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उनका बस इन्तिज़ार अच्छा था-ग़ज़ल

2122 1212 22/112

उनका बस इन्तिज़ार अच्छा था
यार मैं बे क़रार अच्छा था

गम रहा जो क़रीब दिल के बहुत
वो ख़ुशी से हज़ार अच्छा था

कौन कातिल था देख पाया नहीं
तेज़ नजरों का वार अच्छा था

मेरी उम्मीद तो रही कायम
तेरा झूठा ही प्यार अच्छा था

सौदा दिल का किया हमेशा ही
उनका वो रोज़गार अच्छा था

देख कर जीत की खुशी उनकी
हारना उनसे यार अच्छा था

खीझ कर माँ पसीजना तेरा
मार पर वो दुलार अच्छा था।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 14, 2017 at 10:49pm
हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी सर।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 13, 2017 at 10:27pm
हार्दिक बधाई ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 13, 2017 at 8:36pm
आदरणीय बृजेश ब्रज जी,हौंसला अफजाई के लिए सादर आभार
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 12, 2017 at 10:48pm
बेहद खूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय सतविंदर जी..सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 11, 2017 at 8:51pm
आदरणीय डॉ आशुतोषजी सुख़न नवाजी के लिए तहेदिल शुक्रिया!
Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 11, 2017 at 11:46am

मेरी उम्मीद तो रही कायम
तेरा झूठा ही प्यार अच्छा था

सौदा दिल का किया हमेशा ही
उनका वो रोज़गार अच्छा था

देख कर जीत की खुशी उनकी
हारना उनसे यार अच्छा था
आदरणीय सतविंदर जी इस बेहतरीन ग़ज़ल के इन शेरो के लिए बिशेष रूप से बधाई स्वीकार करें सादर

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 10, 2017 at 10:09pm
आदरणीय गुरप्रीत जी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार,नमन सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 10, 2017 at 10:07pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी नमन सादर! उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 10, 2017 at 10:01pm
आदरणीय समर सर,सादर नमन! अनुमोदन एव हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार!
Comment by Gurpreet Singh jammu on November 10, 2017 at 3:13pm

देख कर जीत की खुशी उनकी
हारना उनसे यार अच्छा था
वाह आदरणीय सतविंद्र कुमार जी ,, बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है

कृपया ध्यान दे...

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