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हास्य घनाक्षरी : ईलाज (गणेश जी बागी)

छंद : घनाक्षरी 

झट छायी चिंता-रेखा,

नीला-नीला पाँव देखा,
पहुँचे करीम चच्चा, शफ़ाख़ाना आस में.

देखते हकीम बोला,

पाँव में ज़हर फैला,
दोनों पाँव काट डाले, ज़िन्दग़ी की आस में.

बात हुई ज़ल्द साफ़,

कट गये पर पाँव,
डरता हकीम आया, चच्चा जी के पास में.

सुनो जी करीम भाई,

बात ये समझ आई,
लुंगी रंग छोड़ रही, बोला एक साँस में. :-)))))))))

(मौलिक व अप्रकाशित)
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Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on January 1, 2015 at 3:09pm

आदरणीय गणेश भाईजी,

मज़ा आ गया इस हास्य घनाक्षरी को पढ़कर। हार्दिक बधाई । बड़ी दूर की सोच है आपकी। लुंगी डांस वाले भी सहम गये होंगे।

सस्ती लुंगी , नीम हकीमी, हो गया बंटाढार ।

करीम मियाँ विकलांग हुए, हकीम मियाँ गिरफ्तार ॥ 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on December 24, 2014 at 8:42pm

सुनो जी करीम भाई,

बात ये समझ आई,
लुंगी रंग छोड़ रही, बोला एक साँस में. :-)))))))))

पढ़ते पढ़ते हंसी आ ही गयी ....ग़जब !!!! आदरणीय बागी जी... आपकी रचना अक्सर गुदगुदाते हैं....सादर!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 24, 2014 at 1:53pm

घनाक्षरी आपको गुदगुदा सकी, लेखन कर्म सार्थक हुआ, बहुत बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 24, 2014 at 1:52pm

प्रतिक्रिया हेतु आभार आदरणीय राहुल डांगी जी .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 24, 2014 at 1:51pm

आदरणीया छाया शुक्ला जी, यदि यह रचना हास्य के महारथी काका हाथरसी की याद दिला दी तो रचना सफल और लेखन कर्म सार्थक हो गया, उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभार .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 24, 2014 at 10:57am

हाहाहा ....हँसी का फव्वारा छोड़ती हुई प्रस्तुति वाह आ० गणेश जी ,जबरदस्त हास्य घनाक्षरी ..बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by Rahul Dangi Panchal on December 23, 2014 at 10:52pm
वाह सर वाह बहुत सुन्दर
Comment by Chhaya Shukla on December 23, 2014 at 9:00pm

ह्ह्ह्हह ! फुलझड़ियाँ याद आ गईं आ. हाथरसी जी की खूब सारी बधाई इस हास्यरस प्रस्तुती पर सादर नमन !
आ. गणेश जी बागी भाई जी !


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 23, 2014 at 5:25pm

आदरणीय गिरिराज भाई साहब, सराहना और उत्साहवर्धन हेतु दिल से आभार व्यक्त करता हूँ .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 23, 2014 at 5:24pm

आदरणीय खुर्शीद खैराडी जी, यह रचना आपको गुदगुदा सकी, सृजन सार्थक हुआ, आभार .

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