For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल .........कैसे कहूं कि तू मुझे चिट्ठी ही भेज दे ...

कैसे कहूँ कि तू मुझे चिट्ठी ही भेज दे,

तू है जहाँ वहां की तू मिट्टी ही भेज दे.

 

याद आ रही है मुझको तेरी आज इस तरह,

तू प्यार से लिख चिट्ठियां कोरी ही भेज दे.

 

करता तलाश नौकरी कैसे बता मिले,

चिठ्ठी नहीं तो तू मेरी अर्जी ही भेज दे.

 

बेज़ार हो चुकी बहुत  तनहाइयों से मैं,

बेशक तू कोई याद पुरानी ही भेज दे.

 

इस  जिंदगी की राह में कांटे बिछाये क्यूँ,

तू ज़िंदगी के नाम की रुबाई ही भेज दे.

 

मेहँदी रचाई हाथ में तेरे ही नाम की,

जब रच गयी है मेहँदी तो डोली ही भेज दे

.

“आभा” को याद  आ गई भूली सी दास्तान,

तू उसको चेहरे की हंसी थोड़ी सी भेज दे.

 

..आभा

 

 प्रस्तुत ग़ज़ल अप्रकाशित एवं मौलिक  है ....आभा 

 

 

Views: 693

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abha saxena Doonwi on July 21, 2016 at 2:25pm

 नमस्कार दोस्तों ,मुझे ऐब-ए-तनाफुर दोष के  बारे  में नहीं मालूम  है मैं आपनी जानकारी के लिए इस दोष  के  बारे  में जानना चाहती हूँ  शुक्रिया .....

Comment by Abha saxena Doonwi on July 20, 2016 at 6:24am

आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी आपने  मेरी इस ग़ज़ल पर अपनी प्रतिक्रिया  दी  इस के लिए मैं आपका हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ शुक्रिया .....:)

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 11, 2016 at 9:16am
आभा जी इस प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनायाएं स्वीकार करें सादर
Comment by Abha saxena Doonwi on July 8, 2016 at 2:12pm

आदरणीय  सुशील सरना जी  नमस्कार , मैं  आपकी प्रतिक्रिया  से सहमत हूँ  आगामी  ग़ज़लों में इस बात का ध्यान रखा  जायेगा बहुत बहुत  शुक्रिया  आपका .....मेरी  ग़ज़ल में  या  फिर अन्य किसी  रचना  में कोई  भी ख़ामी नज़र  आये तो  आप निःसंकोच बता  सकते  हैं ..

Comment by Abha saxena Doonwi on July 8, 2016 at 2:09pm

आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी  नमस्कार , मैं  आपकी प्रतिक्रिया  से सहमत हूँ  आगामी  ग़ज़लों में इस बात का ध्यान रखा  जायेगा बहुत बहुत  शुक्रिया  आपका .....

Comment by Ravi Shukla on July 8, 2016 at 11:11am

आदरणीयाा आभा जी गजल के प्रयास के लिये आपको बधाई  मनोज की बात से हम भी सहमत है  और गजल से पहले उसका अरकान या बह्र लिख दिया करे समझने मे आसानी हाेेती है और यह मंच का अनुशासन भी है सादर 

Comment by Sushil Sarna on July 7, 2016 at 1:52pm

अादरणीय अाभा जी सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। इस ग़ज़ल की बहर भी लिख देते तो अच्छा होता।  

Comment by मनोज अहसास on July 7, 2016 at 10:01am
नमस्कार आदरणीया
इस प्रस्तुति में ह्रदय की तीव्र कोमल भावनाये भरी हुई हैं
खूब जज़्बाती रचना
बहुत कुछ कहने की चाह
कुछ सफलता कुछ नहीं
बहुत बहुत बधाई

एक बात ये कि इसे ग़ज़ल बनाने के लिये अभी इसमें कुछ परिवर्तन करने क
पड़ेंगे
मंच पर बहुत सुधी ज्ञानी ग़ज़लकार आपको अधिक बता पायेगे
सादर नमन

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
43 minutes ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
17 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service