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2122 1212 22
नाम दिल से तेरा हटा क्या है ।
पूछते लोग माजरा क्या है ।।

नफ़रतें और बेसबब दंगे ।
आपने मुल्क को दिया क्या है ।।

अब तो कुर्सी का जिक्र मत करिए ।
आपकी बात में रखा क्या है ।।

सब उमीदें उड़ीं हवाओं में ।
अब तलक आप से मिला क्या है ।।

है गुजारिश कि आज कहिये तो ।
आपके दिल में और क्या क्या है ।।

दिल की बस्ती तबाह कर डाली ।
क्या बताऊँ तेरी ख़ता क्या है ।।

बारहा हाल पूँछ मत मेरा ।
मुद्दतों से यहाँ नया क्या है ।।

यूँ मुकरते हो रोज वादों से ।
आँख में भी बची हया क्या है ।।

गिर गए आप वोट की खातिर ।
आपकी शाख़ में बचा क्या है ।।

ख़ुदकुशी कर रहे वो पढ़ लिखकर ।
रोज़ियों पर तेरी रज़ा क्या है ।।

--- नवीन मणि त्रिपाठी

मौलिक अप्रकाशित 

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Comment by रक्षिता सिंह on June 19, 2018 at 7:07am

आदरणीय नवीन जी, नमस्कार!

बहुत सुन्दर गजल...

हर शेर बहुत ही खूबसूरत , मुबारकबाद कुबूल करें ।

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 18, 2018 at 8:32pm
वाह बहुत खूब ग़ज़ल कही है..... भाईजी।
Comment by Tapan Dubey on June 18, 2018 at 5:42pm

kya baat sir bahut khub 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 18, 2018 at 3:39pm

बहुत खूब 

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