For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दीवाली (कामरूप छन्द, एक प्रयास)

दीपावली पर, ज्योत घर घर, अलौकिक सृंगार
वातावरण में, प्रभु चरण में, भक्ति का संचार
सब लोग पुलकित, बाल हर्षित, बाँटते उपहार
लड़ियाँ लगाते, सब सजाते, स्वर्ग सा घर द्वार

हर घर अटारी, खेत क्यारी, लौ दिखे चहुँओर
सारे नगर में, हर डगर में, पटाखों का शोर
दीपक जले जब, तब मिले सब, धरा औ आकाश
सद्भाव सुरभित, तन सुशोभित, हो कलुष का नाश

मौसम गुलाबी, दिल नवाबी, औ अमावस रात
अद्भुत समागम, दीप माध्यम, दे तमस को मात
जगमग सितारे, आज सारे, अचम्भित संसार
मिलना मिलाना, घर बुलाना, यहीं है त्यौहार

महका चमन है, मन मगन है, गले मिलते लोग
मोहक घटाएँ, मन लुभाएँ, सृष्टि का संयोग
सौहार्द ऐसा, मित्र जैसा, नहीं दिखता और
संस्कृति हमारी, है दुलारी, जगत की सिरमौर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 694

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 26, 2017 at 4:38pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी इस छंद के बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं पहले बार पढ़ा अच्छा लगा सारे नगर में, हर डगर में, पटाखों का शोर..इस पंक्ति में पटाखों पर थोडा रूकावट महसूस हुयी ...इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर

Comment by नाथ सोनांचली on October 24, 2017 at 8:43am
आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। आपसे आत्मीय प्रशंसा से अभिभूत हूँ। बहुत बहुत आभार आपका।
Comment by नाथ सोनांचली on October 24, 2017 at 8:42am
आद0 भैया डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार
Comment by Mohammed Arif on October 24, 2017 at 8:01am
आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आदाब, दीपावली की गरिमा-गौरव को रेखांकित करते बेहतरीन कामरूप छंद की ज़ोरदार प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 24, 2017 at 7:33am
भाई सुरेन्द्र जी कामरूप छन्द के माध्यम से आपने आकर्षक पंक्तियां लिखी आपको मुबारकबाद
Comment by नाथ सोनांचली on October 24, 2017 at 5:41am
आद0 समर साहब सादर प्रणाम। आपको छःन्द आधारित यह रचना पसब्द आयी, लिखना सार्थक हुआ। आपकी आत्मीय प्रशंशा और बेहतर लिखने को प्रेरित करती है। बहुत बहुत आभार आपका।
Comment by Samar kabeer on October 23, 2017 at 8:41pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,दीपावली का चित्रण करते उम्दा कामरूप छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by नाथ सोनांचली on October 23, 2017 at 1:01pm
आभार आदरणीय बासुदेव अग्रवाल नमन् जी, आपकी प्रशंशा से आत्मबल मिला है। यह मेरा इस छःन्द पर प्रथम प्रयास है। आपका हृदय से आभार
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 23, 2017 at 10:36am
वाहहहह आ0 सुरेन्द्र नाथ सिंह जी लयकारी आंतरिक तुकांतता और भाव सम्प्रेषण तीनों ही दृष्टि से बहुत मधुर छंद हुआ है। दीपावली का जीवन्त चित्रण। बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service