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मुश्क़िलों में दिल के भी रिश्ते - सलीम रज़ा

2122 2122 2122 212

.

मुश्किलों में दिल के भी रिश्ते पुराने हो गए
ग़ैर से क्या  हो गिला अपने  बेगाने हो गए
-
चंद दिन के फ़ासले के बा'द हम जब भी मिले

यूँ लगा जैसे  मिले  हमको ज़माने  हो गए
-
पतझड़ों  के साथ मेरे दिन गुज़रते थे कभी
आप के आने से मेरे  दिन  सुहाने हो  गए
-
मुस्कराहट उनकी  कैसे भूल पाएगें  कभी
इक नज़र देखा जिन्हें औ हम दिवाने हो गए
-
आँख में शर्म-ओ-हया, पाबंदियाँ, रुस्वाईयां

उनके न  आने  के  ये अच्छे बहाने हो गए
-
आज भी उनकी अदाओं में वही है शोखियाँ 
आज फिर उनकी गली में आने जाने हो गए   
-
अब भी है रग रग में क़ायम प्यार की ख़ुश्बू रज़ा
क्या हुआ जो  ज़िस्म  के   कपड़े पुराने हो  गए

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by SALIM RAZA REWA on January 4, 2018 at 5:45pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,
आपकी इनायत और नवाज़िश के लिए शुक़गुज़ार हूँ.
Comment by SALIM RAZA REWA on January 4, 2018 at 5:44pm
भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया.
Comment by SALIM RAZA REWA on January 4, 2018 at 5:44pm
त्रिपाठी जी अपका बहुत शुक्रिया
Comment by SALIM RAZA REWA on January 4, 2018 at 5:43pm
नवीन त्रिपाठी जी, ग़ज़ल में शिरकत के लिए शुक्रिया बेगाने में 1 मात्रा गिरा लें. .
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 4, 2018 at 3:29pm

आ. भाई सलीम जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by नाथ सोनांचली on January 4, 2018 at 2:20pm

बहुत बेहतरीन ग़ज़ल सलिम साहब,बकमाल। क्या खूब कहा आपने।

अब भी है रग रग में क़ायम प्यार की ख़ुश्बू रज़ा 
क्या हुआ जो  ज़िस्म  के   कपड़े पुराने हो  गए

बहुत बहुत बधाई आपको।

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 4, 2018 at 10:37am

जनाब रेवा साहब बहुत सुंदर लिखा है आपने । मेरा संशय बेगाने शब्द को लेकर है बहुधा शब्द के पहले हर्फ़ पर मात्रा नहीं गिराते हैं । बाकी कबीर साहब जानें । ग़ज़ल के लिए बधाई ।

Comment by SALIM RAZA REWA on January 4, 2018 at 10:11am
जनाब शहज़ाद उस्मानी साहब,
आपकी महब्बत के लिए ममनून हूँ.
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 4, 2018 at 9:59am

बहुत बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई आदरणीय सलीम रज़ा 'रीवा' जी।

Comment by SALIM RAZA REWA on January 3, 2018 at 6:17pm
जनाब अफ़रोज साहब.
ग़ज़ल पर आपकी नज़रे इनायत और मशविरे के लिए शुक्रिया..

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