For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जब से तूने ..


जब से तूने
मुझे
अपनी दुआओं में
शामिल कर लिया
मैं किसी
खुदा के घर नहीं गया


जब् से तूने
अपने लबों पे
मेरा नाम
रख लिया
मैं
तिश्नगी भूल गया


जब से तूने
मेरी आँखों को
अपने अक्स से
सँवारा हे'
मेरे लबों ने
हर लम्हा
तुझे पुकारा है


जब से तूने
निगाह फेरी है
लम्स-ए-मर्ग का
अहसास होता है
वो शख़्स
जो तुझमें कहीं
सोता था
आज
दहलीज़े दीद को
भिगोता है


(लम्स-ए-मर्ग=मृत्यु का अहसास )


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 259

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on September 3, 2017 at 12:56pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी भाई साहिब प्रणाम , सृजन को अपने मधुर शब्दों से अलंकृत करने का दिल से आभार। आ. समर कबीर जी का सुझाव सदा मेरा पथ प्रदर्शित करता है। आपका और उनका मैं तहे दिल से आभारी हूँ। सृजन को पुनः प्रेषित कर रहा हूँ।

Comment by Sushil Sarna on September 3, 2017 at 12:56pm


आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , सृजन के भावों की गहनता को आत्मीय मान देने का दिल से शुक्रिया। आपका इशारा मैं समझ गया हूँ और तदनुसार संशोधन कर रहा हूँ। आपकी ये छोटी छोटी बातें मेरे सृजन में नक्काशी का काम करती हैं। तहे दिल से शुक्रिया सर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 2, 2017 at 6:29pm

आदरनीय सुशील भाई , सुन्दर भाव अपूर्ण कविता के लिये बधाई आपको । आ. समर भाई जी की सलाह पर गौर कीजियेगा ।

Comment by Samar kabeer on September 1, 2017 at 9:43pm
जनाब सुशील सरना साहिब आदाब,बहुत उम्दा कविता है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'जब से तूने
मेरी दीद् को
अपनी अक्स से
सँवारा है'
'मेरी दीद् को'"दीद्"का अर्थ है देखना,'अक्स'पुल्लिंग है, आपकी पंक्तियां यूँ होना चाहिए :-
'जब से तूने
मेरी आँखों को
अपने अक्स से
सँवारा हे'
Comment by Sushil Sarna on August 31, 2017 at 5:03pm

आदरणीय फूल सिंह जी सृजन की आत्मीय सराहना का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on August 31, 2017 at 5:03pm


आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन के भावों की आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by PHOOL SINGH on August 31, 2017 at 4:03pm

बेहतरीन

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 30, 2017 at 5:08pm

वाह बेहतरीन एहसास | हार्दिक बधाई आदरणीय |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चाँद को जब बदसूरत करने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
""आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आठवें शेर में पर का अर्थ दूसरों से है । "
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद। आपने गजल को…"
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चाँद को जब बदसूरत करने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, पर्यावरण पर चिंता के भाव से उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, दाद के…"
12 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर् ग़ज़ल तक आने तथा मार्गदर्शन करने के लिए आपकी आभारी हूँ।सर्…"
13 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post एक ही जगह बस पड़ा हूँ मैं......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, क्या ख़ूब ग़ज़ल कही है आपने, उस्ताद मुहतरम की इस्लाह पर अमल के बाद ग़ज़ल…"
13 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी नमस्कार।ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आपकी आभारी हूँ…"
13 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल (1222 1222 122)
"धन्यवाद आ० समर कबीर गुरु जी मार्गदर्शन करते रहें"
13 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज 'अह्सास' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ, मिसरा- उठती नहीं…"
16 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, रूहानी अंदाज़ में अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ, उस्ताद…"
17 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on amita tiwari's blog post सर्दीली सांझ ऐसे आई मेरे गाँव
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, हृदय तल से बधाईयाँ। सादर। "
17 hours ago
Samar kabeer commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल (1222 1222 122)
"जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, आपकी ग़ज़ल अभी समय चाहती है, अध्यन करे,इस प्रस्तुति पर बधाई आपको ।"
18 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service