For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कभी न होगी यहाँ नाभिकीय वार की बात (ग़ज़ल)

बह्र 1212 1122 1212 1121/112

अगर सभी के दिलो में हो सिर्फ प्यार की बात
नही कठिन है मिटाना जहाँ से खार की बात

हिरोशिमा से सबक लें सभी जो मुल्क अगर
कभी न होगी यहाँ नाभिकीय वार की बात

जुबाँ कभी मेरी खाली न जाये इसलिए तो
कभी किसी से न की भूलकर उधार की बात

हुआ चलन जो मो'बाइल का हर जगह गोया
कि अब नही यहाँ होंगी किसी से तार की बात

दिखा न आँख हमे इस कदर समझ बुजदिल
हैं शेर हम नही करते कभी सियार की बात

दिखा रही है सियासत भी सब्जबाग हमे
किसे है फ़िक्र करेगा जो रोजगार की बात

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 888

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mahendra Kumar on March 7, 2017 at 10:09pm
आदरणीय सुरेन्द्र जी, इस बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 7, 2017 at 3:16pm

आदरनीय सुरेन्द्र नाथ भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है , दिल से बधाइयाँ गज़ल के लिये ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 6, 2017 at 11:58am

आद० समर भाई जी ,गोया के दुसरे अर्थ (बोलने वाला )जानकर संशय दूर हो गया वरना मैं यही सोच रही थी की गोया के बाद सानी में कि की जरूरत कहाँ थी अब सब स्पष्ट हो गया बहुत बहुत शुक्रिया भाई जी 

Comment by नाथ सोनांचली on March 6, 2017 at 9:52am
आदरणीय समर साहब आदाब, आपके इस कथन से मेरा भी शंशय दूर हो गया, आभार आपका।
Comment by Samar kabeer on March 5, 2017 at 7:18pm
'हुआ चलन जो मोबाइल का हर जगह गोया'

बहना राजेश कुमारी जी आदाब,आज सुब्ह प्रिय अनुज सुरेन्द्र नाथ जी ने मुझे फोन पर बताया कि इस मिसरे में आपको 'गोया'शब्द पर कुछ संशय है, इसके लिये मुझे यहाँ उपस्थित होना पड़ा ।
"गोया"शब्द के दो अर्थ होते हैं (1)बोलने वाला (2)फ़र्ज़ कीजिये,या मान लीजिये,या अंग्रेजी में 'suppose",इस लिहाज़ से ये मिसरा पूरी तरह बामानी है, आपने 'मोमिन'का ये शैर पढ़ा या सुना होगा:-
"तुम मेरे पास होते हो गोया
जब कोई दूसरा नहीं होता"
उम्मीद है आपका संशय दूर हुआ होगा ?
Comment by नाथ सोनांचली on March 5, 2017 at 5:56pm
आदरणीय बैजनाथ शर्मा जी सादर आभार, यूँही प्यार बनाये रखें। सादर
Comment by नाथ सोनांचली on March 5, 2017 at 5:56pm
आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी हौसला अफजाई के लाइट ह्रदय की गहराई से आभार।
Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on March 5, 2017 at 2:41pm

बहुत सुन्दर 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 5, 2017 at 7:58am
वाह वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी बेहद सुन्दर और सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाइयाँ
Comment by नाथ सोनांचली on March 4, 2017 at 8:11pm
आद0 बहन राजेश कुमारी जी आपकी प्रशंसा से नयी ऊर्जा का संचार होता है, दिल से आपका आभार। इस ग़ज़ल पर आद0 उस्ताद समर साहब से इस्लाह लिया था, सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"करे  मरम्मत  चप्पल  जूते । चलता  जीवन  इसके बूते।।दोजून कभी खा लेता काके।…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"   आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर आपने सुन्दर…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई * बन्द शटर हैं  खुला न ताला।। दृश्य सुबह का दिखे निराला।।   रूप  मनोहर …"
14 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न…"
19 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद +++++++++ करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥ कटे फटे सब को सीता है। सदा…"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin posted discussions
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Feb 15
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Feb 15
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Feb 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service