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हाशिये पर आपकी दस्तार है कुछ कीजिये (ग़ज़ल राज)

बेसबब बेसाख़्ता रफ़्तार है कुछ कीजिये 
लड़खड़ाती जिंदगी हर बार है कुछ कीजिये 

उठ रही हैं उँगलियाँ सब आपके घर की तरफ़ 
हाशिये पर आपकी दस्तार है कुछ कीजिये 

वक्त आते ही डसेगा एक दिन वो आपको 
आस्तीं में पल रहा मक्कार है कुछ कीजिये 

आपके घर की तरफ़ से आ रहे पत्थर सभी 
आपके घर में छुपा गद्दार है कुछ कीजिये 

इस तरह तो मुफ़्लिसी दम तोड़ देगी भूख से 
आसमां को छू रहा बाज़ार है कुछ कीजिये

हैं मुखालिफ़ कुछ हवायें हो रही कमजोर छत 
डगमगाती आपकी सरकार है कुछ कीजिये 

काम की मसरूफ़यत से घूमने जाते नहीं 
आज बच्चे कह रहे इतवार है कुछ कीजिये

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 1217

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 25, 2018 at 7:14pm

बहुत बहुत शुक्रिया आद० अजय गुप्ता जी 

Comment by अजय गुप्ता 'अजेय on July 17, 2018 at 11:38pm
  1. बहुत खूब। वाह

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 17, 2018 at 7:28pm

आद० सुशील सरना जी आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरी मेहनत सफल हुई दिल से बहुत बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 17, 2018 at 7:28pm

आद० नीलेश भैया आपको ग़ज़ल पसंद आई तो तसल्ली हुई आपका दिल से बेहद शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 17, 2018 at 7:27pm

आद० बबिता गुप्ता जी आपका दिल से शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 17, 2018 at 7:26pm

आद० बसंत कुमार शर्मा जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका दिल से शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 17, 2018 at 7:26pm

आद० बृजेश कुमार बृज जी आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2018 at 5:57pm

बेसबब बेसाख़्ता रफ़्तार है कुछ कीजिये
लड़खड़ाती जिंदगी हर बार है कुछ कीजिये

उठ रही हैं उँगलियाँ सब आपके घर की तरफ़
हाशिये पर आपकी दस्तार है कुछ कीजिये

वाह आदरणीया राजेश कुमारी जी वाह .... दिलकश अशआर की इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 17, 2018 at 8:21am

बहुत ख़ूब..
अच्छी ग़ज़ल हुई   है आ. दीदी,
बहुत बहुत बधाई 

Comment by babitagupta on July 16, 2018 at 9:02pm

बेहतरीन गजल प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया राजेश दी.

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