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मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है
मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है

यहां तालाब नदियां जब कई बरसों से सूखे हैं
खुदा जाने हमें पीने को पानी कौन देता है

हमारी जिंदगी ठहरी हुई इक झील है लेकिन
ये उम्मीदों के दरिया को रवानी कौन देता है

जमीं से आसमां तक का सफर हम कर चुके लेकिन
नहीं मालूम मंजिल की निशानी कौन देता है

परिंदे भी समझते हैं कि पर कटने का खतरा है
इन्हें फिर हौसला ये आसमानी कौन देता है।।

.                                           

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 26, 2021 at 8:55pm

आ. अतुल जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Aazi Tamaam on April 22, 2021 at 7:12am

सुंदर रचना के लिए सहृदय बधाई

सादर प्रणाम आदरणीय अतुल जी

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 21, 2021 at 11:59am

आदरणीय  atul kushwah  जी सादर नमस्कार 

बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

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