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Ravi Shukla
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Ravi Shukla commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आँसू हमारी आँखों में लाने का शुक्रिया-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय  लक्ष्मण  जी , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआा है, बधाई स्वीकार करें । खातिर वोट वाले मिसरे को वाक्य विन्यास के अनुसार और बेहतर किया जा सकता है ।सादर ।"
Jun 5
Ravi Shukla commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । छठे शेर का कथ्य खास पसंद आया "
Jun 5
Ravi Shukla commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: लाओ जंजीर मुझे पहना दो
"आदरणीय आजी साहब  गजल की उम्दा कोशिश हुई है मुबारक बाद पेश करता हूँ छाेटी बहर मे काम मुशिकल होता है । तस्वीर काे पहनाना शायद काफिया के साद रदीफ का निर्वहन न हो  पाया है समर साहब की  टिप्पणी से मुझे भी कुछ सीखने को मिलेगा। बहर हाल…"
Jun 5
Ravi Shukla commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post समझा बताओ किसने किताबों ने जो कहा-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्षमण जी इस उम्दा गजल के लिये हार्दिक बधाई पेश  है  नया जोड़ा गया शेर बहुत अच्छा लगा  फिर से मुबारक बाद "
Jun 5
Ravi Shukla commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कम है-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" (गजल)
"आदरणीय लक्षमण जी हिन्दी भाषा के शब्दों से सजी इस सुंदर गजल के लिये हार्दिक बधाई प्रस्तुत है "
Jun 5
Ravi Shukla commented on Saurabh Pandey's blog post पर्यावरण-दिवस के अवसर पर छ: दोहे // --सौरभ
"आदरणीय सौरभ भाईजी  पर्यावरण दिवस पर सुंदर दोहे रचे आपने प्रासंगिक एवं उत्तम भाव के दोाहों के लिये हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jun 5
Ravi Shukla commented on सालिक गणवीर's blog post वैसे तो वारदातें थीं संगीन.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी गजल की उम्दा  कोशिश हुई है इसके लिये दिली मुबारक बाद कुबूल करें । एक दो बाते कहना चाहूँगा मतले में रंगीन और संगीन से जो काफिया तय हुआ  है वो आगे गजल मे नहीं बन पाया है तो मतले को दुबारा देखने कीगुजारिश है । पॉचवे शेर…"
Jun 5
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय सालिक गणवीर जी गजल की सराहना के लिए दिली शुक्रिया "
Feb 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी ग़ज़ल की सराहना के लिए हार्दिक आभार प्रेषित करता हूं"
Feb 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीय संजय जी"
Feb 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय नाथ सोनांचली जी ग़ज़ल की सराहना के लिए हार्दिक आभार प्रेषित करता हूं"
Feb 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"दिली शुक्रिया आदरणीया राजेश दीदी"
Feb 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय समर साहब आपकी सक्रियता और मंच के प्रति आपकी लगन को प्रणाम करता हूँ। आपकी सराहना से ग़ज़ल कहना सफल हुआ आभार "
Feb 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"हार्दिक आभार आदरणीया ऋचा जी "
Feb 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"गर्द आईने से क्यूँ आज हटाई न गई क्यूँ हक़ीक़त तेरे इजलास में लाई न गई हुस्न का रौब मेरे दिल पे पड़ा कुछ ऐसाजो ग़ज़ल उनको सुनानी थी सुनाई न गई मुझको अहसास-ए-निदामत ने क़सम दी थी तिरीतो शहादत में क़सम झूठी भी खाई न गई हमने दिल से ही निभाया है हर इक…"
Feb 25
Ravi Shukla commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब कुछ है अब यार सियासी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी बढ़िया ग़ज़ल कही है, सियासत का अच्छा वर्णन है ।  बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 12

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तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर

थी यही फूल की किस्मत कि बिखर जाना था,

ये कहाँ तय था कि जुल्फों में ठहर जाना था।

मौज ने चाहा जिधर मोड़ दिया कश्ती को,

"मुझको ये भी न था मालूम किधर जाना था"।

जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे,

डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था।

बज़्मे अग्यार में है जलवा नुमाई तेरी ,

इस तग़ाफ़ुल पे तेरे मुझको तो मर जाना था।

गर्द हालात की चहरे पे है,लेकिन तुझको,

आईना बन के मैं आया तो सँवर जाना था।

सुब्ह का भूला…

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Posted on March 1, 2019 at 4:30pm — 8 Comments

गीत दफ्तर पर

सिस्टम से अब और निभाना मुश्किल है,

आँसू पीकर हँसते जाना मुश्किल है।।

लंबे चौड़े दफ्तर हैं पर छोटी सोच लिए।

भाँग कुएँ में मिली हुई है पानी कौन पिए।

कागज के रेगिस्तानों में भटक रहा,

मृग तृष्णा से प्यास बुझाना मुश्किल है।

भावुकता में मैदां छोड़ूँ क्या होगा।

कोई और यहाँ आकर रुसवा होगा।।

अजगर बन कर पड़ा रहूँ कैसे संभव,

जोंकों को भी खून पिलाना मुश्किल है।

लानत और मलामत का है भार बहुत।

न्याय नहीं निर्णय का शिष्टाचार…

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Posted on November 16, 2018 at 9:48pm — 5 Comments

तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

2122  1122  1122  22/112

कोई पूछे तो मेरा हाल बताते भी नहीं,

आशनाई का सबब सबसे छुपाते भी नहीं।

शेर कहते हैं बहुत हुस्न की तारीफ़ में हम

पर कभी अपनी ज़बाँ पर उन्हें लाते भी नहीं।

जब भी देते हैं किसी फूल को हँसने की दुआ,

शाख़ से ओस की बूंदों को गिराते भी नहीं।

ये तुम्हारी है अदा या है कोई मजबूरी,

प्यार भी करते हो और उसको जताते भी नहीं।

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ से पहचान…

Continue

Posted on August 29, 2018 at 4:00pm — 17 Comments

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ…

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Posted on July 25, 2017 at 11:00am — 8 Comments

Comment Wall (16 comments)

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At 11:59am on October 16, 2020, बसंत कुमार शर्मा said…

सादर प्रणाम स्वीकारें आदरणीय, सादर स्नेह बनाये रखें, अच्छा लगा आपकी मित्रता रिक्वेस्ट देख करमैं भी रेल परिवार से ही हूँ 

वर्तमान में उप मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद कार्य कर रहा हूँ. 

जबलपुर पश्चिम मध्य रेल 

At 7:49am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी आदाब , बहुत शुक्रिया मेरा हौसला बढ़ने के लिए
At 4:12pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ल जी आदाब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें
At 8:08am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 12:59am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

मोहतरम जनाब रविरवि शुक्ला जी आदाब 

मुझे अपने फ्रेंड्स लिस्ट में जोड़ने के लिए शुक्रिया 

आपसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। 

At 9:25am on September 9, 2018, Ajay Tiwari said…

आदरणीय रवि जी,

आपकी मैत्री हासिल करना किसका सौभाग्य नहीं होगा. और मुझे ख़ुशी है कि ये सौभाग्य अब मुझे भी प्राप्त है. हार्दिक आभार.

At 5:11pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रणाम
प्रथम तो मैं देरी से आपका आभार व्यक्त करते हुए शर्मिंदा हूँ और माफ़ी चाहता हूँ अपने मेरी पहली ही ग़ज़ल पढ़ी तथा इस पर अपने विचार व्यक्त किये मैं आपका शुक्रगुज़ार हूँ मेरी पहली ही ग़ज़ल में बहुत ख़ामियां है मुझे भरोषा है की आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में मैं कुछ सीख सकूँगा
आपका बहुत बहुत आभार
At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh jammu said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
 
 
 

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