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ग़ज़ल .........कैसे कहूं कि तू मुझे चिट्ठी ही भेज दे ...

कैसे कहूँ कि तू मुझे चिट्ठी ही भेज दे,

तू है जहाँ वहां की तू मिट्टी ही भेज दे.

 

याद आ रही है मुझको तेरी आज इस तरह,

तू प्यार से लिख चिट्ठियां कोरी ही भेज दे.

 

करता तलाश नौकरी कैसे बता मिले,

चिठ्ठी नहीं तो तू मेरी अर्जी ही भेज दे.

 

बेज़ार हो चुकी बहुत  तनहाइयों से मैं,

बेशक तू कोई याद पुरानी ही भेज दे.

 

इस  जिंदगी की राह में कांटे बिछाये क्यूँ,

तू ज़िंदगी के नाम की रुबाई ही भेज दे.

 

मेहँदी रचाई हाथ में तेरे ही नाम की,

जब रच गयी है मेहँदी तो डोली ही भेज दे

.

“आभा” को याद  आ गई भूली सी दास्तान,

तू उसको चेहरे की हंसी थोड़ी सी भेज दे.

 

..आभा

 

 प्रस्तुत ग़ज़ल अप्रकाशित एवं मौलिक  है ....आभा 

 

 

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Comment

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Comment by Abha saxena Doonwi on July 21, 2016 at 2:25pm

 नमस्कार दोस्तों ,मुझे ऐब-ए-तनाफुर दोष के  बारे  में नहीं मालूम  है मैं आपनी जानकारी के लिए इस दोष  के  बारे  में जानना चाहती हूँ  शुक्रिया .....

Comment by Abha saxena Doonwi on July 20, 2016 at 6:24am

आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी आपने  मेरी इस ग़ज़ल पर अपनी प्रतिक्रिया  दी  इस के लिए मैं आपका हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ शुक्रिया .....:)

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 11, 2016 at 9:16am
आभा जी इस प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनायाएं स्वीकार करें सादर
Comment by Abha saxena Doonwi on July 8, 2016 at 2:12pm

आदरणीय  सुशील सरना जी  नमस्कार , मैं  आपकी प्रतिक्रिया  से सहमत हूँ  आगामी  ग़ज़लों में इस बात का ध्यान रखा  जायेगा बहुत बहुत  शुक्रिया  आपका .....मेरी  ग़ज़ल में  या  फिर अन्य किसी  रचना  में कोई  भी ख़ामी नज़र  आये तो  आप निःसंकोच बता  सकते  हैं ..

Comment by Abha saxena Doonwi on July 8, 2016 at 2:09pm

आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी  नमस्कार , मैं  आपकी प्रतिक्रिया  से सहमत हूँ  आगामी  ग़ज़लों में इस बात का ध्यान रखा  जायेगा बहुत बहुत  शुक्रिया  आपका .....

Comment by Ravi Shukla on July 8, 2016 at 11:11am

आदरणीयाा आभा जी गजल के प्रयास के लिये आपको बधाई  मनोज की बात से हम भी सहमत है  और गजल से पहले उसका अरकान या बह्र लिख दिया करे समझने मे आसानी हाेेती है और यह मंच का अनुशासन भी है सादर 

Comment by Sushil Sarna on July 7, 2016 at 1:52pm

अादरणीय अाभा जी सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। इस ग़ज़ल की बहर भी लिख देते तो अच्छा होता।  

Comment by मनोज अहसास on July 7, 2016 at 10:01am
नमस्कार आदरणीया
इस प्रस्तुति में ह्रदय की तीव्र कोमल भावनाये भरी हुई हैं
खूब जज़्बाती रचना
बहुत कुछ कहने की चाह
कुछ सफलता कुछ नहीं
बहुत बहुत बधाई

एक बात ये कि इसे ग़ज़ल बनाने के लिये अभी इसमें कुछ परिवर्तन करने क
पड़ेंगे
मंच पर बहुत सुधी ज्ञानी ग़ज़लकार आपको अधिक बता पायेगे
सादर नमन

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