For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आंचलिक साहित्य

Information

आंचलिक साहित्य

यहाँ पर आंचलिक साहित्य की रचनाओं को लिखा जा सकता है |

Members: 36
Latest Activity: Oct 30, 2025

Discussion Forum

અતીત અને વર્તમાન (લઘુકથા)

"અરે વીરુ ! આ બેન આવ્યા છે, આમનું પેકેટ પેલાં કબાટ માં રાખેલ છે, જરા કાઢીને લયી આઓ." શેઠજી બોલ્યા."જી શેઠજી! " વીરુ આટલું કહીને શેઠજીએ બતાવેલ કબાટ તરફ રૂખ કર્યું. ત્યાં જવા પેહલા એનું ધ્યાન દુકાન માં…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़') Jun 12, 2018.

વિચારોં ની કૈદ 1 Reply

"આહ ! આ શું થઇ રહ્યું છે મને , આવી તો ના હતી હૂં કદી પણ , હે ભગવાન , આ મને શું થયું છે ? " અકળાયેલા મન થી સૌમ્યા સોફા પર બેસી ગયી . ઉપર જોયું તો પંખો ગોળ ગોળ ફરી રહ્યો હતો, પણ આજે એની હવા કેમ નથી…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़'). Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Oct 11, 2017.

આગંતુક (કથા ) 1 Reply

ઘરે મહેમાન ઘણાં હતા , એ વચ્ચે એક આગંતુક આવ્યો એને જોઈને બા એક્દુમ આશ્ચર્યચકિત થયા . બંને ની આંખો મળી , પણ બને ખામોશ રહ્યા . સોનાલી ના પપ્પા એ પણ એ આગંતુક ને જોઈ લીધેલા પણ એ પણ કશું ના બોલ્યા , તેઓએ…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़'). Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 29, 2017.

ઓળખાણ

ફેસબુક પર ઘણાં વખત થી વાત ચિત થતી . આ વાતચિત પ્રેમ માં ક્યારે પરિવર્તિત થયી ખબરજ ના પડી . ચોવીસ વરસ ની સુધા અને ત્રીસ વરસ નો અમ્રિત . હા આજ નામ થી એક બીજા ને ઓળખાણ આપી હતી . ઘર માં જુવાન દીકરી હોય…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़') Nov 16, 2016.

Comment Wall

Comment

You need to be a member of आंचलिक साहित्य to add comments!

Comment by Jaihind Raipuri on October 30, 2025 at 6:41pm

गीत (छत्तीसगढ़ी )

जय छत्तीसगढ़ जय-जय छत्तीसगढ़

माटी म ओ तोर मंईया मया हे अब्बड़

जय छत्तीसगढ़ जय-जय छत्तीस गढ़

हिन्द के तैं हिरदै हव धान के कटोरा

बिस्नुभोग, जवाँफूल ले भर भर बोरा

तस्मई खुरमी, भजिया, लाड़ू जलेबी

हरेली, मड़ई, कमरछठ, तीजा अउ पोरा

बुड़ती राजनांदगाव ले उत्ती रैगढ़

जय छत्तीसगढ़ जय-जय छत्तीसगढ़

सुआ, राउत-नाचा, भरथरी पंडवानी

लोरी, ददरिया,फुगड़ी आनी-बानी

गिल्ली-डंडा, रेस टीप, भौँरा अउ बाँटी

बासी चटनी संग छत्तीसगढ़ीया खांटी

उन्नति के रद्दा म जी बढ़ आघू बढ़

जय छत्तीसगढ़ जय- जय छत्तीसगढ़

महानदी, इंद्रावती, अरपा, सोंढूर

हमार महतारी बर,जल हे भरपूर

हमन सबले सच्चा, हमन सबले बढ़िया

हमन ढाई कोटि,सब्बो छत्तीसगढ़िया

नवा छत्तीसगढ़ हमन गढ़बो जी सुघ्घड़

जय छत्तीसगढ़ जय- जय छत्तीसगढ़

माटी म ओ तोर मंईया मया हे अब्बड़

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on November 10, 2022 at 12:17pm

दिल आपणे नै डाट भाई रै ।
क्यूं ठारया सिर पै खाटभाई रै ।

अस्त्र शस्त्र बतेरे देखे।
देखी सबकी काट भाई रै ।

भाइयां मैं तो रल कै रै ले।
क्यूं बण रया तों लाट भाई रै ।

बाहर कितनिए मौज मिल्ज्या।
घर बरगे नी ठाठ भाई रै ।

बुराई जे तनै आंदी दिखै।
भेड़ ले आपने पाट भाई रै ।

सब की सोच एक सी कोनी।
बातां नै ना चाट भाई रै।

कोई चुस्सै बलदी चिलम नै।
कोई पाणी का माट भाई रै।

'कल्याण' मन की गांठ खोल दे।
हाँ भर कै ना नाट भाई रै।।

मौलिक एवम् अप्रकाशित
सुरेश कुमार 'कल्याण'

Comment by Omprakash Kshatriya on July 20, 2015 at 7:01am

लघुबाता – फिकर (मालवी) “ अरे ओ किसनवा ! लठ ले के कठे जा रियो हे ? मच्छी मारवा की ईच्छा हे कई ?” “ नी रे , माधवा ! गरमी मा पाच कौस पाणी लेवा नी जानो पड़े उको बंदोबस्त करी रियो हु.” “ ई लाठी थी ?” किसनवा से मोटी व वजनी लाठी देख कर माधवा की हंसी छुट गइ . “ हंस की रियो रे माधवा . बापू की लाठी से डरी ने मूँ सकुल जानो रुक सकू तो ये नदि का नी रुक सके.” ------------------------------ लघुकथा – चिंता “ अरे किसन ! लाठी ले कर किधर जा रहा है ? मछली खाने की इच्छा है ?” “ नहीं रे माधव ! गर्मी में पांच मील पानी लेने जाना पड़ता है. उसी का इंतजाम करना चाहता हूँ.” “ इस लाठी से ?” किसन से लम्बी और भारी लाठी देख कर माधव की हंसी छुट गई . “ हंस क्यों रहा है माधव. पिताजी की लाठी से डर कर मैं स्कूल जाना छोड़ सकता हूँ तो नदी बहना क्यों नहीं छोड़ सकती है ?” ----------- मौलिक और अप्रकाशित


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on October 7, 2013 at 8:58am

मोर जानत मा ये मंच मा छत्तीसगढ़ी के पहिली टिप्पणी आपमन करे हौ. मन हा परसन होगे भाई. गीत रुचिस, मोर भाग खुलगे.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 6, 2013 at 6:48pm

बने छतीसढ़ी गीत लिखे हवौ भैय्या अरुण निगम जी , आपमन ला मोर डहन ले झारा झारा बधई हवे !! हमर भांखा के मान घलो बढ़ाय हवौ , ओखरो बर बधई लेवौ !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on October 6, 2013 at 11:38am

मया चिरई : अरुण कुमार निगम
(छत्तीसगढ़ी गीत)


जुग-जुग के नाता पल-छिन मा
मिट जाय कभू छुट जाय कभू
पल-छिन के नाता जुग-जुग के
बन जाय कभू, बँध जाय कभू |


कभू चीन्हत-चीन्हत चीन्है नहिं
कभू अनचीन्हे चिन्हारी लगय
कभू अइसन चीन्हा मिल जावय
नइ जिनगी भर मिट पाय कभू |


कभू हाँसत-हाँसत रोवय मन
कभू रोवत-रोवत हाँसे लगय
चंचल मन के का बात कहवँ
उड़ जाय कभू रम जाय कभू |


कभू अइसन अचरिज हो जाथे
भागे नहिं पावै कहूँ कती
ये मया चिरई बड़ अजगुत हे
बिन फाँदा के फँस जाय कभू ||


(मौलिक व अप्रकाशित)


अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)

[शब्दार्थ -

मया चिरई = प्रेम चिरैय्या, कभू = कभी, चिन्हारी = पहचान, अइसन = ऐसा, चिन्हा = निशानी, अजगुत = आश्चर्यजनक, कहूँ कती = किसी ओर]

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin posted discussions
3 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
5 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
14 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
yesterday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service