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श्रमिक दिवस पर श्रमजीवी को आओ शीश झुकाएँ।
बलाक्रान्त शोषित निर्बल को मिलकर सभी बचाएँ।

दुरित दैन्य दुख झेल रहे हैं
सदा मौत से खेल रहे हैं।
तृषा तपन पावस तुसार सह
जीवन नौका ठेल रहे हैं।

हर सुख से जो सदा विमुख हो उस पर बलि-बलि जाएँ।
निर्मित जो करता नवयुग तन,उसे नहीं ठुकराएँ।

आजीवन कटु गरल पी रहे
दुर्धर जीवन सभी जी रहे।
हाँफ-हाँफ कर विदीर्ण दामन
जीने के हित सदा सी रहे।

कर्म निरत गुरु गहन श्रमिक हित अपना फर्ज निभाएँ।
सहोत्साह आगे बढ़ करके सत्वर गले लगाएँ।

नहीं अलसता और विकलता
दर्शाए कृशकाय सहजता।
अस्थिशेष पंजर तन से वह
लहराए नित-नित नूतनता।

अमर कीर्ति के इस वाहक पर नहीं कहर बरपाएँ।
श्रमिक धरा की निर्मल पूँजी उसका मान बढ़ाएँ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 3, 2020 at 7:21pm

भाई सुरेंद्र जी आपके उत्साहवर्धन से मन प्रसन्न हुआ दिल से आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 3, 2020 at 7:20pm

परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साहवर्धन से चौगुना बल मिलता है, दिल से आपका बहुत बहुत आभार

Comment by Samar kabeer on May 3, 2020 at 12:42pm

जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब, मज़दूर दिवस पर अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by नाथ सोनांचली on May 2, 2020 at 6:52pm

आद0 भैया डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन। मजदूर दिवस पर मजदूरों को समर्पित बेहतरीन गीत पर बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 2, 2020 at 3:42pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन आपने उत्साहवर्धन किया आपका दिल से आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 2, 2020 at 3:41pm

आदरणीय विजय निकोर जी सादर अभिवादन आपने उत्साह बढ़ाया इसके लिए दिल से आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 2, 2020 at 11:17am

आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन । श्रमजीवियों पर अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by vijay nikore on May 2, 2020 at 7:02am

श्रमदिवस के अवसर पर आपने अच्छी रचना प्रस्तुत की है। बधाई, मेरे मित्र छोटेलाल सिंह जी।

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