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चुगलियाँ कर बैठी आँखें और हैरानी मेरी (ग़ज़ल 'राज'

२१२२ २१२२ २१२२ २१२

कितने रिश्ते तोड़ आई तल्ख़ मनमानी मेरी

क्यूँ गवारा हो किसी को अब परेशानी मेरी

 

शमअ के पहलू में रख कर जान  परवाना  कहे

इक कहानी खुद लिखेगी अब ये कुर्बानी मेरी

 

रूबरू आये तो धोका दे गया मेरा नकाब

चुगलियाँ कर बैठी आँखें और हैरानी मेरी  

 

टांक दो दिलकश सितारे कहकशाँ से तोड़कर

बोलती है अब्र से देखो चुनर धानी मेरी

 

शह्र भर में कू ब कू तक हो गई रुस्वाइयाँ

कर गई बर्बाद मुझको हाय नादानी मेरी

 

पीले पत्तों को डराती ख़्वाब में आकर ख़िज़ाँ

मिलना  तुम तैयार दर पे चाल तूफानी मेरी

 

ढूँढती इक दिन ख़ुशी वो आएगी सोचूँ मगर  

कैसे पहचानेगी मुझको शक्ल अनजानी मेरी

.

-----मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 6, 2017 at 12:54pm

आद० महेंद्र कुमार जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से आभारी हूँ .

Comment by Mahendra Kumar on March 5, 2017 at 1:03pm
आदरणीय राजेश मैम, बहुत उम्दा और प्यारी ग़ज़ल लगी आपकी। मतला विशेष तौर पर अच्छा लगा। ढेरों बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 4, 2017 at 7:10pm

आद० तेजवीर सिंह  जी ,आपकी उत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए दिल से बहुत बहुत आभार शुक्रिया सादर |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 4, 2017 at 7:09pm

आद० सुरेन्द्र नाथ भैया ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लेखन कर्म सार्थक हो गया तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रगुजार हूँ |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 4, 2017 at 7:08pm

आद० समर भाई जी आप जल्दी स्वास्थ्य लाभ लेकर सक्रिय भी हो जायेंगे हमारी शुभकामनाएँ 

Comment by TEJ VEER SINGH on March 4, 2017 at 12:11pm

हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी। बेहतरीन गज़ल ।

शह्र भर में कू ब कू तक हो गई रुस्वाइयाँ

कर गई बर्बाद मुझको हाय नादानी मेरी

Comment by नाथ सोनांचली on March 4, 2017 at 6:43am
रूबरू आये तो धोका दे गया मेरा नकाब
चुगलियाँ कर बैठी आँखें और हैरानी मेरी क्या कहना वाह

टांक दो दिलकश सितारे कहकशाँ से तोड़कर
बोलती है अब्र से देखो चुनर धानी मेरी, वाह वाह वाह वाह
आद0 बहन राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन। बेहद उम्दा अशआर के साथ खूबसूरत गजल के लिए बधाई।
Comment by Samar kabeer on March 2, 2017 at 9:30pm
बहना जब मुझे मंच पर सक्रिय देखें,समझ लीजियेगा तबीअत ठीक है,अभी इस लायक़ नहीं हूँ कि मंच पर सक्रियता दिखा सकूँ ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 2, 2017 at 9:02pm

आद० बृजेश कुमार जी ,आपकी उत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए दिल से बहुत बहुत आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 2, 2017 at 9:00pm

आद० बासुदेव अग्रवाल जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत बहुत शुक्रिया आपका सादर .

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