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गज़ल - जिन्दगी का सफ़र खूब है

जिन्दगी का सफर खूब है,

मैं हूँ तनहा , मगर खूब है.

 

जिन्दगी कट रही शान से ,

ये सुहाना सफ़र खूब है .

 

क्या कहूँ मैं शबे-वस्ल को,

वो जगा रात भर खूब है.

 

प्यार की इंतिहा हो गई,

बेकरारी उधर खूब है .

 

हर दिशा में चमकता रहा ,

ये गणित का सिफर खूब है.

 

खार के साथ हैं फूल भी, ,

 कंटकों की डगर खूब है

 

मानता हूँ मैं "आभा"तुझे,

वाह! तेरी नज़र खूब है.

 

....आभा

(मौलिक और अप्रकाशित)

 

 

Views: 909

Comment

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Comment by बशर भारतीय on May 24, 2016 at 3:01pm
आ. आभा जी अच्छी ग़ज़ल है बधाई आपको
Comment by जयनित कुमार मेहता on May 23, 2016 at 9:52pm
आदरणीया आभा जी,
सुन्दर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आपको।
Comment by kanta roy on May 23, 2016 at 4:53pm
हर अशआर बहुत सुंदर बने है गजल के , बधाई आपको आदरणीया आभा जी !
Comment by रोहिताश्व मिश्रा on May 21, 2016 at 2:21pm
Vaahhh didii
Comment by Abha saxena Doonwi on May 19, 2016 at 12:18pm

आदरणीय  सुरेश कुमार 'कल्याण ' जी , आदरणीय  सुशील  सरना  जी  , आदरणीय  जान गोरखपुरी जी, आदरणीय डा. आशुतोष मिश्रा जी ,आदरणीय समर  कबीर  जी , आदरणीय  श्याम नारायण जी  आप सभी  महानुभावों  का तहे  दिल  से शुक्रिया  आभार मेरी हौसला अफजाई करने  के  लिए  ...

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on May 19, 2016 at 10:24am
आदरणिया आभा सक्सेना जी बहुत खूब बधाई हो
Comment by Sushil Sarna on May 18, 2016 at 9:27pm

जिन्दगी का सफर खूब है,
मैं हूँ तनहा , मगर खूब है.

वाह बहुत सुंदर अशआर कहे हैं आदरणीया आपने। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 18, 2016 at 6:19pm
वाह्हहह।बहुत खूब ग़ज़ल हुयी है,तहेदिल से मुबारकबाद।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 18, 2016 at 5:06pm

आदरणीया आभा जी ..;ग़ज़ल का हर शेर पसंद आया 

हर दिशा में चमकता रहा ,

ये गणित का सिफर खूब है.यह शेर बहुत पसंद आया हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Samar kabeer on May 18, 2016 at 2:25pm
मोहतरमा 'आभा'जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।

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