For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

122 122 122 12

     

कि जब आप उनके कहाने लगे

मुझे सारे वादे बहाने लगे

 

किया चाक दिल था हमारा अभी            

महल ख्वाब का क्यूँ ढहाने लगे

 

यकीं था मुझ्र भूल जाओगे अब   

गमे याद तुम तो तहाने लगे

 

कहा था अगम एक सागर हूँ मैं

गजब है कि सागर थहाने लगे

 

चिता ठीक से जल न पाई अभी

मगर आप गंगा नहाने लगे

(मौलिक/अप्रकाशित)

Views: 462

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 6, 2017 at 12:43pm

आदरणीय गोपाल नारायण श्रीवास्तव सर, वाह वाह, क्या खूब ग़ज़ल कही है. शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाएं. मतला और आखिरी शेर का जवाब नहीं. आदरणीय सौरभ सर की बात से सहमत हूँ. सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 6, 2017 at 12:21pm

आदरणीय गोपाल सर अलहदा अंदाज में लिखी इस शानदार ग़ज़ल के लिए धेर सारी बधाई स्वीकार करें ..सादर प्रणाम के साथ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 5, 2017 at 10:11pm

क्या कमाल किया है, आपने आदरणीय गोपाल नारायण जी ! देसज शब्दों के लालित्य का काफ़िया में भरपूर उपयोग किया है ! वाह वाह ! 

मैं तो मतले की बेबाकी पर ही मुग्ध हूँ. दिल से ’हरजाई’ के लिए उठती ’उफ़’ और ’आह’ को आपने शब्दों से खूब बाँधा है. बधाई.. 

लेकिन .. किया चाक दिल था हमारा अभी .. जैसे मिसरे से बचना था. शेर के मिसरे बुनावट में यों गुत्थम्गुत्था हो कर प्रस्तुत नहीं होते.  इसी तरह मुझ्र  कोई शब्द नहीं होता. यह अवश्य ही मुझे को लेकर हुई टंकण-त्रुटि है. 

बहरहाल, इस निराली ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by Samar kabeer on February 5, 2017 at 9:55pm
और जनाब 'ढहाने' या "ढाने" ?
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 5, 2017 at 9:44pm

आ० समर कबीर साहिब /आ०मो० आरिफ साहिब 

थहाना meaning in hindi


[क्रि-स.] - गहराई, गुण आदि की थाह लेना

तहाना meaning in hindi


[क्रि-स.] - किसी वस्तु को तह लगा कर रखना; तह करना; लपेटना

उक्तानुसार ही कहाना का अर्थ कहलाना है . सादर .

Comment by Mohammed Arif on February 5, 2017 at 7:02pm
आदरणीय गोपाल नारायण जी आदाब,कृपया 'कहाने','थहाने','तहाने' शब्दों के अर्थ बताने की कृपा करें ।
Comment by Samar kabeer on February 4, 2017 at 8:59pm
जनाब डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,ग़ज़ल अच्छी हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
कुछ शब्द नये नये से लगे,जैसे 'कहाने','ढहाने','तहाने','थहाने'कृपया इनके अर्थ बताने का कष्ट करें ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 3, 2017 at 11:55am

आ. भाई गोपाल नारायण जी एक अच्छी ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"आ. भाई गुरप्रीत जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई। "
11 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"शुक्रिया आदरणीय सुशील सरना जी"
12 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
" शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी "
12 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब
"हार्दिक बधाई आदरणीय मुसाफ़िर जी। लाजवाब ग़ज़ल। "
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ बजेगा भोर का इक दिन गजर आहिस्ता आहिस्ता  सियासत ये भी बदलेगी मगर आहिस्ता…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन दोहे हुए हैं ।हार्दिक बधाई।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, बहुत ख़ूब दोहा त्रयी हुई है। विशेष कर प्रथम एवं तृतीय दोहा शानदार हैं।…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

धक्का

निर्णय तुम्हारा निर्मलतुम जाना ...भले जानापर जब भी जानाअकस्मातपहेली बन कर न जानाकुछ कहकरबता कर…See More
yesterday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० सौरभ भाई जी, जन्म दिवस की अशेष शुभकामनाएँ स्वीकार करें। आप यशस्वी हों शतायु हों।.जीवेत शरद: शतम्…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . . . .

दोहा त्रयी. . . . . . ह्रदय सरोवर में भरा, इच्छाओं का नीर ।जितना इसमें डूबते, उतनी बढ़ती पीर…See More
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के)

1121 -  2122 - 1121 -  2122 जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के वो रगों में दौड़ते हैं…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आ. भाई सौरभ जी, आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ ।"
Monday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service