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मचल उठा जो दिल जवां ख़ुदा न ख़्वास्ता (ग़ज़ल 'राज')

1212  1212  1212  12

बहक गया अगर समां ख़ुदा न ख़्वास्ता 
बिखर गया अगर जहाँ ख़ुदा न ख़्वास्ता

चिराग़ हम लिये खड़े यही तो सोचकर 
भटक गया जो कारवाँ ख़ुदा न ख़्वास्ता 

उठाना मत सनम निकाब मुझको देखकर 
मचल उठा जो दिल जवां ख़ुदा न ख़्वास्ता

पता चमन का तुम उसे न देना दोस्तों 
इधर मुड़ी अगर खिजाँ ख़ुदा न ख़्वास्ता

किया क्या इंतज़ाम आग को बुझाने का 
अगर उठा कहीं धुआँ ख़ुदा न ख़्वास्ता

उड़ी हुई मेरी है नींद इस ख़याल से 
बढ़ी जो अपनी दूरियां ख़ुदा न ख़्वास्ता

मिलेगा ख़ास इक सुकूं मेरे रफ़ीक को 
गिरे मेरा जो ये मकां ख़ुदा न ख़्वास्ता 

राजेश कुमारी राज 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:36pm

आद० बृजेश कुमार जी आपको ग़ज़ल पसंद आई बहुत बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:33pm

आद० गुमनाम जी आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरी मेहनत सफल हो गई बहुत बहुत शुक्रगुज़ार हूँ 



सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:33pm

आद० लक्ष्मण धामी भैया आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरी मेहनत सफल हो गई बहुत बहुत शुक्रगुज़ार हूँ 

Comment by Neelam Upadhyaya on June 11, 2018 at 4:21pm

आदरणीया राजेश जी, नमस्कार । खूबसूरत गजल के लिए दिली मुबारकबाद ।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 10, 2018 at 12:05pm

हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी।बेहतरीन गज़ल |

उठाना मत सनम निकाब मुझको देखकर 
मचल उठा जो दिल जवां ख़ुदा न ख़्वास्ता

Comment by Mahendra Kumar on June 10, 2018 at 10:54am

आदरणीय राजेश मैम, कठिन बह्र में एक कठिन रदीफ़ ले कर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने. पर आप जिस स्तर की ग़ज़लें लिखतीं हैं उस हिसाब से यह ग़ज़ल अभी और बेहतर हो सकती है. यह गुंजाइश मतले में भी मौजूद है. //बढ़ी जो अपनी दूरियां ख़ुदा न ख़्वास्ता// यहाँ पर "बढ़ी" की जगह "बढीं" होना चाहिए. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by रक्षिता सिंह on June 9, 2018 at 11:28pm

आदरणीया राजेश जी नमस्कार,

बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ ....बहुत-बहुत मुबारकबाद ।

Comment by Satyanarayan Singh on June 9, 2018 at 9:08pm

वाह आदरणीया बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुयी है सादर बधाई 

Comment by Mohammed Arif on June 9, 2018 at 6:53pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी। आदाब,

                                  बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र प्रभावशाली । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 9, 2018 at 3:04pm

वाह वाह आदरणीया बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है..

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