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atul kushwah
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"आ. अतुल जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 26
Aazi Tamaam commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"सुंदर रचना के लिए सहृदय बधाई सादर प्रणाम आदरणीय अतुल जी"
Apr 22
बसंत कुमार शर्मा commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"आदरणीय  atul kushwah  जी सादर नमस्कार  बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको "
Apr 21
atul kushwah posted a blog post

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता हैयहां तालाब नदियां जब कई बरसों से सूखे हैं खुदा जाने हमें पीने को पानी कौन देता हैहमारी जिंदगी ठहरी हुई इक झील है लेकिन ये उम्मीदों के दरिया को रवानी कौन देता हैजमीं से आसमां तक का सफर हम कर चुके लेकिन नहीं मालूम मंजिल की निशानी कौन देता हैपरिंदे भी समझते हैं कि पर कटने का खतरा है इन्हें फिर हौसला ये आसमानी कौन देता है।।.                                           (मौलिक व अप्रकाशित)See More
Apr 20
नाथ सोनांचली commented on atul kushwah's blog post बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में...
"आद0 अतुल कुशवाह जी सादर अभिवादन। इस रचना का शिल्प क्या है क्योंकि यह किसी निश्चित बह्र में नहीं लगी। मंच पर शिल्प लिखने की परंपरा रही है जिससे रचना को देखा और उससे कुछ सीखा जा सके। बहरहाल बधाई स्वीकारें। सादर"
May 2, 2020
atul kushwah posted a blog post

बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में...

पूछते क्या हो यूं लेकर सवाल आंखों मेंपढ सको पढ लो मेरा सारा हाल आंखों मेंदेखना था कि समंदर से क्या निकलता हैबस यही सोच के फेंका था जाल आंखों मेंवो मिरे सामने आती है झुकाए पलकेंहया को रखा है उसने संभाल आंखों मेंनजर से नब्ज पकडकर इलाज कर भी कर देवो लेकर चलती है क्या अस्पताल आंखों मेंजो उसका साथ है तो तीरगी से डर कैसाइश्क में जलने लगती है मशाल आंखों में।। #अतुल                                                   (मौलिक व अप्रकाशित)See More
Apr 28, 2020
atul kushwah posted a blog post

संकट इस वसुंधरा पर है...

विश्व आपदा में ईश्वर से प्रार्थनाहे मनुष्यता के पृतिपालक हे प्रति पालक हे मनुष्यता क्या भूल हुई क्या गलती है अब क्षमा करो हे परमपिता।अब राह दिखाओ दुनिया को मुश्किल सबकी आसान करो हे कायनात के संचालक सारे जग का कल्याण करो।ये कैसी विपदा है भगवन कैसा ये शोर धरा पर है जो सदियों से जीवित है अब संकट उस परम्परा पर है।जग त्राहि माम कर बैठा है नेतृत्व विफल है प्राणनाथ शाखों के परिंदों को अपने इन्द्रियातीत मत कर अनाथ।हे दसों दिशाओं के मालिक शहरों और गांवों के मालिक आकाश में सूरज के मालिक धरती पर छांवों के…See More
Apr 6, 2020

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मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है

यहां तालाब नदियां जब कई बरसों से सूखे हैं

खुदा जाने हमें पीने को पानी कौन देता है

हमारी जिंदगी ठहरी हुई इक झील है लेकिन

ये उम्मीदों के दरिया को रवानी कौन देता है

जमीं से आसमां तक का सफर हम कर चुके लेकिन

नहीं मालूम मंजिल की निशानी कौन देता है

परिंदे भी समझते हैं कि पर कटने का खतरा है

इन्हें फिर हौसला ये आसमानी कौन देता…

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Posted on April 20, 2021 at 5:30pm — 3 Comments

बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में...

पूछते क्या हो यूं लेकर सवाल आंखों में

पढ सको पढ लो मेरा सारा हाल आंखों में

देखना था कि समंदर से क्या निकलता है

बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में

वो मिरे सामने आती है झुकाए पलकें

हया को रखा है उसने संभाल आंखों में

नजर से नब्ज पकडकर इलाज कर भी कर दे

वो लेकर चलती है क्या अस्पताल आंखों में

जो उसका साथ है तो तीरगी से डर कैसा

इश्क में जलने लगती है मशाल आंखों में।। #अतुल

                   …

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Posted on April 27, 2020 at 4:50pm — 1 Comment

संकट इस वसुंधरा पर है...

विश्व आपदा में ईश्वर से प्रार्थना

हे मनुष्यता के पृतिपालक हे प्रति पालक हे मनुष्यता

क्या भूल हुई क्या गलती है अब क्षमा करो हे परमपिता।

अब राह दिखाओ दुनिया को मुश्किल सबकी आसान करो

हे कायनात के संचालक सारे जग का कल्याण करो।

ये कैसी विपदा है भगवन कैसा ये शोर धरा पर है

जो सदियों से जीवित है अब संकट उस परम्परा पर है।

जग त्राहि माम कर बैठा है नेतृत्व विफल है प्राणनाथ

शाखों के परिंदों को अपने इन्द्रियातीत मत कर…

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Posted on April 6, 2020 at 10:30pm

मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...

एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकर

मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर,

 

जिनके चेहरे साफ दिखते हैं मगर दामन नहीं

शक उन्हें भी है तेरी ईमानदारी देखकर,

 

उम्रभर जो भी कमाया मिल गया सब खाक में

चढ गया फांसी के फंदे पर उधारी देखकर,

 

मुल्क में हालात कैसे हैं पता चल जाएगा

देखकर कश्मीर या कन्याकुमारी देखकर,

 

सर्द मौसम है यहां तो धूप भी बिकने लगी

हो रही हैरत तेरी दूकानदारी देखकर,

 

इस…

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Posted on November 16, 2016 at 5:00pm — 16 Comments

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At 2:11am on July 31, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें.

At 9:40pm on January 29, 2015, sunita dohare said…

अतुल जी, नमस्कार आपका स्वागत है 

At 11:03pm on October 28, 2014, somesh kumar said…

sukriya,

At 8:09am on June 22, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है आदरणीय अतुल जी

सादर!

At 7:02pm on February 19, 2014, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार मे एम मित्र मंडली मे स्वागत है आपका । 

 
 
 

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