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भोला ने हाँफते-हाँफते घर में प्रवेश किया और माँ से बोला -" जल्दी से दे......जल्दी से दे....देर न कर...बाहर लूट मची है....लूट मची है... मुझे भी लूटकर लाना है.....।"
" मगर क्या दे दूँ..... किस चीज की लूट मची है....मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा बेटा....?"
" दो-चार खाली डिब्बे और कुछ प्लास्टिक की बोतलें दे दे ।'
" लेकिन क्यों ?"
" तू नहीं समझेगी माँ । कल रात अयोध्या में नई सरकार ने लाखों की संख्या में दीए जलाए थे । दीयों में बचा तेल हमारे जैसे कई गरीब के बच्चे लूट के ले जा रहे हैं । मैं भी लाऊँगा ताकि तू चार-पाँच दिन उससे सब्जी बना सके ।"
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Mohammed Arif on October 24, 2017 at 10:40pm
बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय अफ़रोज़ सहर जी । लेखन सार्थक हो गया ।
Comment by Afroz 'sahr' on October 24, 2017 at 2:34pm
जनाब आरिफ़ साहब संदर्भ को सार्थक करती इस शानदार लघूकथा पर आपको बहुत बहुत बधाईयाँ,,,,,
Comment by Mohammed Arif on October 24, 2017 at 2:16pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीय सलीम रज़ा साहब । मेरा लेखन सार्थक हो गया ।
Comment by Mohammed Arif on October 24, 2017 at 2:15pm
लघुकथा पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देकर मान बढ़ाने का बहुत-बहुत आभार आदरणीय अजय तिवारी जी ।
Comment by SALIM RAZA REWA on October 24, 2017 at 12:59pm
जनाब आरिफ साहब,...... ये हुई न बात वह वाह
बहुत खूबसूरत लघु कथा के लिए बहुत बहुत मुबारक़बाद
Comment by Ajay Tiwari on October 24, 2017 at 11:09am

आदरणीय आरिफ साहब,

बहुत अच्छी लघुकथा लिखी है आपने. हार्दिक शुभकामनाएं.

सादर 

Comment by Mohammed Arif on October 24, 2017 at 7:58am
आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब आदाब, आकी हौसला आफ़ज़ाई वाली प्रतिक्रिया से लेखन को संबल मिला । बहुत-बहुत शुक्रिया ।
Comment by Mohammed Arif on October 24, 2017 at 7:56am
आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब,आपकी उत्साहजनक प्रतिक्रिया से रचनात्मकता को संबल मिला । हार्दिक आभार ।
Comment by Mahendra Kumar on October 23, 2017 at 10:27pm

वाह! उम्दा लघुकथा है आ. मोहम्मद आरिफ़ जी. कम शब्दों में भी बहुत अच्छा लिखते हैं आप. मेरी तरफ़ से दिल से बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Samar kabeer on October 23, 2017 at 5:45pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,बहुत उम्दा और शानदार लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

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