For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तालिका छंद
सगण सगण(112 112)
दो-दो चरण तुकांत
---
दिन रात चलें
हम साथ चलें
सह नाथ रहें
सुख दर्द सहें

बिन बात कभी
झगड़े न सभी
मन प्रेम भरें
हरि कष्ट हरें

शुभ काम करो
तब नाम करो
सब वैर तजो
हरि नाम भजो

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 979

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 17, 2017 at 4:52pm
सादर आभार आदरणीय सुरेन्द्रनाथ भाई जी
Comment by नाथ सोनांचली on November 15, 2017 at 2:08pm
आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन, छोटी मापनी में आपनी बात कहना, यह बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, तथापि आपने इसका अच्छे ढंग से निर्वहन किया है, बहुत बेहतरीन छःन्द कहे आप। बधाई आपको।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 14, 2017 at 10:47pm
हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर सर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 14, 2017 at 10:47pm
सादर आभार आदरणीय बृजेश भाई जी
Comment by vijay nikore on November 14, 2017 at 7:11pm

अति सुन्दर छंद। हार्दिक बधाई।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 14, 2017 at 12:54pm
बहुत खूब रचना हुई आदरणीय
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:34pm
आदरणीय समर कबीर सर,सादर हार्दिक आभार नमन।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:33pm
आदरणीया अनामिका घटक जी,उत्साहवर्धन के लिए आभार सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:33pm
आदरणीय शेख शहज़ाद जी उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल शुक्रिया
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:32pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी,अनुमोदन के लिए सादर हार्दिक आभार ,सादर नमन

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
4 hours ago
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
4 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
6 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
10 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
10 hours ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
10 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
11 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
May 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service