For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Er. Ganesh Jee "Bagi"'s Blog (120)

लघुकथा : मज़ा (गणेश जी बाग़ी)

        ज वो बेहद खुश थी। कई दिनों बाद कुछ ठीक-ठाक ग्राहक आये थे। वह अरसे बाद आज रात बच्चों को अच्छा खाना खिला पाई थी। बच्चे भी बहुत दिनों बाद अच्छा खाना खाकर तृप्त दिख रहे थे, "माँ, वाह, मज़ा आ गया !"

         आज की इस आमदनी की बात उसके दल्ले पति से भी न छुपी रह सकी थी। दो-चार थप्पड़ रसीद कर उसने उससे कुछ पैसे ऐंठ लिये। ठेके पर दोस्तों के साथ बैठ, ठर्रा गटकाते हुए उधर वह भी बड़बड़ाये जा…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 9, 2020 at 4:21pm — 8 Comments

अतुकांत : अमावस की कविता (गणेश बाग़ी)

सुबह-सुबह

सूरज को देखा

बहुत ही सुंदर

फूलों को देखा

बहुत ही प्यारे

रंग बिरंगी तितलियों को देखा

हृदय हुआ प्रफुल्लित…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 13, 2020 at 1:30pm — 7 Comments

अतुकांत कविता : निर्लज्ज (गणेश बाग़ी)

अतुकांत कविता : निर्लज्ज

=================

उसने कहा,

मेरे पास गाड़ी है, बंगला है

बैंक बैलेंस है

तुम्हारे पास क्या है ?

मैने कहा,

मेरे पास हैं...

फेसबुकिये दोस्त

जो नियमित भेजते रहते हैं

गुड मॉर्निंग, गुड इवनिंग,

गुड नाईट, स्वीट ड्रीम वाले संदेश

उसने कहा,

मूर्ख हो तुम

निपट अज्ञानी हो

मैंने कहा,

हाँ, हो सकता है मैं हूँ

किंतु...

सक्रिय हो जाती है छठी इंद्रीय

जब…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 6, 2020 at 12:30pm — 2 Comments

कोरोना के विरुद्ध पाँच दोहे (गणेश बाग़ी)

(1)

सुनी सुनाई बात पर, मत करना विश्वास ।

चक्कर में गौमूत्र के, थम ना जाए श्वास ।।

(2)

कोरोना से तेज अब, फैल रही अफ़वाह ।

सोच समझ कर पग रखो, कठिन बहुत है राह ।।

(3)

कोरोना के संग यदि, लड़ना है अब जंग ।

धरना-वरना बस करो, बंद करो सत्संग ।।

(4)

साफ सफाई स्वच्छता, सजग रहें दिन रात ।

दें साबुन से हाथ धो, कोरोना को मात ।

(5)

मुश्किल के इस दौर में, मत घबराओ यार ।

बस वैसा करते रहो, जो कहती सरकार ।।

(मौलिक एवं…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 20, 2020 at 10:00am — 4 Comments

तीन क्षणिकाएँ (गणेश बाग़ी)

तीन क्षणिकाएँ ...

एक: पन्ने

कुछ पन्ने

अलग करने योग्य

जुड़ने चाहिए

बच्चों की कापियों में

ताकि ...



वो खेल सकें

राजा-मंत्री, चोर-सिपाही

उड़ा सकें

हवाई जहाज

चला सकें

कागज की नाव

बिना डर,

बगैर किसी

असुविधा के ।

***

दो : कोना

बचाकर रखता हूँ

एक छोटा-सा कोना

अपने दिल में ...

जब होता…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 6, 2020 at 8:39am — 4 Comments

लघुकथा : सब्जीवाला (गणेश जी बाग़ी)

उफ्फ !! ये सब्जी वाले भी न, बड़ा हल्ला करते हैं । साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के राष्ट्रीय सचिव खान साहब ने संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुप्ता से कहा ।

"वो सब छोड़िए खान साहब, ये बताइये कि कितने कवियों और कवयित्रियों की अंतिम सूची बनी जिन्हें सम्मानित करने का प्रस्ताव है ?"

"जी गुप्ता साहब, आपके निदेशानुसार 25 कवियों और 125 कवयित्रियों की सूची तैयार कर ली गयी है, किंतु एक बात समझ नही आयी कि इनमें से अधिकतर तो कोई स्तरीय साहित्यकार भी नही हैं, फिर क्यों आपने उन्हें साहित्य और…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 5, 2020 at 9:30am — 14 Comments

अतुकांत कविता : माँद (गणेश बाग़ी)

अतुकांत कविता : माँद

=============

क्या आपने कभी देखी है ?

सियार की माँद !

मैं बताता हूँ

क्या होती है माँद !

जमीन के अंदर

सियार बनाता है

सुरक्षित आशियाना

जिसे कहते हैं माँद

माँद से जुड़े होते है

छोटे-लंबे

कई सारे रास्ते

ताकि

जब कोई खतरा हो

तो उसका कुनबा

निकल सके सुरक्षित...

देश की न्याय प्रणाली भी है

उसी माँद की मानिंद

एक रास्ता बंद होता है

तो कई…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 3, 2020 at 7:59am — 4 Comments

अतुकांत कविता : आदमखोर (गणेश बाग़ी)

अतुकांत कविता : आदमखोर

==================

नुकीले दाँत

लंबे-लंबे नाखून

उभरी हुई बड़ी-बड़ी आँखें

चार पैर

लंबी-सी जीभ

बेतरतीब बाल

भयानक चेहरा

बेडौल शरीर

डरावनी दहाड़ ?

नहीं-नहीं ...

वो ऐसा बिलकुल नहीं है

उसके पास हैं

मोतियों जैसे दाँत

तराशे हुए नाखून

खूबसूरत आँखें

दो पैर, दो हाथ

सामान्य-सी जीभ

सलोना चेहरा

सजे-सँवरे बाल

आकर्षक शरीर

मीठे बोल

किंतु... 

वो…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 1, 2020 at 11:18pm — 2 Comments

दो शब्द दृश्य (गणेश जी बाग़ी)

प्रथम दृश्य : शांति

===========

माँ ने लगाया

चांटा...

मैं सह गयी,

पापा ने लगाया

थप्पड़..

मैं सह गयी,

भाई ने मारा

घूंसा..

मैं सह गयी,

घर से बाहर छेड़ते थे

आवारा लड़के

मैं चुप रही,

पति पीटता रहा

दारू पीकर

मैं चुप रही,

सास ससुर

अपने बेटे की

करते रहे तरफ़दारी

उसकी गलतियों पर भी

मैं चुप रही,

मैं सदैव चुप रही

ताकि बनी रहे

घर मे…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 26, 2020 at 10:57pm — 3 Comments

लघुकथा : भीड़ (गणेश जी बाग़ी)

मारो रे स्साले को, जब हम लोगो का पर्व होता है तभी ये सूअर बिजली काट देता है, दूसरों के पर्व पर तो बिजली नही काटता !

संबंधित बिजली कर्मी जब तक कुछ कहता, तब तक भीड़ से कुछ उत्साहित युवा उस कर्मचारी को पीट चुके थे । बेचारा कर्मचारी गिड़गिड़ाते हुए बस इतना ही कह पाया...

"बड़े साहब के आदेश से बिजली कटी है ।"

"चलो रे....आज उ बड़े साहब को भी देख लेते हैं, बड़ा आया आदेश देने वाला"

भीड़ बड़े साहब के चेम्बर की तरफ बढ़ गयी ।

"क्यों जी, आज हम लोगो का पर्व का दिन है, जुलूस…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 21, 2020 at 2:00pm — 2 Comments

अतुकांत कविता : मैं भी लिखूंगा एक कविता (गणेश बाग़ी)

अतुकांत कविता : मैं भी लिखूंगा एक कविता

मैं भी लिखूंगा

एक कविता

चार पांच सालों बाद..

जब मेरे हाथों द्वारा लगाया हुआ

पलास का पौधा

बन जायेगा पेड़

उसपर लगेंगे

बसंती फूल

आयेंगी रंग बिरंगी तितलियाँ

चिड़िया बनायेंगी घोंसला...

मैं भी लिखूंगा

एक कविता

चार पांच सालों बाद..

जब मेरे घर आयेगी

नन्ही सी गुड़िया

जायेगी स्कूल

मेरी उँगली पकड़

और पढ़ेगी

क ल आ म .. कलम

गायेगी…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 15, 2020 at 11:30pm — 4 Comments

दो क्षणिकाएँ (गणेश जी बाग़ी)

दो क्षणिकाएँ

========

(1) थप्पड़

मुझे पता भी न था

उस शब्द का अर्थ

गुस्से में किसी को बोल दिया था

'साला....'

गाल पर झन्नाटेदार थप्पड़ के साथ

माँ ने समझाया था

गाली देना गंदी बात !

काश,

उनकी माँ ने भी

लगाया होता

थप्पड़

तो आज...

नहीं देते वे

माँ, बहन को इंगित

गालियाँ ।



(2) बारुद

उनको दिखाई देता है

बारूद

मेरी दीया-सलाई की काठी में,

जिससे जलता है

हमारे घर का…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 5, 2020 at 8:30am — 5 Comments

अतुकांत कविता : आजादी (गणेश बाग़ी)

प्रधान संपादक, आदरणीय योगराज प्रभाकर जी की टिप्पणी के आलोक में यह रचना पटल से हटायी जा रही है ।

सादर

गणेश जी बाग़ी

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 1, 2020 at 9:30am — 30 Comments

अतुकांत कविता : प्रगतिशील (गणेश जी बागी)

अतुकांत कविता : प्रगतिशील

अकस्मात हम जा पहुँचे

एक लेखिका की कविताओं पर

जिसमे प्रमुखता से उल्लेखित थे

मर्द-औरत के गुप्त अंगों के नाम

लगभग सभी कविताओं में...

पूरी तरह से किया गया था निर्वहन

उस परंपरा को

जहाँ दी जाती हैं गालियाँ

समूची मर्द जाति को

एक ही कटघरे में खड़ा कर

प्रस्तुत किया जाता है विशिष्ट उदाहरण

चंद मानसिक विक्षिप्तों…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 30, 2020 at 7:30pm — 6 Comments

छंद मुक्त कविता : रावण दहन

छंद मुक्त कविता : रावण दहन

मैं रूप बदल कर बैठा हूँ ।
स्वरूप बदल कर बैठा हूँ ।
मैं आज का रावण हूँ मितरों,
जन के मन में छुप बैठा हूँ ।।

मुझको जितना भी जलाओगे ।
हर घर में उतना पाओगे ।
गर मरना भी चाहूँ मितरों,
तुम राम कहाँ से लाओगे ।।

कन्या को देवी सा मान दिया ।
नारी को माँ का सम्मान दिया ।
इन बातों का नही अर्थ मितरों,
जब गर्भ में कन्या का प्राण लिया ।। 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 8, 2019 at 3:28pm — 6 Comments

ग़ज़ल

घोघा रानी, कितना पानी ।

बदला मौसम, बरसा पानी ।।

डूब गई गली और सड़कें ।

नगर निगम का उतरा पानी ।।

सब कुछ अच्छा करते दावा ।

नही बचा आँखों का पानी ।।

गंगा कोशी पुनपुन गंडक ।

सब नदियों में उफना पानी ।।

मैं तो हूँ गंगा का बेटा ।

पितरों को भी देता पानी ।।

नगर हुआ मेरा स्मार्ट सिटी ।

उठा गरीब का दाना पानी ।।

जल दूषित से उनको क्या है ?

वो पीते बोतल का पानी…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 23, 2019 at 12:30pm — 7 Comments

अतुकांत कविता : विरासत

मुझे विरासत में मिलीं

कुछ हथौड़ियाँ

कुछ छेनियाँ

मिला थोड़ा-सा धैर्य

कुछ साहस

थोड़ा-सा हुनर

मैं तराशने लगा

निर्जीव पत्थरों को

बना दिया

सुंदर-सुंदर मूर्तियाँ

जो कई अर्थों में

श्रेष्ठ हैं

ईश्वर द्वारा बनायी गयीं

सजीव मूर्तियों से

जिन्हें नहीं पता रिश्तों की मर्यादा

नही कर पातीं ये भेद

दूधमुँही बच्चियों, युवतियों और वृद्ध महिलाओं में

काश

एक अदद कलम

मुझे मिली होती …

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 24, 2018 at 11:30pm — 21 Comments

पाँच दोहे (गणेश जी बाग़ी)

हाथ लगा जो गाल पर, पटकेंगे धर केश ।
दुनिया संग बदल रहा, गाँधी का ये देश।।

नैतिकता का पाठ अब, पढ़े-पढ़ाये कौन ?
मात-पिता-बच्चे सभी, ले मोबाइल मौन।।

'तुम' धन 'मैं' जब 'हम' हुए, दोनों हुए विशेष।
'हम' ऋण 'तुम' जैसे हुए, नहीं बचा अवशेष ।।

रीति जहां की देख कर, मन चंचल, मुख मौन।
मतलब के सधते सभी, पूछें तुम हो कौन ?

छप कर बिकता था कभी, जिंदा था आचार।
जबसे बिक छपने लगा, मृत लगते अखबार।।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 5, 2018 at 9:51pm — 13 Comments

लघुकथा : धनवान (गणेश जी बाग़ी)

नर्स अनिता उदास होकर अपनी सहकर्मी से बोली, "आज का दिन ही खराब है, बेड नंबर चार को भी लड़की हुई है । याद है जो सुबह में बेटी पैदा हुई थी ?"

"कौन ! वही क्या, जो लोग बड़ी गाड़ी से आये थे"

"हाँ रि वही, बख्शीस माँगा, तो कुछ दिया भी नही और गुस्से से बोला कि एक तो बेटी हुई है और तुम्हे बख्शीस की पड़ी है"

खैर ....

"मालती देवी के घर से कौन है ?"

"जी बहन जी, मैं हूँ, बताइए न, मालती कैसी है और ...."

रघुआ घबराते हुए बोला ।

जी, आपके घर लक्ष्मी आयी है ।

रघुआ खुशी से झूम उठा और…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 28, 2018 at 8:27pm — 10 Comments

ग़ज़ल (गणेश जी बागी)

पाँच बरस तक कुछ न कहेंगे कर लो अपने मन की बाबू ।

बात चलेगी, तो बोलेंगे, अपनी ही थी गलती बाबू ।।

चाँद-चाँदनी, सागर-पर्वत, चाहत कहाँ किसानों की है ?

मुमकिन हो तो इनके हिस्से लिख दो थोड़ी बदली बाबू ।।

खाली थाली, खाली तसला, टूटा छप्पर, चूल्हा गीला,

रोजी-रोटी बन्द पड़ी जब, क्या करना जन-धन की बाबू ।।

जो काशी बन जाए क्योटो, या दिल्ली हो जाए लंदन ।

प्यासा जन बस जल पा जाये, गाँव लगे शंघाई बाबू ।।

अच्छे-दिन, काले-धन की…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 22, 2018 at 3:30pm — 17 Comments

Monthly Archives

2020

2019

2018

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'मार ही दें न फिर ये…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on सचिन कुमार's blog post ग़ज़ल
"जनाब सचिन जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'नींद आंखों से हुई है आज…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है, शिल्प और व्याकरण पर ध्यान देने की ज़रूरत है,…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post करोना -योद्धाओं के नाम
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"लघु- कथा कल मानव और विभा की शादी के दस वर्ष पूरे हो रहे थे। सो इस बार की मैरिज एनीवर्सरी विशेष थी।…"
6 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"आपका दिली आभार आदरणीय उस्मानी जी।नमन।"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"सादर नमस्कार। बढ़िया सकारात्मक रचना। लेकिन  पिछली रचनाओं जैसी की प्रतीक्षा रहती है।"
7 hours ago
Kanak Harlalka replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"वाह..बहुत सुन्दर लघुकथा । हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है उसके भुक्तभोग के अनुसार.."
9 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"इंसान लोग ------------ ' आंटी के घर काम करने जाती है तू?' काम वाली बाई से सुरभि टीचर ने…"
9 hours ago
Samar kabeer and Chetan Prakash are now friends
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"आदाब। हार्दिक बधाई आदरणीय अनिल मकारिया जी गोष्ठी का आग़ाज़ बढ़िया उम्दा व विचारोत्तेजक रचना से करने…"
10 hours ago
Anil Makariya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"जिंदा स्मारक "आपका स्वागत है एक नई सुबह नए जिंदादिल शहर में आर जे अर्जुन के साथ। कई लोग मेरे…"
10 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service