For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122 1212 22


आज हद से गुजर गए कुछ लोग ।
फिर नजर से उतर गए कुछ लोग ।।

करके वादा यहां हुकूमत से ।
बेसबब ही मुकर गए कुछ लोग ।।

आशिकी उनके बस की बात कहाँ ।
चोट खाकर सुधर गए कुछ लोग ।।

अब कसौटी पे उनको क्या रखना ।
आजमाते ही डर गए कुछ लोग ।।

हर तरफ जल रही यहां बस्ती ।
कौन जाने किधर गए कुछ लोग ।।

छोड़िये बात अब मुहब्बत की
टूट कर फिर बिखर गए कुछ लोग ।।

क्या बताऊँ मैं किस तरह दिल में ।
दर्द बन कर ठहर गए कुछ लोग ।।

देखकर जुल्म बेटियों पर तो।
मुल्क में भी सिहर गए कुछ लोग ।।

---नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 434

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on March 29, 2018 at 3:08pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ अशआर शिल्प की दृष्टि से कमज़ोर हैं,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

मतले के सानी मिसरे में ' फिर' को "यूँ" कर लें ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 29, 2018 at 11:28am

आ0 मुहम्मद आरिफ साहब हार्दिक आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 29, 2018 at 11:27am

आ0 तेजवीर सिंह साहब हार्दिक आभार ।

Comment by TEJ VEER SINGH on March 29, 2018 at 11:01am

हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन जी। बेहतरीन गज़ल।

हर तरफ जल रही यहां बस्ती ।
कौन जाने किधर गए कुछ लोग ।।

Comment by Mohammed Arif on March 29, 2018 at 8:12am

देखकर जुल्म बेटियों पर तो।
मुल्क में भी सिहर गए कुछ लोग वाह!वाह!  बहुत ही शानदार मक्ता ।

       दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय नवीन मणि जी ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
19 hours ago
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service