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" कैसे कहूँ ...."- कविता /अर्पणा शर्मा

कैसे कहूँ मन की व्यथा,
सारे दुख-सुख का,
सब लेखा-जोखा,
किसने कितनी दी पीड़ा,
किस-किसने कब,
दिया मुझे धोखा,
वो गठरी पीछे छोड़ ,
बस बढ़ जाती हूँ,
निरंतर आगे की ओर,
समयधारा में धुल जाते हैं,
बहुत गहन घाव भी,
सप्रयास बिसरा देती हूँ ,
पीड़ा की सघन छाँव भी,
मुँह कर खड़ी होती हूँ,
झिर्री से आती धूप की ओर,
लेती हूँ उसका ताप भी,
भरती हूँ उसकी आब भी,
अपनी देह और अंतस में,
आशा की दरारों से,
वहाँ बिखर जाने देती हूँ ,
उन सूर्य रश्मियों को,
अपने होने का ,
सुदृढ विश्वास लिये...

। मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 12, 2017 at 8:52pm
वाह बड़ी ही सुंदरता से आपने भावों को शब्दों में पिरोया है..बधाइयाँ
Comment by Arpana Sharma on January 11, 2017 at 3:39pm
आदरणीय श्रीमान् विजय निकोरे जी एवं श्रीमान् मोहम्मद आरीफ जी - आपकी शुभकामनाओं का बहुत शुक्रिया ।
Comment by vijay nikore on January 11, 2017 at 1:31pm

ऐसी सुन्दर कविता कम ही मिलती है। हार्दिक बधाई, आदरणीया अर्पणा जी।

Comment by vijay nikore on January 11, 2017 at 1:31pm

ऐसी सुन्दर कविता कम ही मिलती है। हार्दिक बधाई, आदरणीया अर्पणा जी।

Comment by Mohammed Arif on January 11, 2017 at 8:11am
आदरणीया अर्पणा शर्मा जी, आशा का का संचार करती कविता के लिए बधाई !
Comment by Arpana Sharma on January 10, 2017 at 10:33pm
आदरणीय श्रीमान् समर कबीर साहब - मेरी कविता पर आपकी सह्रदय सराहना का बहुत -बहुत शुक्रिया और सादर नमन्।
Comment by Samar kabeer on January 10, 2017 at 9:15pm
मोहतरमा अर्पणा शर्मा साहिबा आदाब,आज का दिन वाक़ई मेरा अच्छा दिन है कि ये दूसरी अच्छी कविता पढ़ रहा हूँ,अभी सुशील सरना साहिब की कविता पढ़ी और उसके फ़ौरन बाद ही आपकी कविता मिल गई ।
वाह बहुत ख़ूब लिखी आपने ये महसूसात पर मबनी कविता,क्या शब्दों में रवानी है, बात कहने का संतुलन देखते ही बनता है,बहुत सुंदर,इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Arpana Sharma on January 10, 2017 at 5:27pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी - आपके प्रोत्साहन का हार्दिक धन्यवाद

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 10, 2017 at 5:07pm

आदरणीया अर्पणा जी, बहुत बढ़िया भावाभिव्यक्ति हुई है. इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई. सादर 

कृपया ध्यान दे...

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