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Anita Maurya
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Anita Maurya posted a blog post

प्रेम गीत

प्रीत की चली पवन, जब मिले धरा गगन, मेघों के गर्जन, संगीत बन गए, बज उठे नूपुर, प्रेम गीत बन गए।कान्हा की बंसी ने प्रेम धुन बजाई होके दीवानी देखो राधा चली आई अजनबी थे जो, मन के मीत बन गए, बज उठे नूपुर, प्रेम गीत बन गए।चंद्रमा के प्रेम में, चांदनी पिघल रही, बिन तुम्हारे नेह की, रागिनी मचल रही, प्रीत में यही, जग की रीत बन गए, बज उठे नूपुर, प्रेम गीत बन गए।मन का खुला साँकल है, ऐसा ये प्यार है, नैनो ने हामी भरी, अधरों पे इंकार है, हार थे जो वो, अब जीत बन गए, बज उठे नूपुर, प्रेम गीत बन गए।(अनीता…See More
Oct 16
Sushil Sarna and Anita Maurya are now friends
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Anita Maurya commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post एक दिन आ‍ँसू पीने पर भी टैक्स लगेगा (ग़ज़ल)
"क्या बात , बेहद शानदार..."
Aug 4
Anita Maurya commented on Anita Maurya's blog post आँसू
"बहुत शुक्रिया लक्ष्मण जी बहुत शुक्रिया सुशील जी"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anita Maurya's blog post आँसू
"आ. अनीता जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 20
Sushil Sarna commented on Anita Maurya's blog post आँसू
"वाह बहुत खूबसूरत गजल बनी है आदरणीया जी । हार्दिक बधाई आदरणीया जी"
Jul 18
gumnaam pithoragarhi commented on Anita Maurya's blog post ग़ज़ल
"वाह खूब गजल कही है वाह ..."
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Anita Maurya posted a blog post

आँसू

2122 1212 22उसकी आँखों से जूझते आँसूमैंने देखे हैं बोलते आँसूकैसे आँखों में बाँध रक्खोगे,हिज्र की शब में काँपते आँसू,राज़ कितने छुपाये हैं मन में,उस की पलकों से झाँकते आँसूकैसे तस्लीम कर लिये जायेंबेवफ़ा तेरे वास्ते आँसू,इब्तिदा इश्क़ की हँसाती थी,इंतिहा में हैं टूटते आँसूमौलिक व अप्रकाशितSee More
Jul 15
Anita Maurya commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"वाह , बहुत सुन्दर"
Jul 15
Anita Maurya commented on Anita Maurya's blog post ग़ज़ल
"बहुत शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन जी. व बृजेश कुमार 'ब्रज' जी"
Jul 14
Anita Maurya commented on Anita Maurya's blog post ग़ज़ल
"जी आदरणीय"
Jul 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anita Maurya's blog post ग़ज़ल
"शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन जी...इस जानकारी के लिये..."
Jul 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Anita Maurya's blog post ग़ज़ल
"//लेकिन हिज्र का भार शायद 21 होता है.// आप सही हैं और मौर्या जी भी सही हैं। हिज्र की211/ शब की22/ बात ब211/ताऊँ22"
Jul 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Anita Maurya's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा अनिता मौर्या जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें।"
Jul 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Anita Maurya's blog post ग़ज़ल
"आदरणीया अनिता मौर्या जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। इन मिसरों का पुनरावलोकन करें।  हीर राँझा को दरया मिलाने चले. यूँ लगा शेर सारे ठिकाने चले.  यूँ लगा शेर सारे ठिकाने चले. "
Jul 13
Anita Maurya posted a blog post

ग़ज़ल

212 212 212 212साथ यादों के उनके ज़माने चलेहम ग़ज़ल कोई जब गुनगुनाने चलेहै मुहब्बत का दुश्मन ज़माना तो क्याहीर राँझा को दरया मिलाने चलेहाथ थामो मेरा और चलो उस तरफ़जिस तरफ़ दुनिया भर के दिवाने चलेचाह सुहबत की है इसलिए आज हमचाय पर दोस्तो को बुलाने चलेदाद महफ़िल में जब ख़ूब मिलने लगीयूँ लगा शेर सारे ठिकाने चलेमौलिक व अप्रकाशितSee More
Jul 11

Profile Information

Gender
Female
City State
Kanpur
Native Place
Ranchi
Profession
business
About me
too much emotional

Anita Maurya's Blog

आँसू


2122 1212 22

उसकी आँखों से जूझते आँसू
मैंने देखे हैं बोलते आँसू

कैसे आँखों में बाँध रक्खोगे,
हिज्र की शब में काँपते आँसू,

राज़ कितने छुपाये हैं मन में,
उस की पलकों से झाँकते आँसू

कैसे तस्लीम कर लिये जायें
बेवफ़ा तेरे वास्ते आँसू,

इब्तिदा इश्क़ की हँसाती थी,
इंतिहा में हैं टूटते आँसू

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 15, 2022 at 7:44pm — 3 Comments

ग़ज़ल

212 212 212 212

साथ यादों के उनके ज़माने चले
हम ग़ज़ल कोई जब गुनगुनाने चले

है मुहब्बत का दुश्मन ज़माना तो क्या
हीर राँझा को दरया मिलाने चले

हाथ थामो मेरा और चलो उस तरफ़
जिस तरफ़ दुनिया भर के दिवाने चले

चाह सुहबत की है इसलिए आज हम
चाय पर दोस्तो को बुलाने चले

दाद महफ़िल में जब ख़ूब मिलने लगी
यूँ लगा शेर सारे ठिकाने चले

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 11, 2022 at 8:13am — 3 Comments

ग़ज़ल

२२२ २२२ २२
***************

ये मत पूछो क्या-क्या निकला,
आँसू का इक दरया निकला

हम उसके दिल से यूँ निकले
जैसे कोई काँटा निकला

जिसको जितना गहरा समझे
वो उतना ही उथला निकला

हिज्र की शब की बात बताऊँ ?
सदियों जैसा लम्हा निकला

दुनिया का ग़म, आहें, तड़पन
दिल से कितना मलबा निकला ....

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 8, 2022 at 6:46pm — 5 Comments

एक साँचे में ढाल रक्खा है

२१२२ १२१२ २२
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन

एक साँचे में ढाल रक्खा है
हम ने दिल को सँभाल रक्खा है

तेरी दुनिया की भीड़ में मौला
ख़ुद ही अपना ख़याल रक्खा है

दर्द अब आँख तक नहीं आता
दर्द को दिल में पाल रक्खा है

चल के उल्फ़त की राह में देखा
हर क़दम पर वबाल रक्खा है


मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 20, 2021 at 7:30pm — 7 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 4:46pm on February 22, 2013, नादिर ख़ान said…

अनीता जी जन्म दिन की ढेरों शुभकामनायें ...

At 10:55pm on June 26, 2012, Raj Kumar Rohilla said…

bahut achchi rachnayen hai.

At 3:09pm on February 22, 2011, nemichandpuniyachandan said…
 Hearty Felicitations On Your Birthday.
At 1:04pm on February 22, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
MANY MANY HAPPY RETURNS OF THE DAY ANITA DIDI........
At 10:22am on February 22, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 11:59am on December 19, 2010, madan kumar tiwary said…

आप सभी कवि बंधुओं को मेरी सलाह है की अपनी कविताओं का वीडियो , यू ट्यूब पर अपलोड करें । बहुत सारी कवितायें वाकई दिल को छु जाने वाली हैं।

At 11:30pm on November 19, 2010, Shriprakash shukla said…
आदरणीया अनिता जी,
एक सुन्दर ,सुललितम भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें
सादर
श्रीप्रकाश शुक्ल
At 9:11pm on October 31, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 12:38pm on October 29, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…

At 8:37am on October 29, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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