For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पंख /सुरेश कुमार ' कल्याण '

पंख
---

पंख
जो
समय की मार से
हो चुके थे
जीर्ण-शीर्ण
मैंने
खूब फैलाने का प्रयास किया,
ताकि
विश्राम कर सकें
इनकी छत्रछाया में
मेरे अपने
मेरे अजीज
मेरे संबंधी।

मगर
जब वो जीर्णावस्था से
उबरे
जब पूर्ण छाया
देने ही वाले थे
चढ़ गए
मेरे
सुन्दर पंखों पर
काटने के लिए
मेरे अपने
मेरे अजीज
मेरे संबंधी।

बहुत दर्द
बहुत पीड़ा
सहने की कोशिश
बहुत की
मगर
असहनीय पीड़ा
कब तक
आखिर
कब तक
उफ न करता
मगर
नहीं समझे
मेरे अपने
मेरे अजीज
मेरे संबंधी ।

सहने की भी कोई
सीमा होती है
आखिर
अन्त में
अब कोशिश कर रहा हूं
अपने
फैले हुए पंखों को
समेटने की
कि कहीं
कटे हुए इन्हीं
पंखों के नीचे
दबने से
चोटिल न हों
मेरे अपने
मेरे अजीज
मेरे संबंधी।

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 759

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 27, 2016 at 9:36am
आदरणीय सतविंदर भाई जी सादर आभार ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 27, 2016 at 9:13am
आदरणीय सुरेश भाई जी बेहतरीन भावाभिव्यक्ति हुई हाउ,ममानवीय स्वभाव की विसंगति का सुन्दर चित्रण।हार्दिक बधाई
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 26, 2016 at 6:23pm
श्रद्धेय श्री गिरि राज भंडारी जी रचना को सम्मान देने के लिए हार्दिक आभार । सादर ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 26, 2016 at 9:40am

आदरनीय सुरेश भाई , रिश्तों की हक़ीकत बताती भाव पूर्ण कविता के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 25, 2016 at 8:35am
आदरणीय श्री रामबली गुप्ता जी ये सब तो आप जैसे मित्रों का स्नेह है । रचना अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार । सादर ।
Comment by रामबली गुप्ता on October 25, 2016 at 1:09am
वाह वाह क्या अतुकांत है। बिम्ब विधान ने तो दिल छू लिया। बहुत खूब बधाई लीजिये इस बेहतरीन सृजन के लिए आद0 भाई सुरेश कल्याण जी।सादर
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 24, 2016 at 1:59pm
आदरणीय श्री ब्रजेश कुमार जी सादर आभार ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 23, 2016 at 7:33pm
बहुत ही सुन्दर कविता के लिए हार्दिक बधाइयाँ आदरणीय
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 23, 2016 at 3:16pm
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब । यही सच्चाई है कि जिस वृक्ष की छाया में विश्राम करते हैं उसी पर कुल्हाडी चलाते हैं। रचना को समय व सम्मान देने के लिए हार्दिक आभार । सादर ।
Comment by Samar kabeer on October 23, 2016 at 2:56pm
जनाब सुरेश कुमार'कल्याण'जी आदाब,हमेशा से यही होता रहा है,अपने ही सगे संबन्धी ऐसा व्यवहार करते हैं कि मन तडप उठता है,बहुत ही भावपूर्ण कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
19 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
19 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
19 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service