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चोर-मन

कमर खुजाती उस स्त्री पर

पंजे मारकर बैठ गई आँख

मदन-मन खुजाने लगा पांख |

अभी उड़ान भरी ही थी कि

पीठ पर पत्नी ने आके ठोका

रसगुल्लामुँह हो गया चोखा |

जवाब में रख दीं बातें इमरती

छत की धूप और सुहानी सरदी

सचेती स्त्री संभल के चल दी |

बहलाने लगा मूंगफली के बहाने

चोर-मन ढूंढता बचने के ठिकाने

भर चिकोटी पत्नी लगी मुस्कुराने |

सोमेश कुमार (मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by rajesh kumari on December 2, 2017 at 8:04pm

अच्छी हास्य रचना 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on November 29, 2017 at 9:26pm

इस सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय|

Comment by Samar kabeer on November 28, 2017 at 9:16pm
जनाब सोमेश जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on November 28, 2017 at 1:58pm
जनाब सोमेश कुमार जी आदाब,
बढ़िया हास्य कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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