगमगाता

सात युगों का वह भोला प्यार हमारा

सोचते-सोचते स्वप्न-सृष्टि में तुम्हें

धीमे अस्पष्ट शब्दों में करी हैं बातें कितनी

आँखों में खुमारी की लालिमा

लगता है तुम्हारी शैतान अंगुलियाँ

मेरे बालों में कुछ गूँथ रही हैं मानो

और मेरा हृदय मुझसे बहुत दूर कहीं

वहाँ  पास  तुम्हारे  धड़क  रहा  है

तुम हो अपने समाज के कारागार में बंदी

मेरे भी पैर बँधे हैं आधुनिक जंजीरों में

कारागार और जंजीरों के बीच, प्रिय

यह  कैसा  रिश्ता  है  हमारा

कैसा  है  यह  नाता  हमारा *

परदेशी-बाबू  कहकर  मुझको  मेरी  प्रिय

न छेड़ो तार, न कुरेदो आज, गहरे में सीने में मेरे

कोई पुराना घाव अनछुआ रह जाना चाह्ता है

ऐसे में न जाने क्यूँ, तुम्हें खो देने की चिन्ता

यह  ईश्वरहीन  अपरिमयता  आदतन

निचोड़ देती है मुझको, लुप्त हो जाती है चेतना

इस स्याह रात की मोम पिघल रही है

खयाल आता है गहरे समुन्दर में हूँ मैं

फिसलता हूँ फिसलते किनारे को पकड़-पकड़

मेरे प्यार, थाम लो, बुला लो, बुला लो मुझको

रख लो न मुझको अपने पास सदा के लिए

परदेशी शब्द कठोर है, जी बहुत घबराता है

                       ------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

* यह कैसा रिश्ता है हमारा, कैसा है यह नाता हमारा

यह भाव प्रिय चित्रा सिंह जी के गीत की ज़मीन से है

Views: 615

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on July 12, 2018 at 11:48am

मेरे आदरणीय भाई समर जी, आदाब। आपने जिस प्रकार इस रचना की सराहना की है, सच मेरे पास शब्द नहीं हैं आपको धन्यवाद देने के लिए। आपकी प्रतिक्रिया से हमेशा प्रोतसाहन मिलता है।मुझको गर्व है कि आप मेरी रचना पर आते हैं।

Comment by vijay nikore on July 12, 2018 at 11:45am

रचना की सराहना के लिए हृदयतल से आभार, आदरणीय बृजेश जी

Comment by vijay nikore on July 12, 2018 at 11:42am

रचना की सराहना के लिए हृदयतल से आभार, आदरणीया नीलम जी।

Comment by vijay nikore on July 12, 2018 at 11:41am

आदरणीय तस्दीक अहमद साहब, आदाब। रचना की सराहना के लिए हृदयतल से आभार।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 22, 2018 at 11:04am

आदरणीय विजय जी आपकी कवितायेँ  शुरू से लेकर अंत तक पाठक को बांध लेती हैं..प्रस्तुत कविता भी उसी श्रेणी में शोभायमान है...सादर

Comment by Neelam Upadhyaya on June 20, 2018 at 3:15pm

आदरणीय विजय निकोर  जी, नमस्कार।  बहुत ही सुन्दर  रचना की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on June 19, 2018 at 10:45pm

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,क्या कहूँ इस रचना के बारे में,शब्द नहीं मिल रहे इसके अनुरूप,एक पंक्ति को विस्तार देकर अपने इसे एक गम्भीर और प्रभावशाली रचना बना दिया,अरूज़ की ज़बान में इसे तज़मीन कहा जाता है,इस रचना की एक एक पंक्ति प्रभावित करने वाली है,और अंतिम पंक्ति "परदेशी शब्द कठोर है, जी बहुत घबराता है" ने तो मानो दिल ही लूट लिया,मुग्ध हूँ आपकी रचना पढ़कर,दिन बना दिया आज का,बहुत ख़ूब वाह, इस बहतरीन सृजन के लिये दिल से ढेरों बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 19, 2018 at 6:39pm

मुहतरम जनाब विजय निकोरे साहिब, उम्दा जज़्बाती रचना हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service