For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मिलन की आस - मुक्त कविता

तुझसे मिलन के इंतज़ार में 

बसाया था बलम

तेरी छवि को यादों में

तेरी प्रीत को ख्वाबो में

करवटों को बाँहों में 

और

सिलवटों को रातों में

 

तुझको पाने की प्यास में

सीखा था सनम

गीतों को गाना

नृत्य को जीना

शराब को पीना

और

ज़ख्मों को सीना

 

तुझसे मिलन की आस पिया 

और सजाया था

कजरा आँखों में

गजरा बालों में

नखरा गालों पे

और

मदिरा होठों पे

 

अब नहीं रुका जाता प्रिय

आ जाओ और बहका दो

बातों को बातों से

होठों को होठों से

बाहों को बाहों से

ओर

साँसों को साँसों से 

निधि 

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 2191

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nidhi Agrawal on March 20, 2015 at 9:55am

आप सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार 

रचना साहित्य की नज़र से स्तरीय नहीं होते हुवे भी आप सभी ने रचना को सम्मान दिया .. आप की बहुत शुक्रगुजार हूँ 

यों ही चलते फिरते लिख दी थी सही में 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 19, 2015 at 12:22pm

भावपूर्ण रचना  के  लिए बधाई  आद  निधि  अग्रवाल जी 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 18, 2015 at 9:23pm

आदरणीया निधि जी, सुन्दर प्रस्तुति , हार्दिक बधाई आपको ! सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 18, 2015 at 6:17pm
सुन्दर, श्रृंगारिक , मुक्त , रचना , बधाईयाँ। सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 18, 2015 at 4:56pm

बहुत सुन्दर , सुन्दर भाव , सुन्दर कविता के लिये बधाई , आदरणीया निधि जी ॥

Comment by Shyam Narain Verma on March 18, 2015 at 2:52pm
सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई सादर
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 18, 2015 at 12:10pm

अब नहीं रुका जाता प्रिय

आ जाओ और बहका दो

बातों को बातों से

होठों को होठों से

बाहों को बाहों से

ओर

साँसों को साँसों से -------------------इस संवेदना को प्रणाम  . सुन्दर रचना आ०  निधि जी

Comment by Shyam Mathpal on March 18, 2015 at 11:39am

आदरणीय निधि जी ,

मिलन व इंतज़ार को सही शब्दों मे पिरोया है. 

सुंदर रचना के लिए बधाई .

Comment by somesh kumar on March 18, 2015 at 11:31am

सीधी-साधी भाषा में अपने दिल की अभिव्यक्ति ,शायद आज का जनसामान्य पाठक ऐसी ही रचनाओं की प्रतीक्षा करता है |शिल्प-बिम्ब और छंद रचना को विशेष प्रभाव अवश्य देते हैं परंतु लोकप्रियता हमेशा आम लोगों की भाषा में लिखे साहित्य को मिलती है |आपकी रचना में अभी वैसे ही तत्व दिखते हैं |इसलिए बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 18, 2015 at 9:34am

बहुत खूब आदरणीया निधि जी विरह वेदना को खूब प्रस्तुत किया है आपने सादर बधाई इस रचना के लिये

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
14 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service