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ग़ज़ल ( अंजाम तक न पहुंचे )

ग़ज़ल ( अंजाम तक न पहुंचे )

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मफऊल-फ़ाइलातुन -मफऊल-फ़ाइलातुन

आग़ाज़े इश्क़ कर के अंजाम तक न पहुंचे ।

कूचे में सिर्फ पहुंचे हम बाम तक न पहुंचे ।

फ़ेहरिस्त आशिक़ों की देखी उन्होंने लेकिन

हैरत है वह हमारे ही नाम तक न पहुंचे ।

उसको ही यह ज़माना भूला हुआ कहेगा

जो सुब्ह निकले लेकिन घर शाम तक न पहुंचे ।

बद किस्मती हमारी देखो ज़माने वालो

बाज़ी भी जीत कर हम इनआम तक न पहुंचे।

साक़ी से जिसने छीना साग़र हुआ उसी का

जो मांगते रहे मय वह जाम तक न पहुंचे ।

दहशत पसंद है वह मुस्लिम कहो न उसको

नामे जिहाद ले जो इस्लाम तक न पहुंचे ।

तस्दीक़ उनको  मंज़िल उल्फत की क्या मिलेगी

राहे वफ़ा में जिनके अक़्दाम तक न पहुंचे ।

( मौलिक व अप्रकाशित )

  

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 3, 2016 at 9:06pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , ग़ज़ल पसंद करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 3, 2016 at 7:20pm

वाह बेहतरीन ग़ज़ल एक एक शेर ह्रदय तक पहुँचता हुआ नमन है लेखनी को 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 2, 2016 at 9:55pm

मोहतरम  जनाब  सुशील सरना   साहिब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 2, 2016 at 9:55pm

मोहतरम  जनाब  हर्ष महाजन  साहिब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Sushil Sarna on September 2, 2016 at 9:11pm

आग़ाज़े इश्क़ कर के अंजाम तक न पहुंचे ।
कूचे में सिर्फ पहुंचे हम बाम तक न पहुंचे ।

वाह दिल खुश हो गया आदरणीय .... कितनी खूबसूरत बात कितनी सहजता से कह गए ... दिल से दाद कबूल फरमाएं सर।

Comment by Harash Mahajan on September 2, 2016 at 8:52pm

आ० Tasdiq Ahmed Khan जी बहुत ही खूब...!! बेहतरीन पेशकश..!!

सादर !!

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 2, 2016 at 7:51pm

मोहतरम जनाब समर कबीर   साहिब आदाब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई के लिए   तहे दिल से  बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 2, 2016 at 7:49pm

मोहतरम जनाब गिरिराज  साहिब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 2, 2016 at 7:49pm

मोहतरम जनाब अरुण कुमार साहिब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Samar kabeer on September 2, 2016 at 3:50pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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