For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल- फिर कोई मीठी शरारत हो गई है

मापनी - 2122 2122 2122

 

आपसे इतनी मुहब्बत हो गई है

लोग कहते हैं कि आफत हो गई है

 

नींद मेरी हो न पायी थी मुकम्मल

फिर कोई मीठी शरारत हो गई है

 

ढूँढता है रोज मिलने का बहाना

आपकी इस दिल को’ आदत हो गई है

 

शुक्रिया जो आप मेरे घर पधारे    

रौशनी में और बर्कत हो गई है

 

सख्त पहरे हो गए राहों में जब से 

और भी मजबूत चाहत हो गई है

 

दिल को देकर दर्द ही पाया है लेकिन 

जिन्दगी अब खूबसूरत हो गई है

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 902

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on June 29, 2018 at 7:58pm

जी,धन्यवाद ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 29, 2018 at 4:57pm

आदरणीय Samar kabeer जी सदैव स्वागत है आपका 

Comment by Samar kabeer on June 18, 2018 at 11:08am

मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 18, 2018 at 9:57am

आदरणीय समर कबीर जी, आपकी इस्लाह का तहे दिल से शुक्रिया, यूँ ही स्नेह बनाये रखें, आवश्यक परिमार्जन कर लेता हूँ

सादर नमन आपको 

Comment by Samar kabeer on June 17, 2018 at 3:03pm

'रौशनी में और बर्कत हो गई है'

Comment by Samar kabeer on June 17, 2018 at 3:02pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'ढूँढता हर रोज मिलने का बहाना'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है 'हर रोज',इस मिसरे को यूँ कर लें तो ये ऐब निकल जायेगा:-

'ढूँढता है रोज़ मिलने का बहाना'

"शुक्रिया है, आप मेरे घर पधारे

रौशनी में कुछ इज़ाफ़त हो गई है'

इस शैर के ऊला मिसरे में 'है' शब्द भर्ती का है, और सानी मिसरे में 'इज़ाफ़त' क़ाफ़िया सहीह नहीं,'इज़ाफ़त' का अर्थ है निस्बत और एक कलमे को दूसरे से मिलाने के लिए जो ज़ेर (चिन्ह)लगाया जाता है,आपने इस शब्द को बढ़ोतरी के लिए समझा है जबकि बढ़ोतरी के लिए शब्द होता है "इज़ाफ़ा", इस शैर को यूँ कर सकते हैं :-

"शुक्रिया,जो आप मेरे घर पधारे

रौशनी और बर्कत हो गई है'

'दिल लिया है या दिया है कुछ भी कहिये'

इस मिसरे में भी ऐब-ए-तनाफ़ुर हे 'दिल लिया',इस मिसरे को यूँ कर लें तो ये ऐब निकल जायेगा :;

'दिल दिया है या लिया है कुछ भी कहिये'

बाक़ी शुभ शुभ ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 16, 2018 at 12:23pm

आदरणीया  Rakshita Singh जी आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by रक्षिता सिंह on June 15, 2018 at 2:58pm

आदरणीय बसंत जी नमस्कार,
बहुत ही बेहतरीन गजल, मुबारकबाद कुबूल कीजिए ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 14, 2018 at 12:38pm

आदरणीय Mahendra Kumar जी दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by Mahendra Kumar on June 13, 2018 at 7:52pm

ख़ूबसूरत ग़ज़ल है आदरणीय बसंत जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए इस लाजवाब प्रस्तुति पर. सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
yesterday
Admin posted discussions
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
yesterday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
Tuesday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service