For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-जय गान पर

2122 2122 2122 212

1

जब भी छाए अब्र मुश्किल के वतन की आन पर

खेले हैं तब तब हमारे तिफ़्ल अपनी जान पर

2

आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान पर

हो न पाएगा कभी हावी तू हिन्दुस्तान पर

3

हम नहीं होते परेशाँ धर्म से या ज़ात से

ख़ूँ जले अपना तो झूठे और बेईमान पर

4

माना हैं मतभेद भाषा वेष भूषा धर्म में

फ़ख़्र करते हैं प सब भारत के बढ़ते मान पर

5

एक दिन ऐसा भी "निर्मल" देखना तुम आएगा

मुस्कुराएगा फ़लक भी हिन्द के जय गान पर

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 202

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 11, 2021 at 10:33pm

आ. रचना बहन, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by Rachna Bhatia on November 6, 2021 at 9:51pm

आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी, ग़ज़ल तक आने आभार। बहुत अच्छी राय दी आपने। आभार। 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on November 6, 2021 at 12:48pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। 

आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान पर.    मुनासिब समझें तो इस मिसरे को यूँ कर लें :

'कोशिशें बेकार होंगी आज़मा के देख ले' 

'फ़ख़्र करते हैं प सब भारत के बढ़ते मान पर'   मुनासिब समझें तो इस मिसरे को यूँ कर लें :

'फ़ख़्र सबको है मगर भारत के बढ़ते मान पर'      सादर।

Comment by Rachna Bhatia on November 5, 2021 at 2:01pm

आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। ग़ज़ल पर इस्लाह करने के लिए तहेदिल से शुक्रिय:। सर्, जी, सुधार करके दिखाती हूँ।

सादर।

Comment by Samar kabeer on November 4, 2021 at 3:23pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान पर

हो न पाएगा कभी हावी तू हिन्दुस्तान पर'

इस मतले का ऊला बदलने का प्रयास करें और इसे मतले की जगह शे'र कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय नादिर ख़ान जी सादर अभिवादन! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
7 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी सादर अभिवादन अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
25 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"//आपने कैफ़ भोपाली साहब का नाम तो सुना ही होगा . उन्ही का शेर नीचे दे रहा हूँ,,// हम तरसते ही तरसते…"
40 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"धन्यवाद आ. नादिर खान साहब ,इंसान जब जज़्बाती होता है तो रोता है .. आँख में दरिया क्या कोई क़तरा…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब , //वैसे आपने इसी मुशायरे में अपनी ग़ज़ल में अरबी भाषा के लफ़्ज़…"
3 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"अदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी उम्दा गज़ल हुयी बधाई । तीसरे शेर को यूँ किया जा…"
3 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय नीलेश जी अच्छी गज़ल हुयी बधाई स्वीकारें...दूसरे शेर के साथ कनेक्ट नहीं हो पा रहा हूँ (माज़रात…"
3 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय dandpani जी उम्दा गज़ल की बधाई "साँप में औ नेवले में दोस्ताने हो गए" मिसरे में दो…"
4 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीया रिचा जी बहुत शुक्रिया आपका "
4 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"जनाब अमीरुद्दीन साहब बहुत शुक्रिया आपका हमने नोट कर लिया है आरिजिनल कॉपी में सुधार कर लेंगे…"
4 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब गज़ल तक आने और हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया आपने सही कहा नीलेश जी की इस्लाह…"
4 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय नीलेश जी इस्लाह का बहुत  शुक्रिया ... आपने सही कहा गज़ल में अभी और मशक़्क़त की…"
4 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service