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इन्सां के लिए ... (क्षणिकाएं)

इन्सां के लिए ... (क्षणिकाएं)
1 .
एक पत्थर उठा
शैतां के लिए
एक पत्थर उठा
जहां के लिए
एक पत्थर उठा
मकां के लिए
देवता बन
जी उठा
एक पत्थर
इन्सां के लिए
...... ..... ..... .....
२.
मैं आज तक
वो रिक्तता
नहीं नाप सका
जिसमें
कोई माँ
अपने जन्मे को
तन्हा छोड़
ब्रह्मलीन हो जाती है
मन को शून्यता की
क़बा दे जाती है
..... ..... ..... ..... .....
३.
हमने
प्रवाहित कर दी थी
गंगा में
कलश में समेटी अस्थियां
जैसा माँ ने
अंतिम क्षणों में
कहा था
नहीं बहा सके मगर
उसकी
क्षीण होती
दर्दीली स्वर लहरी को

सुशील सरना
मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on August 19, 2016 at 2:08pm

आदरणीय सौरभ सर प्रस्तुतियां आपकी आत्मीय प्रशंसा से उपकृत हुई। आपका सुझाव मेरे लिए अमूल्य है नए सृजन में इस सूक्षम और गहन बात को अवश्य ध्यान में रखूँगा।  पुनः आप का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on August 19, 2016 at 2:04pm

आ.  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तवजी प्रस्तुति आपकी स्नेहिल प्रशंसा से उपकृत हुई। 

Comment by Sushil Sarna on August 19, 2016 at 2:02pm

आदरणीय   Samar kabeer    जी प्रस्तुति को अपने स्नेह से सुशोभित  करने के लिए आपका हार्दिक आभार। 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 18, 2016 at 4:33pm

अत्यंत सान्द्र भावनाओं केलिए बारम्बार बधाइयाँ. तीनों क्षणिकाएँ संप्रेषणीयता के लिहाज से अत्यंत सटीक हुई हैं. अलबत्ता, पहली क्षणिका में पत्थरों के प्रकार को तार्किक क्रम देना और उचित होता.

सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 17, 2016 at 9:37pm

सुन्दर भावात्मक प्रस्तुति- आदरणीय

Comment by Samar kabeer on August 17, 2016 at 3:27pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा क्षणिकाएं हुई हैं,कम शब्दों में गहरी बातें कह गए आप,बहुत बधाई स्वीकार करें इस शानदार प्रस्तुति पर ।
Comment by Sushil Sarna on August 17, 2016 at 1:41pm

आ. कल्पना भट्ट जी प्रस्तुति आपकी स्नेहिल प्रशंसा से उपकृत हुई। 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 17, 2016 at 9:08am
भावनात्मक रचना । बधाई स्वीकारें आदरणीय सुशील जी ।
Comment by Sushil Sarna on August 16, 2016 at 7:12pm

आदरणीय  Shyam Narain Verma    जी प्रस्तुति को अपने स्नेह से सुशोभित  करने के लिए आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Shyam Narain Verma on August 16, 2016 at 4:59pm
बहुत  ही सुन्दर भावात्मक प्रस्तुति .. बधाई  सादर 

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