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तालिका छंद
सगण सगण(112 112)
दो-दो चरण तुकांत
---
दिन रात चलें
हम साथ चलें
सह नाथ रहें
सुख दर्द सहें

बिन बात कभी
झगड़े न सभी
मन प्रेम भरें
हरि कष्ट हरें

शुभ काम करो
तब नाम करो
सब वैर तजो
हरि नाम भजो

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 17, 2017 at 4:52pm
सादर आभार आदरणीय सुरेन्द्रनाथ भाई जी
Comment by नाथ सोनांचली on November 15, 2017 at 2:08pm
आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन, छोटी मापनी में आपनी बात कहना, यह बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, तथापि आपने इसका अच्छे ढंग से निर्वहन किया है, बहुत बेहतरीन छःन्द कहे आप। बधाई आपको।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 14, 2017 at 10:47pm
हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर सर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 14, 2017 at 10:47pm
सादर आभार आदरणीय बृजेश भाई जी
Comment by vijay nikore on November 14, 2017 at 7:11pm

अति सुन्दर छंद। हार्दिक बधाई।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 14, 2017 at 12:54pm
बहुत खूब रचना हुई आदरणीय
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:34pm
आदरणीय समर कबीर सर,सादर हार्दिक आभार नमन।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:33pm
आदरणीया अनामिका घटक जी,उत्साहवर्धन के लिए आभार सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:33pm
आदरणीय शेख शहज़ाद जी उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल शुक्रिया
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:32pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी,अनुमोदन के लिए सादर हार्दिक आभार ,सादर नमन

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