For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हमने किस किस से न पूछा/ ग़ज़ल

2122  2122   2122  212

हमने किस किस से न पूछा ज़िन्दगी तेरा पता ।
हमको ले आया ग़मों में ऐ ख़ुशी तेरा पता ।

ऐ मुहब्बत दूर मुझसे अब न तू जा पाएगी ,
दे रहा है अब मुझे ये दर्द भी तेरा पता ।

हाथों में  दीपक बुझा था दूर तारे थे बहुत ,
जुगनुओं से हमने पूछा रौशनी तेरा पता ।

माना ढलती उम्र में चाहत भी तेरी ढल गयी ,
ढूंढता है इक दीवाना आज भी तेरा पता ।

उनसे नज़रें क्या मिलीं दिल शायराना हो गया ,

आशिकी में मिल रहा है शाइरी तेरा पता ।

हमने माना राह दिल की बंदगी तुझसे मिली ,
पर लुटाकर जाँ मिला है बंदगी तेरा पता ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 1071

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:14pm
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण साहब
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:12pm
बहुत बहुत शुक्रिया आ. फूल साहब
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:11pm
बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद आ. गिरिराज साहब यूँ ही नजरे इनायत फरमाते रहें समीर साहब की बात पर गौर किया है और अपनी समझानुसार सुधार भी किया है ।
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:08pm
बहुत बहुत शुक्रिया धर्मेन्द्र कुमार साहब ।
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:07pm
आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार जयनित कुमार मेहता साहब ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 19, 2016 at 6:49am

हार्दिक बधाई ...

Comment by PHOOL SINGH on January 18, 2016 at 2:45pm

अति सुंदर रचना आपको बहुत  बहुत बधाई स्वीकार हो

Comment by PHOOL SINGH on January 18, 2016 at 2:43pm

अति सुंदर रचना आपको बहुत  बहुत बधाई स्वीकार हो


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 18, 2016 at 8:01am

आदरणीय नीरज भाई , अच्छी गज़ल कही है , समर भाई की सीख को ध्यान दीजियेगा , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 17, 2016 at 10:54pm

अच्छे अश’आर हुए हैं आदरणीय नीरज साहब, दाद कुबूल करें

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service