For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - निर्मल नदीम

गिरा के अपनी ही आँखों से खून काग़ज़ पर,
तलाश करता रहा दिल सुकून काग़ज़ पर.


जला के खाक ही कर दे जहान को आशिक़,
अगर उतार दे अपना जुनून काग़ज़ पर..

ग़ज़ल का एक भी मिसरा नहीं कहा मैनें,
थिरक रहा है किसी का फुसून काग़ज़ पर.

कहीं ये अक्स - ए- तमन्ना ही तो नहीं तेरा,
उभर के आया है जो सर निगून काग़ज़ पर..

तमाम रात की तन्हाइयों से छूटा तो
तड़प उठा है वफ़ा का जुनून काग़ज़ पर..

"नदीम" को भी बुलाना अदब की महफ़िल में,
सजा के लाता है दर्द - ए - दुरून काग़ज़ पर..


निर्मल नदीम (मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 528

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nirmal Nadeem on February 28, 2015 at 11:47am

Pratibha Tripathi bahan shukriya aapka.

Comment by Nirmal Nadeem on February 27, 2015 at 11:38am

AAP SAB KA TAH EDIL SE SHUKRAGUZAAR HU.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 26, 2015 at 8:49pm

गिरा के अपनी ही आँखों से खून काग़ज़ पर,
तलाश करता रहा दिल सुकून काग़ज़ पर.


जला के खाक ही कर दे जहान को आशिक़,
अगर उतार दे अपना जुनून काग़ज़ पर..

ग़ज़ल का एक भी मिसरा नहीं कहा मैनें,
थिरक रहा है किसी का फुसून काग़ज़ पर.

 बहुत सुन्दर शेर हुए हैं नदीम जी ,ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी उम्मीद करती हूँ की आप आगे भी भी ओबिओ को अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित ग़ज़लों से समृद्ध करेंगे 

आपको हार्दिक बधाई 

Comment by दिनेश कुमार on February 26, 2015 at 6:19pm
एक उस्तादाना ग़ज़ल हुई है भाई नदीम साहब। वाह वाह वाह
Comment by Nirmal Nadeem on February 26, 2015 at 2:47pm

Janab Dharmendra Kumar Singh Sahab... bahut bahut nawazish aapki.

Comment by Nirmal Nadeem on February 26, 2015 at 2:46pm

Janab Sushil Sarana Sahab... bahut bahut shukriya. aapke mashwire pe amal zaroor karunga. shukriya.

Comment by Nirmal Nadeem on February 26, 2015 at 2:45pm

Aadarneey Mithilesh Sir.... koi ustaad nahi hu main... mai to faqat ek taalib e ilm hu. Seekhna hi meri fitrat hai. shukriya aapka.

Comment by Nirmal Nadeem on February 26, 2015 at 2:43pm

MAHIMA SHREE SAHIBA.... bahut bahut shukriya aapka.

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 26, 2015 at 1:23pm

ओबीओ के नियमों के अनुसार मुझे इस पूर्वप्रकाशित ग़ज़ल पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। पर ग़ज़ल अच्छी है और आपकी पहली पोस्ट है इसलिए दिली दाद कुबूल कीजिए।

Comment by Sushil Sarna on February 26, 2015 at 12:44pm

गिरा के अपनी ही आँखों से खून काग़ज़ पर,
तलाश करता रहा दिल सुकून काग़ज़ पर.

वाह आदरणीय वाह क्या खूब ग़ज़ल कही है आपने … हर शे'र की अपनी महक है अपना अंदाज़ है एक ऐसा लुत्फ़ है जो हर पाठक पढ़ते वक्त महसूस करता है . .... बहरहाल इस खूबसूरत और दिलकश पेशकश के लिए दिली दाद कबूल फरमाएं …अच्छा होता अगर काफिये में प्रयुक्त कठिन लफ़्ज़ों का भावार्थ भी
साथ साथ बता दिया होता .... खैर इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Usha Awasthi's blog post रिमझिम - रिमझिम बदरा बरसे
"आदरणीया ऊषा अवस्थी जी आदाब, इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर। "
7 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा के देवता को बेवफ़ा हम कैसे होने दें(११३ )
"भाई Rupam kumar -'मीत'  जी , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिली शुक्रिया | "
2 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
" आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफजाई के लिए हार्दिक आभार"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी, ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये बहुत बहुत…"
5 hours ago
Chetan Prakash left a comment for Rupam kumar -'मीत'
"मित्र, आपका स्वागत है !"
5 hours ago
Chetan Prakash and Rupam kumar -'मीत' are now friends
5 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। चन्द टंकण…"
5 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा के देवता को बेवफ़ा हम कैसे होने दें(११३ )
"साहब, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, क़बूल कीजिए, हर शेर के लिए दाद और मुबारक बाद…"
6 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"सर सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन क़ुबूल  किजीए। हम वो नहीं हुज़ूर जो डर जाए चोट सेहमने तो…"
6 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, क्या ही  कहने वाह! बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है।"
6 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये…"
7 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service