For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नव वर्ष पर ...हों सृजन अब कुछ नये से..

नव वर्ष पर....

हों सृजन अब कुछ नये से.....
कुछ नई सी कल्पनाएं।
फिर नया यह वर्ष आओ
हम सभी मिलकर मनाएं।

छोड़ दें हम पंगु सब
परिपाटियों को।
दें नये स्वर से गुँजा
इन वादियों को।
जो सुखद सी सीख गत से
है मिली थाती हमें
साथ ले बढ़ते चले हम
तोड़ कर सब वर्जनाएं।

फिर नया यह वर्ष आओ
हम सभी मिलकर मनाएं।

मुफलिसी सीलन भरे
कोनों पसरती।
जिन्दगी भय लूट के
सायों सिसकती
घूप पर हक है सभी का
सब जियें निर्भय यहाँ
मानसों के द्वार खोलें
आ रही संभावनाएं।

फिर नया यह वर्ष आओ
हम सभी मिलकर मनाएं।
सीमा हरि शर्मा
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 572

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by seemahari sharma on December 21, 2014 at 8:57am
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी बहुत बहुत धन्यवाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 21, 2014 at 12:21am

आदरणीया सीमाहरि जी बहुत सुन्दर रचना है बधाई ... इन पंक्तियों के लिए विशेष रूप से बधाईयाँ 

धूप पर हक है सभी का

सब जियें निर्भय यहाँ
मानसों के द्वार खोलें
आ रही संभावनाएं।

Comment by seemahari sharma on December 20, 2014 at 11:13pm
बहुत बहुत आभार आदरणीय अखिलेश कृष्ण जी उत्साहवर्धन करती आपकी प्रतिक्रिया का ह्रदय से स्वागत है
Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on December 20, 2014 at 11:01pm

आदरणीया सीमाहरिजी

बड़ी सुंदर बात कह दी, नव वर्ष के आगमन पर ।

लीजिए हार्दिक बधाई, गीत की हर पंक्तियों पर॥

Comment by seemahari sharma on December 20, 2014 at 10:46pm
आदरणीय rajesh kumari जी नूतन वर्ष की आपको भी अग्रिम वधाई एवं अशेष शुभ कामनाएं।आभार नवगीत पसंद करने के लिए
Comment by seemahari sharma on December 20, 2014 at 10:42pm
Somesh Kumar जी बहुत शुक्रिया आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया के लिए

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 20, 2014 at 9:22pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति सीमा जी आने वाले वर्ष की अग्रिम बधाई लीजिये इस रचना के साथ साथ 

Comment by somesh kumar on December 20, 2014 at 7:52pm

छोड़ दें हम पंगु सब
परिपाटियों को।
दें नये स्वर से गुँजा
इन वादियों को।
जो सुखद सी सीख गत से
है मिली थाती हमें
साथ ले बढ़ते चले हम
तोड़ कर सब वर्जनाएं।

सुंदर रचना के लिए बधाई 

Comment by seemahari sharma on December 20, 2014 at 6:49pm
बहुत बहुत धन्यवाद shyam Narain Verma जी प्रतिक्रिया देकर उत्साहवर्धन करने के लिये
Comment by seemahari sharma on December 20, 2014 at 6:46pm
आदरणीय Hari Prakash Dube जी बहुत बहुत धन्यवाद रचना पसंद कर प्रोत्साहित करने के लिए

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service