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दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है
टूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज है

प्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज है
अपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज है

हँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहीं
सब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज है

दिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँ
अपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज है

घर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमे
नींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज है

अपने हक़ की बात करना ही फ़क़त काफ़ी नहीं
फ़र्ज भी अपना निभाने की ज़रूरत आज है

बूढ़ा बरगद है परेशाँ कुछ परिंदों के लिए
उनको घर वापस बुलाने की ज़रूरत आज है

प्रेम के बंधन छिटककर दूर जो भी हो गए
ये ग़ज़ल उनको सुनाने की ज़रूरत आज है
–-----------------------------
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Gajendra shrotriya on November 7, 2017 at 3:19pm
बहुत शुक्रिया जनाब सलीम रजा साहब।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 6, 2017 at 8:59pm
अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीय..बधाई
Comment by Samar kabeer on November 6, 2017 at 8:56pm
'दिल के रिश्तों को ज़बाँ से तोडना मुमकिन नहीं'
इस मिसरे को यूँ कर लें तो ऐब निकल जाएगा:-
'दिल के रिश्तों को ज़बाँ से तोडना मुमकिन कहाँ'

'घर बनाना है अगर मज़बूत,फिर ख़ुद को हमें'
Comment by SALIM RAZA REWA on November 6, 2017 at 8:00pm
आ. गजेंद्र जी,
ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई.
Comment by Gajendra shrotriya on November 6, 2017 at 7:49pm
आ०समर कबीर साहिब नमस्कार!ग़ज़ल पर आपकी सराहना का ह्रदय से आभार। निर्देशित बिन्दुओं पर सुधार हेतु प्रयासरत हूँ।सादर।
Comment by Gajendra shrotriya on November 6, 2017 at 7:44pm
ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ जनाब मो० आरिफ साहब। बहुत शुक्रिया।
Comment by Gajendra shrotriya on November 6, 2017 at 7:42pm
बहुत शुक्रिया जनाब अफरोज साहिब। आपका कहना सही है।आवश्यक सुधार हेतु प्रयासरत हूँ।
Comment by Samar kabeer on November 6, 2017 at 5:12pm
जनाब गजेन्द्र जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
4थे और 5वें शैर के ऊला मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है, देखियेगा ।
Comment by Mohammed Arif on November 6, 2017 at 8:11am
आदरणीय गजेंद्र जी आदाब, बेहतरीन सोच का प्रदर्शन करतु ग़ज़ल । हर शे'र माक़ूल है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।
Comment by Afroz 'sahr' on November 5, 2017 at 8:59pm
आदरणीय गजेंद्र जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको
पाँचवे शेर में तनाफ़ुर की सूरत बन रही है।देखिएगा,,,,

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