For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

212 212 212 2

इक दुआ हमने उम्र भर माँगी ।
अपने दिल मेँ तेरी बसर माँगी ।

पंछी नदियाँ जमीँ फलक तारे ,
हमने सबसे तेरी खबर माँगी ।

बात काँटोँ ने क्या गलत कर दी ,
इक कली गर जो शाख पर माँगी ।

हर तरफ तू ही तू नजर आये ,
देने वाले से वो नजर माँगी ।

कोई पूछे जो गर सफर अपना ,
तेरी जानिब मेँ हर डगर माँगी ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 616

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by khursheed khairadi on February 25, 2015 at 10:30am

पंछी नदियाँ जमीँ फलक तारे ,
हमने सबसे तेरी खबर माँगी ।

हर तरफ तू ही तू नजर आये ,
देने वाले से वो नजर माँगी ।

आदरणीय नीरज भाई बहुत खुबसूरत अहसास है इन अशआर में |आप शायद ''2-12 2   12 12   22 "  पर ग़ज़ल कहना चाह रहे हैं |आप थोड़ा सा प्रयास करके इस ग़ज़ल को इसी  बह्र पर करदें तो मज़ा आ जायेगा |इस बहर पर कुछ ग़ज़लें ---

१. फिर छिड़ी रात बात फूलों की \रात है या बरात फूलों की 

२.आँख में शाम से नमी सी है \आज फिर आपकी कमी सी है 

३.आप जिनके करीब होते हैं \वो बड़े खुश नसीब होते हैं 

४ .ज़िन्दगी जब उड़ान भरती है \बाँहों में आसमान भरती है 

और आपका मतला 

इक दुआ हमने उम्र भर माँगी ।
अपने दिल मेँ तेरी बसर माँगी ।

हार्दिक अभिनन्दन |सादर |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 24, 2015 at 12:51am

सुन्दर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई.

Comment by ajay sharma on February 24, 2015 at 12:31am

sundar rachna .....bahut khoob 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 23, 2015 at 11:06pm

आदरणीय नीरज मिश्रा जी सुन्दर ग़ज़ल है  हार्दिक बधाई आपको इस रचना पर !

Comment by Samar kabeer on February 23, 2015 at 10:47pm
जनाब नीरज मिश्रा "प्रेम" जी ,आदाब,भाई क्या ही अच्छी ग़ज़ल कही आपने, सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो गया,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 23, 2015 at 9:16pm

आदरणीय प्रेम भाई , ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास हुआ है , लिखी हुई बह्र के अनुरूप आपके मिसरे नहीं लग रहे हैं, एक बार तक्तीअ कर के देख लीजियेगा ॥

Comment by gumnaam pithoragarhi on February 23, 2015 at 7:02pm

इक दुआ/ हमने उम /र भर माँगी

२१२/ २१२/ १२२ २ ........

क्या मैं सही हूँ बताईएगा ............

Comment by Dr. Vijai Shanker on February 23, 2015 at 6:40pm
हर तरफ तू ही तू नजर आये ,
देने वाले से वो नजर माँगी ।
बहुत खूब, नीरज मिश्रा ' प्रेम ' जी , बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर , सादर।
Comment by maharshi tripathi on February 23, 2015 at 5:07pm

सुन्दर गजल पर आपको बधाई आ. नीरज जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 3:00pm

नीरज जी

बहुत अच्छा प्रयास i  सुन्दर i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
12 hours ago
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
yesterday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service