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ज़रूरी क्या कि ये राहे-सफ़र हमवार हो जाये

ज़रूरी क्या कि ये राहे-सफ़र हमवार हो जाये

न हों दुश्वारियाँ तो ज़िन्दगी बेकार हो जाये

 

आना का सर कुचलने में कभी तू देर मत करना

कहीं ऐसा न हो, दुश्मन ये भी होशियार हो जाये

 

फरेबो-मक्र, ख़ुदग़रज़ी न ज़ाहिर हो किसी रुख़ से

वगरना आदमी भी शहर का अख़बार हो जाये

 

कभी भी एक पल मैं ख़्वाब को सोने नहीं देता

न जाने किस घड़ी महबूब का दीदार हो जाये

 

मैं दावा-ए-महब्बत को भी अपने तर्क कर दूँगा

जो ख़्वाबों में नहीं आने को वो तैयार हो जाये

 

हिफ़ाज़त नीम, पीपल, आम, तुलसी की ज़रूरी है  

वगरना साँस लेते ही बशर आदमी बीमार हो जाये

 

जवानी में सफ़र जन्नत का मिल जाये तो क्या कहना

न जाने किस परी से जाके आँखें चार हो जाये

 "मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 26, 2014 at 2:49pm

कभी भी एक पल मैं ख़्वाब को सोने नहीं देता

न जाने किस घड़ी महबूब का दीदार हो जाये

सुन्दर भाव ..जी नजरें हर समय उधर ही लगी रहती हैं
भ्रमर ५


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Comment by गिरिराज भंडारी on May 23, 2014 at 9:52pm

आदरणीय , लाजवाब गज़ल कही है , आपको दिली बधाइयाँ ॥ दूसरे शे र मे आप अना कहना चाहते हैं शायद ,या  आना सही है ?

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 23, 2014 at 5:35pm

ज़रूरी क्या कि ये राहे-सफ़र हमवार हो जाये

न हों दुश्वारियाँ तो ज़िन्दगी बेकार हो जाये..वाह 

फरेबो-मक्र, ख़ुदग़रज़ी न ज़ाहिर हो किसी रुख़ से

वगरना आदमी भी शहर का अख़बार हो जाये.............बहुत बढ़िया 

कभी भी एक पल मैं ख़्वाब को सोने नहीं देता

न जाने किस घड़ी महबूब का दीदार हो जाये...दिलकश 

हिफ़ाज़त नीम, पीपल, आम, तुलसी की ज़रूरी है  

वगरना साँस लेते ही बशर आदमी बीमार हो जाये.......बशर आदमी ...यहा समझ में नहीं आया 

आदरणीय बेहतरीन शेरो के सुसज्जित इस शानदार ग़ज़ल के लिए तहे दिल बधाई सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 23, 2014 at 11:23am

हिफ़ाज़त नीम, पीपल, आम, तुलसी की ज़रूरी है  

वगरना साँस लेते ही बशर आदमी बीमार हो जाये.... क्या ग़ज़ब नसीहत भरी बात कही है बहुत बहुत बधाई 


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Comment by अरुण कुमार निगम on May 21, 2014 at 10:21am

हिफ़ाज़त नीम, पीपल, आम, तुलसी की ज़रूरी है वगरना साँस लेते ही बशर आदमी बीमार हो जाये

वाह , क्या कहने..................


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 20, 2014 at 9:22pm

बहुत खूब सादर बधाई स्वीकार करें

Comment by coontee mukerji on May 20, 2014 at 8:11pm

मैं दावा-ए-महब्बत को भी अपने तर्क कर दूँगा

जो ख़्वाबों में नहीं आने को वो तैयार हो जाये......बहुत खूब. हार्दिक बधाई.

Comment by Shyam Narain Verma on May 20, 2014 at 11:51am

सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई ......

सादर

Comment by Meena Pathak on May 20, 2014 at 6:32am

बहुत सुन्दर रचना .. बधाई 

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