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चित्र हो और कोई , ये गॅवारा नहीं

साथ मेरे चलों , तो चलों उम्र भर ,
दो कदम साथ चलना गॅवारा नहीं।
तुम अधूरे इधर , मैं हूँ अधूरा उधर ,
दोनों आधे जिये , ये गॅवारा नहीं ।

तुम जो कह दो शुरू, तो शुरूआत हो
तुम जो कह दो खतम , सॉस थम जोयगी ।
पंथ कांटों का हो या कि फूलों भरा
तुम नहीं साथ में , ये गॅवारा नहीं ।

लाख नजरों में दिलकश नजारे रहे
किंतु आँखों की देहरी को न छू सके
मेरे सपनों के घर में सिवाय तेरे ,
चित्र हो और कोई , ये गॅवारा नहीं

मैं अकेला रहूँ या रहूँ भीड मैं
तुम बढाना नहीं हाथ मेरी तरफ
ये जमाना करें , लाख मुझपे सितम
एक तुझपे सितम , ये गॅवारा नहीं।

.

अजय कुमार शर्मा
( मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 704

Comment

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Comment by vijay nikore on December 4, 2014 at 4:48pm

बहुत खूबसूरत भाव हैं। बधाई।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on December 3, 2014 at 8:07pm

बहुत ही सुन्दर! गुनीजनों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है...

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 3, 2014 at 6:48pm

साथ मेरे चलों , तो चलों उम्र भर ,
दो कदम साथ चलना गॅवारा नहीं।
तुम अधूरे इधर , मैं हूँ अधूरा उधर ,
दोनों आधे जिये , ये गॅवारा नहीं ।----------भैया कहाँ से ये भाव ले आये  i बहत उच्च i बहुत सुन्दर i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 3, 2014 at 10:21am

साथ मेरे चलों , तो चलों उम्र भर , 
दो कदम साथ चलना गॅवारा नहीं।
तुम अधूरे इधर , मैं हूँ अधूरा उधर , ------हूँ हटा दीजिये 
दोनों आधे जिये , ये गॅवारा नहीं ।-------बहुत ही खूबसूरत  शुरुआत ,इसी तरह अन्य पंक्तियों को  भी साधते २१२ २१२  २१२  २१२ ...पर  तो क्या बात थी एक शानदार नज्म होती 

खैर बहरहाल ढेरों बधाई लीजिये इस भावपूर्ण प्रस्तुति पर 

Comment by ajay sharma on December 2, 2014 at 10:46pm

bahut roj se ik ik rachna post kar raha tha ....aaj manokamna puran hui .....sabhi ......bade aur guni jano ko hardik dhanyavad 

Comment by maharshi tripathi on December 2, 2014 at 8:04pm

मन को छूने वाली ,,,,,सुन्दर रचना पर बधाई ,आ. अजय जी |

Comment by Neeraj Neer on December 2, 2014 at 6:00pm

वाह बहुत सुंदर। 

Comment by ram shiromani pathak on December 2, 2014 at 1:46pm

सुन्दर भाव //हार्दिक बधाई आपको

Comment by Hari Prakash Dubey on December 2, 2014 at 12:38pm

मेरे सपनों के घर में सिवाय तेरे , 
चित्र हो और कोई , ये गॅवारा नहीं....सुन्दर रचना ,हार्दिक बधाई श्री अजय शर्मा जी !

Comment by somesh kumar on December 2, 2014 at 11:16am

ज़िन्दगी भर का साथ माँगा है /हाँ तेरा हाथ माँगा है/

चंद मुलाकतों में मुक्कमल नहीं /इसलिए हर घड़ी का साथ माँगा है 

सुंदर भाव-अभिव्यक्ति 

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